आदिवासी-मूलवासी संगठन ने राज्यपाल को सौंपा ज्ञापन, 12 मार्च को रांची में करेंगे विशाल रैली

 

रांची। सोमवार को आदिवासी मूलवासी सामाजिक संगठनों का संयुक्त मोर्चा के तत्वावधान में स्थानीय एवं नियोजन नीति तथा अन्य ज्वलंत मसलों को लेकर राजभवन के समक्ष महाधरना का कार्यक्रम हुआ।राज्यपाल को ज्ञापन समर्पण के पूर्व डाक्टर करमा उरांव ने निम्नलिखित प्रस्ताव रखे जिसे सर्वसम्मति से पारित किया गया-:1) स्थानीय एवं नियोजन नीति तुरन्त परिभाषित की जाये जिसमें 1932 खतियान या अंतिम सर्वे रिकार्ड प्रमुख आधार रखी जाये।अन्य शर्तों में राज्य की मुख्य भाषा, संस्कृति ,जीवनशैली एवं परम्पराओं की जानकारी भी प्रमुख शर्तो में हो। 2) भ्रष्टाचार मुक्त राज्य की स्थापना की जाये।राज्य बनने के साथ ही राज्य में शासन एवं प्रशासनिक तंत्र में भ्रष्टाचार का उद्योग प्रखंड से लेकर राज्य सचिवालय तक व्याप्त रही है, जो आज भी कायम है और इस व्यवस्था को रोकी जाये। वर्तमान सरकार के कार्यकाल में भ्रष्टाचार का उद्योग चरम पर है। 3) स्थानीय और नियोजन नीति अविलंब परिभाषित की जाये और राज्य में रिक्त पड़े विभिन्न संवरगीय पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया विधि सम्मत शुरू की जाये। 4) जेपीएससी की वर्तमान संयुक्त परीक्षा में भारी अनियमितता बरती गई है जिसके लिए पूरी तरह से अध्यक्ष जिम्मेवार हैं उसे पद से हटने के लिए राज्यपाल और मुख्यमंत्री अध्यक्ष जेपीएससी को सलाह दें और परीक्षा अविलम्ब रद्द की जाये। 5) राज्य में विस्थापन और पुनरस्थापन आयोग का गठन, माॅब लीन्चिंग के लिए कड़े कानून बनाये जाये। मछुआरा एवं अन्य सीमांतक जातियों के आर्थिक विकास और नीति बनाई जाये। 6) राज्यपाल भारत सरकार से अनुरोध करे की ऐसे आईएएस/ आईपीएस पदाधिकारियों की पदस्थापना करे जिन्हें भाषा, संस्कृति और अन्य परिस्थितियों की जानकारी हो। 7) राज्य में उद्योग नीति ऐसी बने जिसमें यहां के उद्योगपति, व्यवसायी एवं अन्य कारोबारियों को आर्थिक सहायता एवं अन्य सुरक्षा उनके संवर्धन, संरक्षण की दिशा में गारंटी मिले जिसे यहां के उद्यमियों को आगे बढ़ने का मौका मिले। राज्य के विभिन्न क्षेत्रों से आये लोगों ने अपनी सहभागिता दिखाई और अपनी भावनाओं से अवगत कराये। सभा के माध्यम से डाक्टर करमा उरांव जी ने निर्मित ज्ञापन के प्रत्येक बिन्दु को विषयवार पढ़ा और उपस्थित सदस्यों ने अपनी सहमति जताई। डॉ करमा उरांव ने भ्रष्टाचार मुक्त सरकार की आवश्यकता पर बल दिया और झारखंड के सभी जनप्रतिनिधि अपनी सम्पति की घोषणा करे इससे संबंधित प्रस्तावना पारित किया। उपस्थित सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि ने अपने वक्तव्य में आदिवासी मूलवासी को नजरअंदाज कर सत्तासीन सरकार को चेतावनी दी की सुधर जाओ वरना गद्दी छोड़ो।डॉ करमा उरांव जी ने सभी आये हुए विभिन्न संगठनों के जनप्रतिनिधि को भारी संख्या में उपस्थिति पर साधुवाद और धन्यवाद दिया और आनेवाले समय और आगे की लड़ाई के लिये एकजुटता बनाये रखने की अपील की। मंच का संचालन संगठन के सक्रिय सदस्य अंतु तिर्की ने किया और धन्यवाद ज्ञापन बलकू उरांव ने किया। आज इस महाधरना के कार्यक्रम में अंतू तिर्की, प्रेम शाही मुंडा, राजू महतो, आजम अहमद, फूलचंद तिर्की, शिवा कच्छप, लोहरमेन उरांव, बहुरा उरांव, माधो कच्छप, विभय नाथ शाहदेव, प्रवीण देवघरिया, रमजान कुरैशी, उत्तम लाल, चरण केवट, धर्म दयाल साहू, बहुरा एक्का, डॉ मुजफ्फर हुसैन, गीता लकड़ा, निरंजना हेरेंज टोप्पो, शिव प्रसाद साहू, प्रेम चन्द्र मुर्मू, एस अली, बलकु उरांव, सुनिल सिंह, सुबोध दांगी, सुशांत मुखर्जी, अभय भुटकुंवर, रामपोदो महतो, देवसहाय मुंडा, संजय तिर्की, गोविन्द बेदिया, चामु बेक, शिव शंकर महतो, रिंकू खान, प्रवीण सहाय, सुभाष, अनिल दयाल, शैलेशवर दयाल, अरविन्द देवघरिया, इजराइल खालिद, कृष्णा मुंडा, सोनू तिर्की, सूर्या तिर्की, हरीश मुंडा, इसरार आलम, प्रणव कुमार बब्बू विशेष रूप से घाटशिला से चलकर आये झारखंड आंदोलनकारी सुर्य सिंह बेसरा एवं अन्य उपस्थित लोगों ने अपने बहुमूल्य विचार व्यक्त किये। उक्त महाधरना में 50 से अधिक विभिन्न संगठनों के लोगों ने भाग लिया। यह भी निर्णय लिया गया कि 12 मार्च 2022 को उक्त मांगों के अतिरिक्त झारखंड के अन्य मसलों को लेकर राज्य की राजधानी रांची में एक विशाल रैली के आयोजन की घोषणा की। 15 जनवरी 2022 को सामाजिक संगठनों की प्रतिनिधि सभा और 12 मार्च 2022 को आदिवासी मूलवासी की महारैली की घोषणा की गई।

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