मई 2025 में खुले करीब 22 लाख नये डीमैट एकाउंट

 

रिपोर्ट का दावा- भारतीय युवा जल्दी रिटायर तो होना चाहते हैं, लेकिन उसके लिए पर्याप्त सेविंग नहीं करते हैं 

एबीएन बिजनेस डेस्क। मई में करीब 22 लाख नए डीमैट खाते खुले। इससे कुल खातों की संख्या बढ़कर 19.66 करोड़ हो गयी। शेयर बाजार में तेजी की वजह से डीमैट खातों की संख्या में इजाफा हो रहा है। यह दिसंबर 2024 से नये खाते खुलने के मामले में पहली मासिक वृद्धि है। जनवरी से अप्रैल के बीच नये डीमैट खातों में बड़ी गिरावट आयी थी। उद्योग के विश्लेषकों को जुलाई के मध्य तक खातों की कुल संख्या 20 करोड़ के पार पहुंच जाने की उम्मीद है।

दलाल पथ ने शेयर भाव में तेजी के बीच नये निवेशकों को आकर्षित किया है। मई में भारतीय इक्विटी बाजार में तेजी आयी। निफ्टी और सेंसेक्स करीब 2-2 फीसदी मजबूत हुए। निफ्टी मिडकैप 100 सूचकांक में 6.1 फीसदी,जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 8.7 फीसदी की तेजी आयी। 

कैश सेगमेंट में भी कारोबार आठ महीने की ऊंचाई पर पहुंच गया। इससे निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी का संकेत मिलता है। औसत दैनिक कारोबार (एनएसई+बीएसई) मासिक आधार पर 11 फीसदी बढ़कर 1.19 लाख करोड़ रुपये रहा जो सितंबर 2024 (1.3 लाख करोड़ रुपये) के बाद से सर्वाधिक है।  

नये निवेशकों को जोड़ने वाला आरंभिक सार्वजनिक पेशकश (आईपीओ) बाजार दो महीने की सुस्ती के बाद फिर से मजबूत हो रहा है। मई में छह कंपनियों ने 8,983 करोड़ रुपये जुटाए जबकि मार्च में एक भी आईपीओ नहीं आया और अप्रैल में सिर्फ एक कंपनी ने पूंजी जुटायी। 

फिर भी, यह सुधार नए डीमैट खातों में मजबूत वृद्धि के रूप में नहीं बदल पाया। मई में जोड़े गये डीमैट खाते 12 महीने के औसत (33 लाख खातों) से काफी कम हैं। विश्लेषकों का मानना है कि इस तिमाही में आगामी बड़े आईपीओ से डीमैट खातों की रफ्तार तेज हो सकती है। हालांकि अल्पावधि में 30 लाख के मासिक आंकड़े पर फिर से पहुंचने की संभावना नहीं दिख रही है। 

टोरस फाइनैंशियल मार्केट्स के मुख्य कार्याधिकारी प्रकाश गगडानी ने कहा, हमने पहले ही 19.6 करोड़ डीमैट खातों का आंकड़ा पार कर लिया है। यह कम समय में मजबूत पहुंच का संकेत है। मुख्य सवाल यह है कि क्या रिटेल निवेशक बाजारों से लाभ कमा रहे हैं। 

पिछले साल सितंबर के अंत से प्रमुख सूचकांक संघर्ष कर रहे हैं और रिटेल भागीदारी में बढ़ोतरी का रुझान तभी होता है जब प्रमुख सूचकांकों में लगातार बढ़ोतरी होती रहे। उन्होंने कहा कि ब्रोकरों को अपने मुनाफे पर दबाव के कारण ग्राहक जोड़ने पर खर्च करने की सीमा का भी सामना करना पड़ता है।

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