हिंदी दिवस भाषा का गौरव और सांस्कृतिक पहचान : संजय सर्राफ

 

टीम एबीएन, रांची। हिंदी साहित्य भारती के उपाध्यक्ष सह झारखंड अभिभावक मंच के प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि हर वर्ष  को पूरे भारत में हिंदी दिवस मनाया जाता है। यह दिन न केवल हमारी राजभाषा हिंदी को सम्मान देने का अवसर है, बल्कि देशवासियों को अपनी मातृभाषा के महत्व को समझने और उसे सम्मानित करने की प्रेरणा भी देता है।

हिंदी दिवस मनाने की शुरुआत 14 सितंबर 1949 को हुई थी, जब संविधान सभा ने हिंदी को भारत की राजभाषा के रूप में स्वीकार किया। यही कारण है कि इस ऐतिहासिक दिन को यादगार बनाने के लिए हर साल हिंदी दिवस मनाया जाता है। इसके पीछे एक महत्वपूर्ण उद्देश्य यह था कि देश की स्वतंत्रता के बाद, हमें एक ऐसी भाषा की आवश्यकता थी जो जनमानस से जुड़ी हो, जिसे आम जनता सहज रूप से समझ और बोल सके। 

हिंदी उस समय देश की एक बड़ी आबादी द्वारा बोली और समझी जाती थी, अतः इसे राजभाषा का दर्जा दिया गया। हिंदी भाषा की जड़ें हमारी सांस्कृतिक विरासत में गहराई से जुड़ी हुई हैं। यह केवल एक संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि एक समृद्ध साहित्य, कविता, संगीत और दर्शन की भाषा है। कबीर, तुलसीदास, प्रेमचंद, महादेवी वर्मा, हरिवंश राय बच्चन जैसे साहित्यकारों ने हिंदी को अपनी रचनाओं के माध्यम से अमर कर दिया। 

आज के वैश्वीकरण के युग में जहाँ अंग्रेज़ी का प्रभाव बढ़ रहा है, ऐसे समय में हिंदी दिवस हमें यह याद दिलाता है कि हमें अपनी भाषा और संस्कृति को सहेजने की आवश्यकता है। हिंदी को सिर्फ सरकारी दस्तावेज़ों या भाषणों तक सीमित रखना पर्याप्त नहीं, बल्कि इसे जन-जीवन, शिक्षा, विज्ञान, तकनीक और डिजिटल दुनिया में भी सशक्त बनाना आवश्यक है।

देशभर में इस दिन विभिन्न शैक्षणिक, सामाजिक और सरकारी संस्थानों में निबंध, कविता, वाद-विवाद, लेखन प्रतियोगिताएँ एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिनका उद्देश्य हिंदी भाषा के प्रति प्रेम और जागरूकता बढ़ाना होता है। हिंदी दिवस भारत की आधिकारिक भाषाओं में से एक हिंदी भाषा के लिए समर्पित दिन है।

यह भारत की सांस्कृतिक और भाषाई पहचान की आधारशिला है। यह दिन भारत की संविधान सभा द्वारा देवनागरी लिपि में लिखी गयी हिंदी को भारत गणराज्य की आधिकारिक भाषा के रूप में अपनाने के फैसले की सालगिरह का प्रतीक है। 

हिंदी दिवस का उद्देश्य भाषा के बारे में जागरूकता बढ़ाना और उस क्षण को याद करना है, जब इसे भारत की आधिकारिक भाषाओं में से एक के रूप में अपनाया गया था।हिंदी दिवस का इतिहास भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के शुरुआती दिनों से जुड़ा है। 

वर्ष 1918 में हिंदी के विद्वानों के एक समूह ने राष्ट्र में हिंदी के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए हिंदी साहित्य सम्मेलन का गठन किया। इस सम्मेलन ने हिंदी को भारत की आधिकारिक भाषा के रूप में अपनाने में प्रमुख भूमिका निभायी। 

स्वतंत्रता के बाद भारत की संविधान सभा ने 14 सितंबर, 1949 को देवनागरी लिपि में लिखी हिंदी को आधिकारिक भाषा के रूप में स्वीकार किया. इसके बाद 14 सितंबर, 1953 को आधिकारिक रूप से पहली बार राष्ट्रीय हिंदी दिवस मनाया गया। 

हिंदी दिवस केवल एक तिथि नहीं, बल्कि यह हमारी भाषायी अस्मिता, राष्ट्रभक्ति और संस्कृति की रक्षा का प्रतीक है। आइए, इस अवसर पर हम सभी संकल्प लें कि हिंदी के प्रचार-प्रसार में अपनी सक्रिय भूमिका निभायेंगे।

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