एबीएन सेंट्रल डेस्क। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने राष्ट्रीय सहकारी नीति 2025 का अनावरण करने के बाद कहा कि आज का दिन ऐतिहासिक है और सहकारिता के मार्ग पर चलने से देश का अर्थतंत्र मजबूत होगा। श्री शाह ने कहा कि पिछले चार वर्षों में सहकारिता मंत्रालय की अनेक उपलब्धियां रही, लेकिन इसकी सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि आज देश की छोटी से छोटी सहकारी इकाई का सदस्य गर्व के साथ खड़ा हो गया है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सहकारिता नीति-2025 का शुभारंभ हुआ है। वर्ष 2002 में भारत सरकार ने सहकारिता नीति में बनायी थी उस समय भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार थी और आज भाजपा सरकार द्वारा दूसरी सहकारिता नीति लाई गई है। उन्होंने कहा कि जो सरकार के दृष्टिकोण को, जो भारत को, उसके विकास को और भारत के विकास के लिए आवश्यक सभी कारकों को समझता है, वही सहकारी क्षेत्र को महत्व दे सकता है। यदि देश और अर्थव्यवस्था की मूल इकाई समृद्धि रोजगार देने वाली हो तो वह आर्थिक मॉडल कभी विफल नहीं हो सकता।
श्री शाह ने कहा कि सहकारिता नीति बनाते समय इस बात का ध्यान रखा गया कि नीति का केंद्र बिंदु व्यक्ति, गाँव, कृषि, गाँव की महिलाएँ, दलित, आदिवासी हों। इसका विजन सहकारिता की समृद्धि के माध्यम से 2047 तक एक विकसित भारत का निर्माण करना है। इसका मिशन पेशेवर, पारदर्शी, तकनीकी, जिम्मेदार और आर्थिक रूप से स्वतंत्र तथा सफल लघु सहकारी इकाइयाँ विकसित करना है। हम हर गाँव में कम से कम एक सहकारी संस्था के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सरकार ने 2027 में भारत को विश्व के तीसरे नंबर का अर्थतंत्र बनाने का लक्ष्य रखा है और मुझे पूर्ण विश्वास है कि हम इस लक्ष्य तक जरुर पहुंच जाएंगे। पिछले चार वर्षों के अंदर सहकारी क्षेत्र को कॉपोर्रेट सेक्टर के समान अधिकार मिले हैं। एक जमाने में अर्थतंत्र के जानकारों ने सहकारिता को डाइंग सेक्टर घोषित कर दिया था।
आज वही लोग कहते हैं कि सहकारिता का भी भविष्य है। उन्होंने कहा, मैं सभी को कहना चाहता हूँ कि सहकारिता का भी भविष्य है नहीं, सहकारिता का ही भविष्य है। उन्होंने कहा कि देश के 140 करोड़ लोगों को साथ लेकर देश का समविकास करने की क्षमता केवल सहकारिता में ही है। छोटी-छोटी पूंजी वाले अनेक लोगों को मिलाकर बड़ी पूंजी बनाकर एक उद्यम स्थापित करने की क्षमता केवल सहकारिता में है।
श्री शाह ने कहा कि नई नीति तैयार करने के लिए 48 सदस्यीय एक समिति बनी थी, जिसकी अध्यक्षता पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश प्रभाकर प्रभु ने की। इस समिति में विभिन्न राज्यों और केंद्रीय सरकार के अधिकारी, सहकारी संघों के सदस्य और विशेषज्ञ शामिल थे।
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