चतरा। जिला अपने प्राकृतिक, धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थलों के लिये प्रदेश ही नही देश के पर्यटन मानचित्र पर एक अलग स्थान रखता है। यह वनांचल अपने सुरम्य वादियों, पर्वत, झरना, नदियों को अपने आप में समेटे हुये है। यहां पर पवित्र धार्मिक नगरी भद्रकाली मंदिर, लमबोईया मंदिर और कौलेश्वरी मंदिर है, वहीं तमासीन और बलबल जैसे दो महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल भी पर्यटकों को बरबस अपनी ओर आकर्षित करता है। जिला मुख्यालय से तकरीबन पैंतीस किमी दूर इटखोरी में स्थित मां भद्रकाली मंदिर आस्था का केंद्र बिन्दु है। इसके साथ ही यह धर्मस्थल पर्यटन का भी केंद्र बनते जा रहा है। हालांकि यहां सालों भर पूजा-अर्चना के लिए साधकों व श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। लेकिन नव वर्ष के आगमन पर यहां सैलानियों की भीड़ बढ़ने लगती है। भद्रकाली मंदिर के निकट मुहाने नदी बहती है, जो इस जगह को और अधिक आकर्षक बना देता है। मंदिर में प्रवेश करने से पहले एक डुबकी लेने के लिए नदी सबसे अच्छी जगह है। भद्रकाली मंदिर की बहुत मान्यता है। धार्मिक आस्था वाले लोगों के लिए यह तीर्थ भी है। यहां देवी मंदिर के साथ शिवलिंग भी है। वहीं जिले के पर्यटन स्थल भी सैलानियों को अपनी ओर आकर्षित कर रही है। यहां के पर्यटन स्थल घने जंगलों से ढंकी है और यहां कल-कल बहते पानी की आवाज सुनना बहुत ही सुकूनदायक लगता है। यहां कल कल करते झरने बरबस ही लोगो का मन मोह लेते है तमासीन अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है। प्रति वर्ष हजारों सैलानी यहाँ आते है और पिकनिक का लुफ्त उठाते है। यहां का झरना प्रसिद्ध है यही लोग अपने आप को इसमें भीगने से रोक नहीं पाते। कौलेश्वरी मंदिर प्रकृति की गोद में बसा है यहाँ आकर आप पर्वत चढ़ने का भी मजा ले सकते है।
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