टीम एबीएन, पटना / रांची। बिहार में कानून व्यवस्था पिछले 20 साल के सबसे बुरे दौर में है। लगता नहीं कि योगीजी मॉडल अपनाये बिना अपराधियों के मन में कानून का डर बैठेगा। बड़े अपराधियों की गाड़ी पलटनी ही होगी, छोटे अपराधियों के लिए ऑपरेशन लंगड़ा लंगड़ा चलाना ही पड़ेगा।
तेजस्वी कानून- व्यवस्था पर सरकार को घेर सकते हैं, लेकिन फिलहाल तो वो और उनकी पार्टी ब्रह्मेश्वर मुखिया, भूरा बाल और मूत्र-सूत्र जैसे नैरेटिव में उलझी है। मीडिया को गाली देकर तेजस्वी यादव को कुछ हासिल नहीं होगा। इससे वोट नहीं बढ़ते।
बीबीसी के मणिकांत ठाकुर लिखते हैं कि मूत्र सूत्र और मीडिया बायकॉट जैसे कॉल सिर्फ तेजस्वी का फ्रस्ट्रेशन दिखा रहे हैं। चुनाव के चार- पांच महीने पहले से ही झुंझलाहट या फ्रस्ट्रेशन दिखना ठीक नहीं है। जनता में ग़लत मैसेज जाता है। प्रशांत किशोर भी पता नहीं क्यों, कानून व्यवस्था को जनांदोलन नहीं बना रहे। उनके इक्का- दुक्का बयानों को छोड़ वे कानून व्यवस्था पर कम ही बोल रहे हैं।
पटना के कुछ पत्रकारों का दावा है कि नीतीश कुमार को भूलने की बीमारी है, जिसे बड़े जतन से छुपाने की कोशिश की जा रही है। सरकार नीतीश नहीं, बल्कि बीजेपी और कुछ ब्यूरोक्रेट मिलकर चला रहे हैं। नीतीश जी होते तो कानून व्यवस्था को इस तरह out of control बिल्कुल नहीं होने देते। (ये उनके निजी विचार हैं।)
Subscribe to our website and get the latest updates straight to your inbox.
टीम एबीएन न्यूज़ २४ अपने सभी प्रेरणाश्रोतों का अभिनन्दन करता है। आपके सहयोग और स्नेह के लिए धन्यवाद।
© www.abnnews24.com. All Rights Reserved. Designed by Inhouse