एबीएन न्यूज नेटवर्क, असम/लोहरदगा। असम के चाय बागानों में इस बार चुनावी माहौल सिर्फ वोट तक सीमित नहीं, बल्कि अधिकार, पहचान और सम्मान की लड़ाई में बदलता नजर आ रहा है। इसी कड़ी में लोहरदगा लोकसभा क्षेत्र के सांसद और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुखदेव भगत ने ढेकियाजुली विधानसभा क्षेत्र में महागठबंधन प्रत्याशी बटाश ओरंग के समर्थन में आयोजित एक विशाल जनसभा को संबोधित किया।
सभा में हजारों की संख्या में चाय बागान के मजदूर, आदिवासी समुदाय के लोग और कांग्रेस कार्यकर्ता उपस्थित रहे। अपने संबोधन में सुखदेव भगत ने सीधे तौर पर बीजेपी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि अब आदिवासी समाज जाग चुका है और वह अपने अधिकारों का हिसाब लेने के लिए तैयार है। उन्होंने जोशपूर्ण अंदाज में नारा दिया कि चाय बागान का पसीना बोलेगा, आदिवासी अब हिसाब लेगा! जिस पर सभा में मौजूद लोगों ने जोरदार समर्थन जताया।
भगत ने जनसभा में लोकतंत्र की वास्तविक ताकत पर जोर देते हुए कहा कि हमें यह सोचना होगा कि जब हमारा 70 वोट है और उनका सिर्फ 5 वोट, तो फिर राजा कौन बनता है? अब समय आ गया है कि बहुसंख्यक समाज अपनी ताकत पहचाने और सत्ता पर अपना अधिकार स्थापित करे। उन्होंने लोगों से अपील की है कि वे अपने वोट की शक्ति को समझें और इसे सही दिशा में इस्तेमाल करें।
उन्होंने झारखंड, असम और पश्चिम बंगाल के आदिवासी समाज को एकजुट बताते हुए कहा कि हर जगह एसटी समाज अपने हक और पहचान के लिए संघर्ष कर रहा है। भगत ने कहा हम झारखंड से आए हैं, लेकिन हमारा मकसद सिर्फ राजनीति नहीं, बल्कि आदिवासी समाज के हक-अधिकार की रक्षा करना है। हम किसी से दुश्मनी नहीं रखते, लेकिन अन्याय के खिलाफ आवाज जरूर उठाएंगे।
सुखदेव भगत ने बीजेपी पर चुनावी वादों को पूरा न करने का आरोप लगाते हुए कहा कि चाय बागान के मजदूरों और आदिवासियों को अब तक कोई ठोस लाभ नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि ये लोग सिर्फ चुनाव में घुसपैठियों की बात करते हैं, लेकिन उसका समाधान नहीं देते। केंद्र में भी इनकी सरकार है, राज्य में भी प्रभाव है, फिर भी आदिवासी समाज की समस्याएं जस की तस हैं।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि झारखंड से भेजी गयी आदिवासी मुद्दों की रिपोर्ट को केंद्र सरकार ने गंभीरता से नहीं लिया और उसे रोकने का काम भी भाजपा ने ही किया। भगत ने अपने भाषण में संविधान का जिक्र करते हुए कहा कि आदिवासी समाज बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर द्वारा दिये गये संविधान पर विश्वास करता है और उसी के तहत अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ेगा।
उन्होंने दृढ़ता से कहा कि हमारा जो फंडामेंटल राइट है, उसे कोई छीन नहीं सकता। हम अपने संवैधानिक अधिकार लेकर रहेंगे। उन्होंने बताया कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी के निर्देश पर वे असम आए हैं, ताकि चाय बागान के आदिवासियों की आवाज को मजबूत किया जा सके। भगत ने कहा कि हमारे नेता ने कहा है कि जाओ और आदिवासी भाइयों-बहनों की आवाज बुलंद करो, उनके हक और पहचान की लड़ाई को संसद तक पहुंचाओ। अपने संबोधन के अंत में सुखदेव भगत ने इस चुनाव को आदिवासी समाज के लिए अग्नि परीक्षा बताते हुए कहा कि यह सिर्फ एक चुनाव नहीं, बल्कि आने वाले भविष्य की दिशा तय करेगा।
उन्होंने लोगों से महागठबंधन प्रत्याशी बटाश ओरंग को भारी मतों से विजयी बनाने की अपील की। इस जनसभा में जिला अध्यक्ष अमरधाई सक्या, महिला कांग्रेस की ओमनी, यूथ कांग्रेस के कलींदर, एनएसयूआई के निसान सहित कई स्थानीय नेता और बड़ी संख्या में आम जनता मौजूद रही। कुल मिलाकर, यह जनसभा सिर्फ एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि आदिवासी अस्मिता, अधिकार और सम्मान की लड़ाई का बड़ा मंच बनकर उभरी, जहां से सत्ता के खिलाफ एक मजबूत संदेश देने की कोशिश की गयी।
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