एबीएन डेस्क। वित्त वर्ष 21 में व्यक्तिगत आयकर संग्रह 4.69 लाख करोड़ रुपए रहा है जो इससे पिछले वित्त वर्ष के 4.80 लाख करोड़ रुपए की तुलना में 2.3 प्रतिशत कम है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 19 में व्यक्तिगत आयकर संग्रह 4.61 लाख करोड़ रुपए, वित्त वर्ष 20 में 4.80 लाख करोड़ रुपए और वित्त वर्ष 21 में यह 4.69 लाख करोड़ रुपए रहा है। आयकर संग्रह में ब्याज कर, फ्रिंज लाभ कर, आय और व्यय कर शामिल है। सरकार ने प्रत्यक्ष कर राजस्व को लेकर कई कदम उठाये हैं ताकि कर संग्रह में बढोतरी होने के साथ ही करदाता आधार भी बढ़े और स्वैच्छिक तौर पर अनुपालनों को बढ़ावा मिल सके। इसके अतिरिक्त डिजिटल लेनदेन को भी बढ़ावा देने के साथ ही कर चोरी पर भी लगाम लगाने की कोशिश की है। वित्त मंत्रालय ने लोगों को रिटर्न दाखिल करने को सुगम बनाने के उद्देश्य से नया रिटर्न पोटर्ल शुरू किया है जिसमें पहले से भरा हुआ फॉर्म है और संबंधित व्यक्ति के सारे वित्तीय आंकड़े में उसमें होते हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार चालू वित्त वर्ष में गत सात दिसंबर में 3.61 लाख करोड़ रुपए के व्यक्तिगत आयकर राजस्व मिला है। सरकार की बुहत कोशिशों और कर चोरी रोकने के उपायों के बावजूद करीब 140 करोड़ की आबादी वाले इस देश में मात्र 1.5 करोड़ लोग की आयकर दे रहे हैं।
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