कोडरमा। झारखंड के 62 हजार पारा शिक्षकों को 19 जनवरी 2022 को हेमंत सरकार द्वारा अपने चुनावी वादे को पूरा करने ओर कैबिनेट में ऐतिहासिक मुहर लगाने पर एकीकृत पारा शिक्षक संघ राज्य इकाई के सदस्य वीरेंद्र राय ने प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से झारखंड सरकार मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री एवं तमाम कैबिनेट मंत्री ,मुख्य सचिव, शिक्षा सचिव, वितसचिव एवं कार्मिक सचिव परियोजना निदेशक को सहृदय धन्यवाद दिया है। उन्होंने कहा कि झारखंड के पारा शिक्षक ने अब अपने आप को सम्मान से जिने के लिए गौरान्वित है। बिगत लगभगबी 19 वर्षों से पारा शिक्षकों ने लंबी लड़ाई लड़ी, विधानसभा घेराव, राज्यपाल आवास घेराव, प्रमंडल घेराव, जिला मुख्यालय घेराव, प्रखंड घेराव, मंत्री आवास घेराव, मुख्य मंत्री आवास घेराव, दिल्ली जंतर मंतर घेराव, बाइक रैली, गिरफ्तारी देने, पैदल मार्च इत्यादि विभिन्न प्रकार के संघर्षों से भरे आयोजन करते अपनी मांगों रखते रहे। लेकिन वर्तमान हेमंत सरकार ने उनकी चिरपरिचित मांग को ध्यान में रखकर आत्मचिंतन कर झारखंड के इतिहास में स्वर्ण युग की तरह 19 जनवरी को पारा शिक्षकों से सहायक अध्यापक सेवा स्थाईकरण नियमावली कैबिनेट की मुहर लगा दी। जिससे पारा शिक्षक ही नहीं उनके सभी परिवार में खुशी का महौल है और इसके लिए झारखंड सरकार के आभारी है। नियमावली में कुछ कमी रही है जिसके लिए मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री ने कहा है कि वेतनमान भी हमारी सरकार लागू करगी। पारा शिक्षकों ने मांगो को लेकर जेल तक गए। आज नियमावली कैबिनेट से पास होते देखकर सभी मे खुशी का रंग भरा है। महागठबंधन के वादा पूरा करने पर सरकार को धन्यवाद देने वालों में सहायक अध्यापक विकेंद्र सिन्हा, मनोज यादव, दामोदर यादव, अमित कुमार, संजीव भारती, कैलाश राम,रामू यादव, तनवीर आलम, शाकिब महमूद, वीरेंद्र साव,सीताराम पासवान, रामकृष्ण यादव, मनोज यादव, प्रणब मुरारी, सुखदेव राणा, सुभाष सिंह, प्रदीप गिरी, मनोज राणा, सुरेश यादव, सुरेश गुप्ता, मुकेश तिवारी, राजेश राणा, शंभु यादव, सलीम अंसारी, बलदेव रजक, सुनील यादव, इंद्र देव यादव, रामस्वरूप यादव, वीरेंद्र दास, पंकज सिंह, राजा बाबू, प्रवीण कुमार, छाया देवी, सुनीता देवी, प्रमिला देवी, अरचना देवी, बिहारी यादव, अनुराग विश्वकर्मा, सुमन कुमार, शशिरंजन, सुमित कुमार, पवन सिंह आदि शामिल है। लंबे संघर्ष और आंदोलन में शिक्षकों की शहादत के बार झारखंड के पारा शिक्षकों की वर्षों पुरानी मांग आखिरकार 19 वर्षों बाद महागठबंधन और हेमंत की सरकार ने मोहर लगाकर पूरी कर दी। लेकिन 19 जनवरी की शाम जैसे ही यह खबर झारखंड के कोने कोने में पहुंची, जिसके बाद तमाम पारा शिक्षक समुदाय ने अपने खोए शहीद शिक्षकों की शहादत को याद कर उनकी आंखें नम हो गई। आज भले ही नियमितीकरण की मांग पूरी हुई हो पर पारा शिक्षक समुदाय ने अपने जीवन में जो खो दिया उसके कारण आज वह इस उपलब्धि पर पूरी खुशी भी जाहिर नहीं कर पा रहे। हालांकि देखना होगा की सहायक अध्यापक के पद मिलने के बाद अब पद की गरिमा बढ़ाने के लिए सरकार उन्हें वेतनमान देकर कब अलंकृत करती है।
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