एबीएन नॉलेज डेस्क। मां कहती हैं कि सतुआ तब तक सतुआ नहीं कहलाता जब तक वो सात अनाज से मिलकर न बना हो। मक्की, जौ, ज्वार, मटर, चना, बाजरा और चावल मां डालती थी। इन सभी अनाज को भिगो कर सुखाती थी और फिर भाड़ में भूनने के लिए भिजवा देती थीं।
भुजैइन काकी की पारिश्रमिक अलग से चावल बांध कर देती थीं। अगर उन्हें अलग से मेहनताना नहीं दिया जाता था तो काकी भूनने के लिए आए अनाज का कुछ हिस्सा भुजाई के मूल्य के रूप में रख लेती थीं।
भाड़ में पहले से ही भीड़ लगी रहती है।
कोई पसर भर मटर ले आया है तो कोई चना लाया है, किसी के पास एक सिकौहुली मकई के दाने हैं तो कोई भुजिया चाउर लाया है।
काकी जिसका भूजा भूजती थी उससे ही भाड़ झोकवाती थीं। बगिया के पेड़ो से गिरी पत्तियां बहार कर खांची में दबा दबा कर भर लाती थीं और यही उनके भाड़ का ईंधन होता था।
भाड़ जलते ही भाड़ से हवा के सर पर सवार हो कर उड़ती आती सोंधी सुगंध जब नाक में चढ़ती थी तो फिर मन गर्म गर्म भूजा चबाने के लिए बेताब हो उठता था। मां फिर कुछ न कुछ देकर भुजाने भेज देती थीं। जो आनंद गर्म गर्म भूजे भूजा का होता है उतना स्वाद रखे हुए में नहीं आता है। खैर सतुआ से चले थे भूजा पर आ अटके तो सतुआ की तरफ वापिस चलते हैं।
सतुआ जब भुजा कर आ जाता था तब जांता धोया जाता था आस पास चिकनी मिट्टी से लीप कर साफ किया जाता था और फिर मां, काकी मिलकर सतुआ पीसती थीं। दोपहर जब तीन बजे वाली भूख लगती थी तब भोजन के बजाय हमारे गांव का दो मिनट वाला चटपटा, स्वास्थ्य वर्धक, पौष्टिक आहार तैयार होता था।
फटाफट नमक डाल कर घोल लिया चटनी, प्याज, सिरका, हरी मिर्च संग खा कर आनंद लिया। हमारे सनातन धर्म में बेटी के घर का पानी पीना निषेध किया गया है सो हमारे बुजुर्ग जब कभी बिटिया के घर जाते थे तो संग में सतुआ बांध ले जाते थे। गांव में किसी के घर से पानी मंगवा कर घोलकर सतुआ खा लेते थे।
खाने से मेरा तात्पर्य खाना ही है अब आप लोग सोचेंगे कि सत्तू तो पिया जाता है और मैं खाना लिख रही हूं तो सत्तू अब पिया जाने लगा है पहले गाढ़ा सा घोलकर उंगली से चाट चाट कर खाया ही जाता था। जिसको मीठा पसंद होता था वो सत्तू में राब डालकर मुट्ठी बना कर खाता था।
घर का कोई सदस्य सुबह जल्दी कहीं जाने लगता था तो सत्तू सबसे उत्तम भोजन होता था। दूर जाना है तो सत्तू बांध कर साथ ले जाता था। हमारे यहां सतुआन नाम से बाकायदा एक लोकपर्व है उसमें उस दिन घर के सभी सदस्य एक समय सतुआ ही खाते हैं और उस दिन सतुआ खाना अनिवार्य माना जाता है।
Subscribe to our website and get the latest updates straight to your inbox.
टीम एबीएन न्यूज़ २४ अपने सभी प्रेरणाश्रोतों का अभिनन्दन करता है। आपके सहयोग और स्नेह के लिए धन्यवाद।
© www.abnnews24.com. All Rights Reserved. Designed by Inhouse