शरण में आने वालों का कल्याण करते हैं भगवान : श्रीकांत शर्मा

 

कथा का सप्तम दिवस

  • भगवान की कथा सुनने के लिए धैर्य चाहिए : श्रीकांत जी
  • पंच तत्व से बना शरीर माटी में मिल जाना है : श्रीकांत शर्मा
  • दान देकर आदमी भिखारी नहीं हुआ : श्रीकांत शर्मा
  • धार्मिक संस्था श्री श्याम परिवार के सदस्यों ने गुरु जी का स्वागत किया

​​​​टीम एबीएन, रांची। रांची के अग्रसेन भवन के सभागार में श्री मदभागवत कथा के समापन सप्तम दिवस पर मुख्य यजमान श्री मति लता देवी केडिया, ओम प्रकाश केडिया, निरंजन, अजय, संजय केडिया संग परिवार द्वारा श्री मदभागवत व ब्यास पूजन किया गया। बेदिक मंत्रोचारण के साथ ब्यास पीठ पर विराजमान परम श्रधेय कथा वाचक श्रीकांत जी शर्मा को मुख्य यजमान ओम प्रकाश केडिया सपत्नी द्वारा चंदन,वंदन माल्यर्पण कर उनका अभिनंदन स्वागत किया गया। 

कथा के मुख्यसार को बताते हुए महाराज श्री कहते है शरण में आने वालों का कल्याण करते हैं भगवान। जो भी उनकी शरण में आ जाता है उसका कल्याण होता है शरण में आने वालों के कल्याण के लिए भगवान अपने ऊपर कलंक तक ले लेते हैं। लेकिन शरणागत को निराश नहीं करते हैं। 

भगवान को जिसने भी स्वीकार किया वह भगवान का हो गया इसलिए कहा गया है कि हरि को भजे सो हरि का होई। भगवान शरणागत को स्वीकार करने के साथ-साथ समाज में उसके सम्मान की प्रतिष्ठा भी करते हैं। भगवान कृष्ण की 8 पटरानियां ओर सोलह हजार एक सो रानियां थी। कर्मकांड के सोलह हजार एक सो मंत्र है।

उन्होंने भगवान के साथ रमन की इच्छा व्यक्त की थी ।इसके बाद में कन्या के रूप में धरती पर आये। इन 16100 कन्याओं को भगवान भौमासुर नामक एक असूल ने बंदी बना लिया था। भगवान ने इन असुर को मार कर इनका उद्धार किया। इसके बाद इन कन्याओं को उनके घर भेजने का प्रस्ताव दिया। 

तब उन्होंने कहा कि वे असुर के जेल में रह चुकी है, समाज में उन्हें विवाह के लिए कौन स्वीकार करेगा और समाज में प्रतिष्ठा दिलायेगा।जिसको  कोई स्वीकार नहीं करता है, उसे भगवान स्वीकार कर लेते हैं। इन कन्याओं को समाज में प्रतिष्ठा दिलाने के लिए भगवान ने उन्हें अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया।

उन्होंने कहा कि इस तरह से भगवान ने यह शिक्षा दी कि जो भी उनकी शरण में आएगा उनका कल्याण होगा। भगवान शरणागत  को नहीं छोड़ सकते हैं यह मानी हुई बात है ,इसलिए जो उनकी शरण में जाता है उनका कल्याण होता है। राम और कृष्ण दोनों ने ही नारियों के सम्मान की रक्षा की है।

श्री राम ने सीता के उद्धार के लिए रावण और अन्य असुरों का वध किया तो श्री कृष्ण चंद्र जी ने नारी सम्मान की रक्षा के लिए भौमासुर और अन्य असुरों का वध किया। गोपियों को आनंद देने वाले द्रोपदी की लाज बचाने वाले श्री कृष्ण कहीं गए नहीं है। भक्ति करोगे तो यत्र तत्र सर्वत्र वो दिखने लगेंगे। गुरु कहते है पंच तत्व से बना है शरीर जो माटी में मिल जाएगा।

जो सत्य नही उससे डरना नही क्योकि दुनिया निंदा के सिवा आपको कुछ दे नही सकती क्योंकि दुनिया हमेशा कलंक , लांछन लगाएगी लेकिन आप सत्य हो तो अडिग रहे। अगर आपको चारो तरफ दुखो ने घेरा हो ऐसी स्तथि बन जाये तो भगवान को याद कर ले।आज सप्तम दिवस पर पूरी कथा के प्रसंग के सार को लोगो के बीच रखा।

परम पूज्य बाल व्यास श्रीकांत शर्मा जी श्रीमद्भागवत कथा के सप्तम दिवस की कथा श्रबन करने वालो में ओमप्रकाश केडिया ,निरंजन केडिया ,अजय केडिया, संजय केडिया,निर्मल बुधिया,प्रमोद सारस्वत,पवन मंत्री  श्रबन जालान, पवन शर्मा, गौरव अग्रवाल सहित काफी संख्या में लोगो ने कथा श्रबन किया।

दोपहर 1 बजे सप्तम दिवस की कथा आरती के साथ विराम की गई। कथा विराम के साथ हवन, पूर्णाहुति सहित यजमान द्वारा गुरु जी का स्वागत,अभिनंदन किया गया। कथा स्थल में सभी लोगो के लिए भागवत प्रसाद की ब्यवस्था रखी गयी थी। उक्त जानकारी प्रमोद सारस्वत (9431325438) ने दी।

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