कामिका एकादशी व्रत 21 जुलाई को

 

  • कामिका एकादशी आत्मशुद्धि, श्रद्धा, भक्ति और मोक्ष का अद्भुत अवसर: संजय सर्राफ

एबीएन सोशल डेस्क। विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग व श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि हिंदू धर्म में एकादशी का व्रत करने का खास महत्व होता है। इसे करने से व्यक्ति के जीवन के दुख दूर हो सकते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है। 

सावन मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी को कामिका एकादशी कहा जाता है। यह एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित होती है और इसका विशेष महत्व है, क्योंकि इसे पापों से मुक्ति, मनोकामना की पूर्ति और मोक्ष प्राप्ति का दिन माना जाता है। इस वर्ष कामिका एकादशी का व्रत 21 जुलाई दिन सोमवार को रखा जायेगा। 

शास्त्रों में कहा गया है कि एकादशी व्रत से बढ़कर कोई दूसरा पुण्य नहीं होता। ब्रह्मवैवर्त पुराण और स्कंद पुराण में कामिका एकादशी का महात्म्य विस्तार से वर्णित है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा एवं नियमपूर्वक भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करने से समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं और मन को शांति प्राप्त होती है। 

कामिका एकादशी का व्रत विशेष रूप से अहंकार, क्रोध, लोभ, मोह जैसे आंतरिक दोषों से छुटकारा पाने का अवसर प्रदान करता है। यह व्रत व्यक्ति के भीतर सात्त्विकता का संचार करता है और अध्यात्म की ओर प्रवृत्त करता है। सावन मास में इसका महत्व और भी बढ़ जाता है क्योंकि यह महीना स्वयं भगवान शिव और विष्णु दोनों की उपासना के लिए पवित्र माना गया है। 

कामिका एकादशी के दिन प्रातः स्नान कर व्रत का संकल्प लिया जाता है। घर में या मंदिर में भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र के सामने दीप जलाकर, तुलसी दल चढ़ाकर ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जप किया जाता है। व्रती दिनभर उपवास रखते हैं और रात्रि में जागरण कर श्रीहरि का भजन-कीर्तन करते हैं। 

द्वादशी के दिन पारण कर व्रत पूर्ण किया जाता है। इस व्रत से जुड़ी मान्यता है कि जो व्यक्ति श्रद्धापूर्वक कामिका एकादशी का पालन करता है, उसे गंगास्नान, गौदान और तप के बराबर पुण्य फल प्राप्त होता है। यहां तक कि पितृदोष और पूर्वजों की अशांति भी इस व्रत से शांत होती है। 

कामिका एकादशी आत्मशुद्धि, भक्ति और मोक्ष का अद्भुत अवसर है। सावन मास में इसका व्रत करके जीवन में सुख, शांति और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त की जा सकती है। यह एक ऐसा पुण्य पर्व है जो आत्मा को प्रभु से जोड़ने की राह दिखाता है।

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