*प्रेस विज्ञप्ति*
झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन के संयुक्त महामंत्री सह विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि हरियाली सावन तीज देश के विभिन्न राज्यों में मनाया जाने वाला हिंदुओं का एक प्रमुख पारंपरिक महत्वपूर्ण त्यौहार है। यह विशेष पर्व श्रावण मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। इस वर्ष 27 जुलाई, दिन- रविवार को हरियाली तीज का पर्व मनाई जाएगी। यह त्योहार प्रकृति की हरियाली, नारी शक्ति के सौंदर्य और विवाहित स्त्रियों की सौभाग्य भावना से जुड़ा हुआ है।
इस पर्व का सीधा संबंध भारतीय संस्कृति की गहराई, विशेष रूप से भगवान शिव और माता पार्वती की पवित्र कथा से है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, देवी पार्वती ने अनेक वर्षों तक कठोर तप कर शिव को अपने पति के रूप में प्राप्त किया। अंततः श्रावण शुक्ल तृतीया को भगवान शिव ने पार्वती को पत्नी रूप में स्वीकार किया। तभी से यह दिन विवाहित स्त्रियों के लिए सौभाग्य और अखंड पति प्रेम का प्रतीक बन गया।
हरियाली तीज केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और प्राकृतिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह पर्व सावन की हरियाली और प्रकृति के उल्लास का प्रतीक है। जब धरती पर बारिश की बौछारें पड़ती हैं, खेतों में हरियाली छा जाती है, पेड़ झूमने लगते हैं और झूले पड़ते हैं, तब यह पर्व महिला समाज के उत्साह और उल्लास को व्यक्त करता है।
इस दिन विवाहित महिलाएं व्रत रखती हैं, सोलह श्रृंगार करती हैं और शिव-पार्वती की पूजा कर अपने वैवाहिक जीवन की लंबी उम्र और सुख की कामना करती हैं। वहीं कुवारियाँ भी यह व्रत करती हैं ताकि उन्हें एक आदर्श वर की प्राप्ति हो। घरों में पारंपरिक गीत गाए जाते हैं, महिलाएं समूहों में एकत्र होकर झूले झूलती हैं और लोकनृत्य करती हैं। यह सामाजिक समरसता और महिला सशक्तिकरण का भी प्रतीक बन चुका है।
हरियाली तीज पर महिलाएं प्रातः स्नान कर व्रत का संकल्प लेती हैं। दिनभर निर्जला उपवास रखा जाता है और रात को शिव-पार्वती की कथा सुनने के बाद व्रत का पारायण होता है। महिलाएं हरे वस्त्र पहनती हैं, मेहंदी रचाती हैं और एक-दूसरे को तीज के गीतों के माध्यम से शुभकामनाएं देती हैं। मारवाड़ी समाज में हरियाली तीज को सावन का तीज सिंधारा भी कहा जाता है।
हरियाली तीज भारतीय संस्कृति का एक ऐसा पर्व है जो प्रेम, प्रकृति, नारी शक्ति और अध्यात्म का अद्वितीय संगम है। यह त्योहार हमें हमारी जड़ों से जोड़ता है, परिवार और समाज को एक सूत्र में पिरोता है, और नारी जीवन को सम्मान देता है। सावन की हरियाली के बीच जब महिलाएं झूले झूलती हैं और गीतों में भावनाएं बहती हैं, तब हरियाली तीज एक उत्सव न होकर, संवेदनाओं की अनुभूति बन जाती है।
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