8वें केंद्रीय वेतन आयोग के गठन में अप्रत्याशित विलंब को लेकर बनी मानव श्रृंखला

 

टीम एबीएन, रांची। आज दिनांक 25 जुलाई को  शहीद चौक पर आॅल इंडिया फोरम आॅफ सिविल पेंशनर्स एसोसिएशन के राष्ट्रीय आह्वान पर पेंशन अधिनियम में ड्राकोनियन संशोधन एवं 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के गठन में अप्रत्याशित विलंब को लेकर मानव श्रृंखला के माध्यम से विरोध प्रदर्शित किया गया। इस विरोध प्रदर्शन में पोस्टल एवं आर एम एस के पेंशनर्स प्रतिनिधियों सहित बैंक, बी एस एन एल,केंद्रीय पेंशनर्स के प्रतिनिधि भी शामिल हुए। 

उपस्थित वक्ताओं ने अपने संबोधन में कहा कि  वित्त विधेयक के माध्यम से  1972 / 2021 के पेंशन अधिनियम में संशोधन कर आठवें वेतन आयोग के लाभ से वर्तमान केंद्रीय पेंशनर्स को वंचित किये जाने की साजिश रची जा रही है तथा इन्हें सेवानिवृति की तिथि से विभाजित किया जा रहा है जो संविधान के आर्टिकल 14 की आत्मा के विपरीत है। सातवें वेतन आयोग की अनुशंसा तथा सरकार की मंजूरी के पश्चात  वर्तमान और भविष्य के पेंशनर्स में किसी किस्म का भेदभाव नहीं किया गया था बल्कि पेंशन के पुनरीक्षण में समानता रखी गई थी। इसकी भी आशंका है कि केंद्र सरकार वेतन आयोग की अनुशंसा के उपरांत भी पेंशनर्स को देय लाभ से वंचित कर दे। 

सभा को  संबोधित  करते  हुए राज्य सचिव एम जेड खान ने कहा कि  केंद्र सरकार ने 25 मार्च को संसद में विपक्षी दलों के  विरोध के पश्चात  फाइनेंस बिल के माध्यम से 1972/ 2021 के पेंशन अधिनियम में संशोधन पारित कर  31. 12. 2025 तक रिटायर होने वाले केंद्रीय कर्मियों को 8 वें वेतन आयोग के लाभ से वंचित कर दिया गया है। केवल जनवरी 26 या उसके बाद से रिटायर होने वाले कर्मचारियों को 8 वें वेतन आयोग का लाभ मिल पाएगा। केंद्र सरकार पेंशनर्स के साथ भेद भाव का रवैया अपना कर संविधान की धारा 14 का उल्लंघन कर रही है । 

सरकार पेंशनर्स को जनवरी 2026 से पहले और जनवरी 2026 के बाद  खाने में वगीर्कृत कर संशोधित पेंशन अधिनियम के तहत वेतन आयोग के लाभ से वंचित कर देना चाहती है। माननीय सुप्रीम कोर्ट ने सिविल अपील संख्या 10857/ 2016 में अपने  फैसले  में स्पष्ट रूप से निर्णय दिया कि  संशोधित पेंशन    निर्धारण के उद्देश्य से पेंशनभोगियों की दो श्रेणियां बनाने का कोई वैध औचित्य नहीं है। ज्ञात हो कि 7वें वेतन आयोग ने 1.1. 2016 से पहले सेवानिवृत हुए पेंशनर्स और 1.1.2016 के बाद सेवानिवृत हुए पेंशनभोगियों के बीच समानता की सिफारिश की थी जिसे केंद्र सरकार ने स्वीकार करते हुए लागू किया था। 

पेंशनर्स के साथ  सेवा निवृति की तारीख की बुनियाद पर भेदभाव करना असंवैधानिक है तथा  वित विधेयक में संशोधन  वेतन आयोग को अख्तियार देता है कि वह वर्तमान पेंशनर्स को लाभ से वंचित कर दे और 2026 के बाद रिटायर होने वाले को वेतन आयोग का लाभ दे। पेंशन अधिनियम में संशोधन को लेकर आज के दिन पूरे देश में  मानव श्रृंखला के माध्यम से विरोध- प्रदर्शन किया जा रहा है और सरकार  से मांग की जा रही है कि इस अहितकारी एवं कर्मचारी / पेंशनर्स विरोधी कानून को अविलंब वापस लिया जाए। 

सभा को बैंक पेंशनर्स एसोसिएशन के एम एल सिंह, बीएस एन एल के नरेश लाल, विनोद कुमार और के डी राय व्यथित ने भी संबोधित किया। बैंक के प्रतिनिधि एम एल सिंह ने अपने संबोधन में सिविल पेंशनर्स को एक जुट होने का आह्वान किया तथा पेंशनर्स को इस पेंशनर्स विरोधी संशोधन से जागरूक किए  जाने पर विशेष बल दिया। बी एस एन एल के नरेश लाल ने आक्रामक आंदोलन की बात कही।

आज की मानव श्रृंखला में मुख्य रुप से गणेश डे, रंग नाथ पांडेय, रामनरेश पांडे, सुशील कुमार, फाल्गुनी पाढ़ी, हसीना तिग्गा, गयो देवी, इकबाल हुसैन, गौतम विश्वास, बिपिन चौधरी,  चंदेश्वर राम, मो रफी, त्रिलोकीनाथ साहू, सुखदेव राम, राजेंद्र महतो, आर बी बैठा, देव चरण साहू, जयराम प्रसाद, रामचंद्र प्रसाद, हरिराम तिवारी, धनेश्वर गोस्वामी, अभिजीत मालिक, कनक चौधरी के अलावा बड़ी संख्या में पोस्टल, आर एम एस,बैंक एवं बी एस एन एल के पेंशनर्स शामिल हुए।  

इन मुद्दों को लेकर अगस्त में राज्य स्तरीय कन्वेंशन  का आयोजन किया जाएगा तथा राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा जाएगा। सितंबर में स्थानीय सांसदों से भेंट कर उन्हें भी ज्ञापन दिया जाएगा। 10 अक्टूबर को दिल्ली में धरना दिया जाएगा और माननीय प्रधान मंत्री,राष्ट्रपति तथा सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायधीश को ज्ञापन सौंपा जाएगा। उक्त जानकारी आॅल इंडिया पोस्टल/आर एम एस पेंशनर्स एसोसिएशन, झारखंड के राज्य सचिव एम जेड खान ने दी।

Newsletter

Subscribe to our website and get the latest updates straight to your inbox.

We do not share your information.

abnnews24

सच तो सामने आकर रहेगा

टीम एबीएन न्यूज़ २४ अपने सभी प्रेरणाश्रोतों का अभिनन्दन करता है। आपके सहयोग और स्नेह के लिए धन्यवाद।

© www.abnnews24.com. All Rights Reserved. Designed by Inhouse