रांची। झारखंड के कई जिले शीतलहर की चपेट में हैं। बावजूद स्कूल सुबह 8 बजे से ही संचालित हो रहे हैं। स्कूल पहुंचने के लिए कई विद्यार्थियों को सुबह 7 बजे ही घर से निकलना पड़ रहा है। इसे लेकर उनकी परेशानी बढ़ गई है। अभिभावकों ने छात्र-छात्राओं को हाड़ कंपाती ठंड से बचाने की गुहार मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो और उपायुक्त छवि रंजन से लगाई है। उनका कहना है कि शिक्षा विभाग की अदूरदर्शिता के कारण बच्चों के जान खतरे में पड़ गयी है। राज्य में पड़ रही कड़ाके की ठंड से स्कूल में पढ़ने वाले छात्र-छात्राएं काफी प्रभावित हो रहे हैं। हवा चलने से ठंड के साथ कनकनी बढ़ गई है। कई जिलों में तापमान 5 डिग्री सेल्सियस से नीचे आ गया है। तापमान कम होने का कारण बढ़ी ठंड से छात्र-छात्राओं को स्कूल आने-जाने काफी परेशानी हो रही है। आने वाले दिनों में तापमान और गिरने की उम्मीद जताई जा रही है। मध्य विद्यालय के कक्षा 6 से 8 तक प्रात: 8 बजे से पूर्वाह्न 12 बजे तक कक्षाएं चल रही है। स्कूल पहुंचने के लिए छात्र-छात्राओं को सुबह 7 बजे घर से निकलना पड़ता है। उस समय सर्द हवा और हाड़ कंपाने वाली कनकनी से बच्चों को गुजरना पड़ रहा है। इस समय स्कूल के कमरे और ठंडी हो जाती है। पठन पाठन करने वाले बच्चे पढ़ाई के दौरान ठंड से ठिठुर रहे हैं। ठंड बढ़ने के कारण छात्र-छात्राओं का जीवन खतरे में पड़ गया है। अभिभावकों ने कहा कि स्थिति के मद्देनजर छात्र-छात्राओं को ठंड से बचाने के लिए समुचित कदम उठाये जाने की जरूरत है। अभिभावकों ने सीएम, शिक्षा मंत्री और उपायुक्त से इस मामले में कार्रवाई करने की मांग की है।
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