एबीएन सेंट्रल डेस्क। बीते रविवार को यूक्रेन ने रूस के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा ड्रोन हमला किया था, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा। यूक्रेन ने इस आपरेशन को स्पाइडर वेब नाम दिया। हमले के बाद यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने इसे शानदार, सफल और ऐतिहासिक बताया है। यह हमला बीते रविवार को हुआ, जिसमें 117 ड्रोन्स का इस्तेमाल करके रूस के कई हजार किलोमीटर अंदर सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। इस आपरेशन की योजना डेढ़ साल से ज्यादा समय से बन रही थी।
यूक्रेन और रूस के बीच चल रहा युद्ध अब तीसरे साल में है। इस दौरान दोनों देशों ने एक-दूसरे पर कई बड़े हमले किये, लेकिन यूक्रेन का यह ताजा ड्रोन हमला अपनी रणनीति और प्रभाव के कारण खास है। यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने कहा कि इस आपरेशन की तैयारी डेढ़ साल पहले शुरू हुई थी।
जेलेंस्की ने कहा कि इस हमले में हर छोटी-बड़ी डिटेल पर बारीकी से काम किया गया। इसमें 117 ड्रोन्स और उतने ही ड्रोन आॅपरेटर्स शामिल थे। इन ड्रोन्स को रूस के सैन्य ठिकानों, खासकर हवाई अड्डों पर तैनात स्ट्रैटेजिक क्रूज मिसाइल कैरियर्स को निशाना बनाने के लिए इस्तेमाल किया गया।
जेलेंस्की ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, हमारे लोगों ने रूस के कई इलाकों में, जिसमें तीन अलग-अलग टाइम जोन्स शामिल थे, सटीक हमला किया। इस आॅपरेशन की खास बात यह थी कि हमारा कंट्रोल सेंटर रूस की खुफिया एजेंसी के आॅफिस के ठीक बगल में था। यह बात इस हमले की गुप्त और साहसिक प्रकृति को दर्शाती है। यूक्रेन ने न सिर्फ रूस की सीमा में घुसकर हमला किया, बल्कि इसे इतनी चतुराई से अंजाम दिया कि रूसी सेना को भनक तक नहीं लगी।
इस हमले की सबसे हैरान करने वाली बात थी इसकी रणनीति। बीबीसी न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, यूक्रेन ने छोटे-छोटे फर्स्ट-पर्सन व्यू ड्रोन्स का इस्तेमाल किया, जो रियल-टाइम वीडियो फीड के जरिए आॅपरेटर्स द्वारा नियंत्रित किए जाते हैं। इन ड्रोन्स को रूस के अंदर गुप्त रूप से ले जाया गया। इसके लिए खास तरह के ट्रकों का इस्तेमाल किया गया, जिनमें लकड़ी के केबिन्स बने थे। इन केबिन्स की छतें रिमोट से खुलती थीं और फिर ड्रोन हवा में उड़कर पास के सैन्य ठिकानों पर हमला करते थे।
ये ड्रोन कई दिशाओं से एक साथ भेजे गये, जिससे रूस के रडार सिस्टम को चकमा देना आसान हो गया। इस हमले में रूस के पांच हवाई अड्डों मरमंस्क, इरकुत्स्क, इवानोवो, रियाजान और अमूर क्षेत्रों में को निशाना बनाया गया। यूक्रेन का दावा है कि इस हमले में 41 रूसी विमान, जिनमें टीयू-95, टीयू-22एम3 और ए-50 जैसे स्ट्रैटेजिक बॉम्बर्स शामिल थे, नष्ट या क्षतिग्रस्त हो गए। यूक्रेन की सिक्योरिटी सर्विस (रइव) के दावा किया कि इस हमले से रूस को करीब 7 बिलियन डॉलर का नुकसान हुआ।
जेलेंस्की ने इस आपरेशन को इतिहास की किताबों में दर्ज होने वाला बताया। उन्होंने कहा, यह आपरेशन सिर्फ सैन्य ठिकानों पर हमला नहीं था, बल्कि यह दिखाता है कि यूक्रेन की तकनीक और रणनीति रूस से कहीं बेहतर है। न्यूज वेबसाइट द इंडिपेंडेंट की एक रिपोर्ट में जेलेंस्की के हवाले से कहा गया, यूरोप और अमेरिका के पास रूस से बेहतर हथियार हैं और हमारी रणनीति भी उनसे ज्यादा मजबूत है। आपरेशन स्पाइडर वेब इसका सबूत है।
जेलेंस्की ने यह भी बताया कि इस हमले में शामिल सभी यूक्रेनी आपरेटर्स को रूस की जमीन से सुरक्षित निकाल लिया गया। उन्होंने कहा, हमने अपने लोगों को समय रहते सुरक्षित जगह पर पहुंचा दिया। साथ ही, जेलेंस्की ने इस हमले को रूस के लिए जायज और उचित नुकसान बताया, क्योंकि यह उन ठिकानों पर किया गया जो यूक्रेन पर हमले के लिए इस्तेमाल हो रहे थे।
हमले का समय और शांति वार्ता का कनेक्शन
यह हमला ऐसे समय में हुआ जब यूक्रेन और रूस के बीच इस्तांबुल में शांति वार्ता शुरू होने वाली थी। कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि यूक्रेन ने इस आपरेशन की जानकारी पहले से ही ट्रंप प्रशासन को दे दी थी, हालांकि अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि उन्हें इसकी पहले से जानकारी नहीं थी।
जेलेंस्की ने कहा कि यह हमला रूस को यह संदेश देता है कि यूक्रेन अपनी रक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकता है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि रूस की ओर से वार्ता में गंभीरता न दिखाने पर और सख्त प्रतिबंध लगाए जाने चाहिए। जेलेंस्की ने कहा, हम शांति के लिए हर संभव कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अगर इस्तांबुल की वार्ता से कुछ हासिल नहीं हुआ, तो रूस को और सजा मिलनी चाहिए।
रूस के रक्षा मंत्रालय ने इस हमले को आतंकी हमला करार दिया। रूस ने दावा किया कि उसने इवानोवो, रियाजान और अमूर क्षेत्रों में सभी ड्रोन हमलों को नाकाम कर दिया। हालांकि, मरमंस्क और इरकुत्स्क में कुछ विमानों में आग लगने की बात स्वीकारी गयी। रूस ने कहा कि इस हमले में कोई हताहत नहीं हुआ। लेकिन यूक्रेन के दावों और सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के मुताबिक, रूस को भारी नुकसान हुआ।
न्यूज वेबसाइट सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, इस हमले में इस्तेमाल हुए ड्रोन्स की खासियत थी उनकी सटीकता और गुप्त तरीके से काम करने की क्षमता। ये ड्रोन छोटे और हल्के थे, जिन्हें ट्रकों में छिपाकर ले जाया गया। इन ड्रोन्स को रिमोटली लॉन्च करने की तकनीक ने रूस की रक्षा प्रणाली को चकमा दे दिया। डिफेंस एक्सपर्ट पीटर लेटन ने कहा कि इस हमले से रूस की स्ट्रैटेजिक बॉम्बर्स की ताकत कमजोर हुई है, जो क्रूज मिसाइलों को ले जाने में सक्षम थे।
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