एबीएन सोशल डेस्क। काल भैरव का अवतार भगवान शिव का उग्र और शक्तिशाली अवतारों में एक माना जाता है। काल का अर्थ है समय और भैरव का अर्थ है भय को नाश करने वाला। काल भैरव समय और न्याय का देवता है। काल भैरव शिव का रौद्र रूप है जो दुष्टों का नाश करते हैं। ये शिव के क्रोध से उत्पन्न हुए जो ब्रह्माजी के अहंकार को नष्ट किया और सृष्टि के विकास में बाधक दुष्टों का संहार किया।
काल भैरव को तंत्र मंत्र , शक्ति और ज्योतिष साधना के देवता के रूप में पूजा जाता है। काल भैरव ही बटुक भैरव का बाल रूप है जो ब्रह्मा के अहंकार को नष्ट कर शिव के अपमान करने पर उनके पांचवे मस्तक को काट कर उन्हें दंडित किया। बटुक भैरव का स्वरूप सौम्य और शांत है। काल भैरव को भगवान शिव ने काशी का कोतवाल नियुक्त किया और पापियों को दंडित करने का कार्य सौंपा।
काल भैरव भक्तों को सभी प्रकार के नाकारात्मक शक्तियों , भय और बुराइयों से बचा कर उनकी रक्षा करते हैं। इनका सवारी श्वान है जो अन्याय तथा बुराई को खत्म करने के लिए अवतरित होकर धरा पर न्याय और धर्म की प्रतिस्थापन की। उक्त जानकारी विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग व श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने दी।
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