टीम एबीएन, रांची। आज दिनांक 27 जुलाई 2025 को रांची स्थित पुराना विधानसभा सभागार में केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा और अंतरराष्ट्रीय हिंदी साहित्य भारती, झारखंड इकाई के संयुक्त तत्वावधान में भारतीय ज्ञान परंपरा और समकालीन समाज विषयक एक एक दिवसीय संगोष्ठी का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में हिंदी साहित्य, भारतीय संस्कृति और शिक्षा से जुड़े अनेक विद्वानों, साहित्यकारों, शोधार्थियों और प्रबुद्धजनों ने भाग लिया।
इस अवसर पर झारखंड सरकार की ग्रामीण विकास मंत्री श्रीमती दीपिका पांडे सिंह ने मोबाइल के जरिए सभा को संबोधित करते हुए कहा कि हमें अपनी भारतीय संस्कृति और ऋषियों की ज्ञान परंपरा पर गर्व होना चाहिए। जब तक हम अपनी परंपराओं और मूल्यों को आत्मसात नहीं करेंगे, तब तक भारत को पुनः विश्वगुरु के रूप में स्थापित करना कठिन होगा।
उन्होंने अंतरराष्ट्रीय हिंदी साहित्य भारती द्वारा वैश्विक स्तर पर हिंदी व संस्कृति संवर्धन के प्रयासों की सराहना की और कहा कि ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी में सांस्कृतिक चेतना विकसित होती है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रांची विधायक पूर्व मंत्री सी.पी. सिंह, ने अपने वक्तव्य में कहा, हमारी संस्कृति और परंपरा केवल गौरवशाली अतीत की स्मृति नहीं, बल्कि एक जीवंत धरोहर है, जो हमारे जीवन को दिशा देती है।
आज जब दुनिया में सांस्कृतिक मूल्यों का क्षरण हो रहा है, ऐसे आयोजनों के माध्यम से हम अपनी अगली पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य कर रहे हैं। हिंदी साहित्य भारती और केंद्रीय हिंदी संस्थान का यह प्रयास अनुकरणीय है। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे भारतीय दर्शन, इतिहास और भाषा को आत्मसात करें और जीवन के हर क्षेत्र में भारतीयता को गौरव के साथ स्थापित करें।
अंतरराष्ट्रीय हिंदी साहित्य भारती के राष्ट्रीय अध्यक्ष व उत्तर प्रदेश के पूर्व शिक्षा मंत्री,श्री रविन्द्र शुक्ल ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा हमारे ऋषियों की वाणी और वैदिक संस्कृति की वह मूलभूत अवधारणा है, जो संपूर्ण विश्व को दिशा दे सकती है। हमें इसे आधुनिक संदर्भों में पुनर्परिभाषित कर समाज के सभी वर्गों तक पहुँचाना होगा।
गौसेवा आयोग, झारखंड के अध्यक्ष राजीव रंजन प्रसाद ने संगोष्ठी की उपादेयता को रेखांकित करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति की पुनर्स्थापना का यह एक सार्थक प्रयास है। उन्होंने इसे विचारों का उत्सव बताया। केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. रंजन कुमार दास (भुवनेश्वर) ने कहा, भारतीयता एक जीवनशैली है, जो आज के संदर्भ में अत्यंत प्रासंगिक हो गई है। शिक्षा, संस्कृति और भाषा के समन्वय से ही समाज को दिशा दी जा सकती है।
हिंदी साहित्य भारती के केंद्रीय महामंत्री रामनिवास शुक्ल ने कहा कि जीवन मूल्यों और सांस्कृतिक चेतना को संगठित रु से प्रस्तुत करे। झारखंड इकाई की सराहना करते हुए कहा कि, समय की मांग है कि हम अपने साहित्य और सांस्कृतिक मूल्यों को संगठित रूप से प्रस्तुत करें। यह आयोजन उस दिशा में एक प्रभावी कदम है।
द्वितीय सत्र की अध्यक्षता करते हुए प्रसिद्ध पत्रिका सोच-विचार के संपादक डॉ. नरेंद्र मिश्र (वाराणसी) ने संगोष्ठी की सफलता की प्रशंसा करते हुए संयोजकों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि झारखंड इकाई ने यह सिद्ध कर दिया है कि सुदूर राज्यों में भी गंभीर साहित्यिक और वैचारिक संवाद संभव है। इस पूरे आयोजन के संयोजक और संचालनकर्ता रहे बहुचर्चित युवा सामाजिक कार्यकर्ता और साहित्य प्रेमी अजय राय, जिन्होंने कार्यक्रम के उद्देश्य, पृष्ठभूमि और प्रयोजन को विस्तार से प्रस्तुत किया।
उन्होंने कहा, आज का यह संगोष्ठी भारतीय संस्कृति और झारखंड की स्थानीय परंपराओं के समन्वय का सशक्त माध्यम है। प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अरुण सज्जन, जो कि एक शिक्षाविद, विचारक और साहित्यकार हैं, ने स्वागत संबोधन में कहा कि झारखंड की यह धरती भगवान बिरसा मुंडा की धरती है, जिन्होंने संस्कृति और अस्मिता की रक्षा के लिए अपने प्राण अर्पण किए।
हमें भी आज उसी भावना से अपनी वैदिक परंपरा और ज्ञान को पुनः स्थापित करने का संकल्प लेना चाहिए। संगोष्ठी में झारखंड के विभिन्न विश्वविद्यालयों से आए शोधार्थियों ने भारतीय ज्ञान परंपरा और झारखंड की सांस्कृतिक विरासत पर केंद्रित 35 शोध पत्रों की प्रस्तुति दी। यह सत्र अत्यंत समृद्ध और ज्ञानवर्धक रहा। सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र और स्मृति-चिह्न देकर सम्मानित किया गया।
इस संगोष्ठी में कई अन्य विद्वानों और वरिष्ठजनों ने भी अपनी बात रखी, जिनमें प्रमुख रूप से हिमांशु शुक्ल, पूर्व संपादक, दैनिक जागरण (वाराणसी) डॉ. सुनीता मंडल, प्रभारी मंत्री, हिंदी साहित्य भारती झारखंड डॉ. सुनीता कुमारी, उपाध्यक्ष, हिंदी विभाग, रांची विश्वविद्यालय ब्रजेंद्र नाथ मिश्र, प्रदेश मीडिया प्रभारी, हिंदी साहित्य भारती आदि। इस आयोजन में झारखंड के विभिन्न जिलों से आए लगभग 150 प्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं की उपस्थिति रही।
जिनमें रांची हिंदी साहित्य भारती के प्रांतीय महामंत्री राकेश कुमार, रांची जिला अध्यक्ष बलराम पाठक, उपाध्यक्ष संजय सर्राफ, महामंत्री सुकुमार झा, कुमार मनीष अरविंद,उपाध्यक्ष डॉ. संगीता नाथ, सिंहभूम जिला अध्यक्ष डॉ. आशा गुप्ता, श्रीमती रेणु बाला मिश्रा, अरुणा झा, डॉ. स्नेह लता, अनुज कुमार पाठक, रामप्रवेश पंडित, संजीव दत्ता, दीपेश निराला, नरेश बंका, अभय कुमार, विनोद जैन बगवानी, मुकेश साहू अनिकेत कुमार सिंह अभय कुमार पांडे, धनंजय पाठक, स्नेह प्रभा पांडेय, रेणुबाला मिश्रा,पूजा रत्नाकर,मंजु शरण मंजुल, संजीव कुमार, त्रिपुरेश्वर नाथ मिश्र, निशिथ सिन्हा, ब्रजेन्द्र नाथ मिश्र,संजय सिंह चंदन, रिंकू दुबे वैश्नवी, डॉ. रामप्रवेश पंडित,श्री विश्वजीत विश्वकिरण, श्रीमती जया, मनीष मिश्र नंदन, मुकेश यादव, दीपेश यादव प्रवीण कुजूर आनंद प्रमाणिक रमेश साहू सहित सैकड़ो ने भाग लिया।
समापन और राष्ट्रगान अंत में प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अरुण सज्जन ने सभी अतिथियों, वक्ताओं, शोधार्थियों और कार्यकर्ताओं का धन्यवाद ज्ञापन किया। सभा का समापन राष्ट्रगान के साथ अत्यंत गरिमामय ढंग से किया गया। उक्त जानकारी हिंदी साहित्य भारती संगोष्ठी के संयोजक अजय कुमार राय ने दी।
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