स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ायें : उपायुक्त

 

  • संस्थागत प्रसव की कमी पर उपायुक्त ने जतायी नाराजगी 
  • अवैध क्लिनिक या अस्पतालों का संचालन पर लगायें रोक, कार्रवाई करें  
  • निजी क्लिनिक एवं अस्पतालों में होने वाले प्रसव एवं स्वास्थ्य संबंधी गतिविधियों से संबंंधित 2 सप्ताह में सौंपे विस्तृत रिपोर्ट 
  • उपायुक्त ने की एन.एच.एम. अंतर्गत विभिन्न कार्यक्रमों की समीक्षा 

एबीएन न्यूज नेटवर्क, मेदिनीनगर (पलामू)। उपायुक्त समीरा एस आज राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) अंतर्गत विभिन्न कार्यक्रमों की समीक्षा की। पलामू के समाहरणालय सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक में उपायुक्त ने सभी चिकित्सा पदाधिकारियों, बीपीएम एवं डीपीएम को स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने का सख्त निर्देश दिया।  

उपायुक्त ने नागरिकों, माताओं और बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार पर विशेष ध्यान देने, स्वास्थ्य संकेतकों में सुधार करने और स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत करने का निदेश दिया। उन्होंने गर्भवती महिलाओं के लिए शत प्रतिशत एएनसी कवरेज सुनिश्चित करने एवं स्वास्थ्य केंद्रों में बेहतर बुनियादी व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।  

उपायुक्त ने संस्थागत प्रसव, गर्भवती महिलाओं के पंजीकरण, एनिमिया आदि सभी तरह की जांच, ससमय आयरन एवं फोलिक एसिड टैबलेट्स देने, बीसीजी, हेपेटाइटिस, ओपीभी (पोलियो) टीकाकरण आदि कार्यों की विस्तृत समीक्षा की। उपायुक्त ने संस्थागत प्रसव के प्रस्तुत किये गये डेटा में भिन्नता पर कड़ी नाराजगी जतायी। उन्होंने सभी चिकित्सा पदाधिकारी, बीपीएम एवं डीपीएम को स्पष्ट निदेश दिया कि यहां गये, वहां गये, ऐसा, वैसा रिपोर्ट नहीं चलेगा। उन्होंने विशेषकर संस्थागत प्रसव की कमी पर नाराजगी जतायी। 

समीक्षा के दौरान उन्होंने संस्थागत प्रसव का डेटा 62% पाया। इसपर नाराजगी जताते हुए कहा कि गर्भवती महिलाओं का प्रसव सरकारी अस्पतालों के साथ कहां हो रहा है? निजी वैध क्लिनिक एवं स्वास्थ्य केंद्रों में होने वाले प्रसव का डेटा संग्रह भी करना सुनिश्चित करें। अगर अवैध/बिना रजिस्ट्रेशन क्लिनिक या अस्पतालों का संचालन किया जा रहा है, तो उसके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करना सुनिश्चित करें।

उन्होंने कहा कि अवैध निजी क्लिनिक एवं अस्पतालों की जांच के लिए चिकित्सा पदाधिकारी खुद सक्षम हैं। उन्होंने अवैध संचालन पर रोक लगाने एवं उसके विरूद्ध कार्रवाई करते हुए रिपोर्ट सौंपने का सख्त निर्देश दिया। साथ वैध क्लिनिक एवं अस्पतालों की सूची संबंधी रिपोर्ट भी सौंपने का निर्देश दिया। उपायुक्त ने कहा कि निजी क्लिनिक एवं अस्पतालों में होने वाले प्रसव एवं स्वास्थ्य संबंधी गतिविधियों से संबंंधित 2 सप्ताह में विस्तृत रिपोर्ट सौंपना सुनिश्चित करें।  

उन्होंने अस्पतालों में रखरखाव के संकल्प का अध्ययन कर उसके प्रावधानों का अनुपालन करने का निदेश दिया। साथ ही कहा कि आवश्यकता अनुरूप आवश्यक सामग्री व उपकरणों की  खरीदारी करें, लेकिन बिना जरूरत वाली सामग्री की खरीद कदापी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि अस्पतालों में दवा, बिजली, पेयजल, शौचालय, रंगरोगन, चारदीवारी आदि बुनियादी सुविधाओं की कमी की शिकायत नहीं मिलनी चाहिए। 

उन्होंने डीपीएम को बुनियादी सुविधाएं बहाल करने और समय-समय पर इसका मूल्यांकन करते रहने का निर्देश दिया। उपायुक्त ने प्रखंड विकास पदाधिकारी के साथ समन्वय कर आंगनबाड़ी सेविका, सहिया के माध्यम से गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच कराने हेतु जागरूक करते हुए उनका शत प्रतिशत जांच एवं संस्थागत प्रसव सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया। 

उपायुक्त ने आयुष्मान से प्राप्त 75% आय अपने संस्थान के रखरखाव एवं अन्य कार्यों में उपयोग करने का निदेश दिया। साथ ही उन्होंने कहा कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र एवं स्वास्थ्य केन्द्रों को एक मुश्त राशि उपलब्ध करा दी गई है, जिससे सभी चिकित्सा पदाधिकारी अपने संबंंधित स्वास्थ्य केंद्रों में मूलभूत सुविधाओं की पूर्ति करना सुनिश्चित करेंगे।  बैठक में सिविल सर्जन डॉ. अनिल कुमार श्रीवास्तव, जिला आरसीएच पदाधिकारी डॉ. विजय सिंह, प्रखंड चिकित्सा पदाधिकारी, डीपीएम, बीपीएम आदि उपस्थित थे। 

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