एआई आधारित टूल रक्षा से ट्रैफिकिंग के शिकार बच्चों को वापस ला सकता है झारखंड

 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। कृत्रिम मेधा (एआई) आधारित टूल रक्षा के देशव्यापी लांच से बाल विवाह और इंटरनेट पर बाल यौन शोषण एवं दुर्व्यवहार सामग्री (सी-सीम) के चिंताजनक प्रसार पर काबू पाने में झारखंड सरकार के प्रयासों को एक प्रभावी औजार मिल सकता है जो उसे बच्चों के खिलाफ बढ़ रहे अपराधों से निपटने के उपायों को गति दे सकता है। 

यह एक तथ्य है कि झारखंड के आर्थिक रूप से कमजोर व हाशिये के परिवारों के बच्चे ट्रैफिकिंग गिरोहों के चंगुल में फंस जाते हैं। इन बच्चों को खतरनाक उद्योगों में झोंक दिया जाता है या फिर लड़कियों की किसी अधेड़ से शादी कर दी जाती है। 

दुनिया में अपनी तरह के इस अनूठे प्रौद्योगिकी-सक्षम टूल को जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन ने विकसित किया है जो उन्नत एआई क्षमताओं का उपयोग कर देश भर के आंकड़ों का विश्लेषण कर वास्तविक समय में बच्चों की ट्रैफिकिंग और बाल विवाह के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्रों का मानचित्रण, संवेदनशील बच्चों और समुदायों की पहचान, ट्रैफिकिंग जैसे मुनाफे वाले संगठित अपराध में शामिल गिरोहों की निगरानी, उसके स्रोत और गंतव्य बिंदुओं की ट्रैकिंग, तथा शोषण के उभरते रुझानों व नए केंद्रों का पता लगाने में सक्षम बनाता है।  

दुनिया में अपनी तरह के इस अनूठे प्रौद्योगिकी-सक्षम टूल रक्षा को प्रॉस्पेरिटी फ़्यूचर्स : चाइल्ड सेफ्टी टेक समिट में लांच किया गया, जो एआई इम्पैक्ट समिट 2026 का आधिकारिक प्री-समिट कार्यक्रम है। यह सम्मेलन इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सहयोग से जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (जेआरसी) ने अपने रणनीतिक साझेदार इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन के साथ मिलकर आयोजित किया। 

बाल संरक्षण के लिए अपनी तरह के इस पहले टूल रक्षा की सराहना करते हुए केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी तथा वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने कहा, प्रौद्योगिकी का वास्तविक मूल्यांकन सबसे संवेदनशील तबकों और लोगों की सुरक्षा में निहित है। 

बच्चे हमारे भविष्य का प्रतिनिधित्व करते हैं और यह हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है कि जिस डिजिटल दुनिया और कृत्रिम मेधा (एआई) को वे विरासत में पायें, वह सुरक्षित, समावेशी और सशक्त करने वाली हो। जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन की ओर से बच्चों की सुरक्षा, सशक्तीकरण और संरक्षण के लिए एआई-आधारित प्लेटफॉर्म की शुरुआत एक क्रांतिकारी कदम है। 

बाल अधिकारों की सुरक्षा व संरक्षण के लिए नागरिक समाज संगठनों के देश के सबसे बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के 250 से भी ज्यादा सहयोगी संगठन 451 जिलों में काम कर रहे हैं। अकेले झारखंड में ही नेटवर्क के 22 सहयोगी संगठन राज्य के 24 जिलों में काम कर रहे हैं। 

बाल विवाह, बाल मजदूरी और आनलाइन यौन शोषण जैसे बच्चों के खिलाफ अपराधों के खात्मे के लिए समय रहते हस्तक्षेप और अदृश्यता सबसे अहम पहलू हैं। ऐसे में एआई आधारित यह टूल कानून लागू करने वाली एजेंसियों, समुदायों और जमीन पर काम कर रहे संगठनों के लिए करामाती साबित हो सकता है। 

हालांकि, झारखंड देश के उन चंद राज्यों में है जहां पिछले कुछ वर्षों में बच्चों के खिलाफ अपराधों में लगातार कमी देखने को मिली है लेकिन रक्षा राज्य के बाल सुरक्षा तंत्र को और मजबूती देने के साथ समय रहते हस्तक्षेप सुनिश्चित करने में सहायक होगा। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के 2023 की रिपोर्ट के अनुसार राज्य में 2021 में बच्चों के खिलाफ अपराध के 1867 और 2022 में 1917 मामले दर्ज किये गये। लेकिन 2023 में यह संख्या घटकर 1626 रह गयी।  

इस बात को रेखांकित करते हुए कि रक्षा किस प्रकार बाल संरक्षण के पूरे ईको-सिस्टम को रूपांतरित कर सकता है, जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के संस्थापक भुवन ऋभु ने कहा, बाल संरक्षण प्रणालियों को सुदृढ़ करने और बच्चों की सुरक्षा व समृद्धि को आगे बढ़ाने में एआई के उपयोग में भारत अग्रणी भूमिका निभा रहा है। तकनीक के उपयोग से दुनिया का सबसे समग्र बाल संरक्षण पारिस्थितिकी तंत्र स्थापित करने की दिशा में रक्षा भारत के वैश्विक नेतृत्व का एक ऐतिहासिक पड़ाव है। 

रक्षा का एक मंच के रूप में उपयोग करते हुए भारत तकनीक के सहारे देखभाल और संरक्षण की आवश्यकता वाले प्रत्येक बच्चे और हर संवेदनशील परिवार की पहचान और निगरानी कर सकता है। आंकड़ों को ज्ञान और ठोस कार्रवाई में रूपांतरित कर यह दृष्टिकोण न्याय तक पहुंच का विस्तार कर रहा है, संवेदनशील परिवारों के लिए सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार ला रहा है और बच्चों के सुरक्षित व समृद्ध भविष्य के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को और सुदृढ़ कर रहा है। साथ मिलकर हम हर बच्चे के लिए इस तकनीक का इस्तेमाल करेंगे। 

रक्षा का फोकस अपने तीन लक्ष्य केंद्रित टूल के जरिए बाल सुरक्षा तंत्र में पूर्वानुमान, बचाव व सुरक्षा पर है। पहला टूल व्यापक स्तर पर परिवारों की आर्थिक असुरक्षा को कम कर रोकथाम पर काम करता है, विशेषकर बाल विवाह के विरुद्ध। दूसरा टूल ट्रैफिकिंग जैसे संगठित आर्थिक अपराध से निपटता है। यह अपराध के घटित होने से पहले ही उसका पूवार्नुमान और रोकथाम, व दूसरी ओर पैसे के लेनदेन की पड़ताल कर संगठित आपराधिक गिरोहों की जड़ों और उनके विस्तार की पहचान करने पर केंद्रित है। 

तीसरा टूल डिजिटल बाल संरक्षण को सशक्त करता है और यह बाल यौन शोषण सामग्री के निर्माण, उसके अपलोड, डाउनलोड और देखने से जुड़े आनलाइन हीट जोन और आईपी पतों का पता लगाने, उनके विश्लेषण और मानचित्रण में सक्षम है। इस खबर से संबंधित और अधिक जानकारी के लिए जितेंद्र परमार (8595950825) से संपर्क करें।

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