राजस्थान : नये कानून के तहत पाली में दर्ज हुई पहली एफआईआर

 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। हत्या के लिए अब आईपीसी की धारा 302 नहीं, भारतीय न्याय संहिता की धारा 103 लगेगी। अंग्रेजों के जमाने से चले आ रहे कानून 163 साल बाद खत्म हो गये हैं। अगर 5000 से कम की चोरी करते पकड़े गये तो कोर्ट गली-मोहल्ले में झाड़ू लगाने की सजा भी सुना सकती है। 

पूरे देश में 1 जुलाई 2024 से नया भारतीय दंड संहिता का नाम भारतीय न्याय संहिता हो गया है। कानून में हुए नये बदलावों को लेकर सोमवार को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने वीसी के जरिए राजस्थान पुलिस, सीएलजी मेंबर, पुलिस मित्र और सुरक्षा सखियों को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि नये कानून के तहत जल्द ही न्याय मिलेगा। 

इसी को लेकर पाली जिले के सादड़ी थाना में नये भारतीय दंड संहिता के तहत प्रदेश का पहला मामला सोमवार सुबह 10 बजकर 22 मिनट पर दर्ज किया गया है। पीड़ित के साथ खेत से ट्रैक्टर निकालने की बात को लेकर विवाद हुआ था, जिसके बाद उसकी पिटाई की गई। सादड़ी थाने के सीआई चंपाराम ने बताया कि मोरखा निवासी मदनलाल ने रिपोर्ट देकर बताया कि वह ट्रैक्टर चलाता है। वह किराये से लोगों के खेतों में खड़ाई का कार्य करता है। 30 जून रविवार को सरदारसिंह के खेत में खड़ाई की, जिसके पास में सुमेर सिंह का खेत है। 

मदनलाल ने बताया कि सुमेर सिंह के खेत में से ट्रैक्टर निकाला तो वह नाराज हो गया। सोमवार सुबह वह ट्रैक्टर लेकर जा रहा था। इसी दौरान सुमेर सिंह ने बीच रास्ते उसे रुकवाया और मारपीट कर दी। इससे सिर व कोहनी में चोट आयी है। सीआई ने बताया कि बीएनएस की धारा 115 (2), 126 (2), 324 (4) और 324 (5) में दर्ज हुई। जबकि यह पूर्व में 323, 341 व 427 आईपीसी में दर्ज होती थी। घायल का सादड़ी के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में इलाज चल रहा है। 

दौसा के लालसोट थाने में भी एक महिला की शिकायत पर नये कानून के तहत मामला दर्ज करवाया है। डीएसपी उदय सिंह ने बताया कि पीड़िता सोमवार सुबह 7 बजे दिल्ली से थाना क्षेत्र में अपने ससुराल पहुंची। जहां उसके दो देवर और एक देवरानी आये और उसका सामान घर से बाहर फेंकना शुरू कर दिया। जब उसने विरोध किया तो उसके साथ मारपीट की गयी। कपड़े फाड़कर लज्जा भंग की गयी। इस दौरान आरोपियों ने उसके कान से टॉप्स छीन लिये। इस दौरान गांव के लोगों ने बीच बचाव किया नहीं तो आरोपी उसे जान से मार देते। 

इस दौरान आरोपियों ने ससुराल में नहीं रहने देने की धमकी भी दी। महिला 12:30 बजे पहुंची। उसके बाद दोपहर को 12:51 पर बीएनएस की धाराओं में मामला दर्ज कर लिया। मामले की शिकायत लेकर जब महिला थाने पहुंची तो उस समय मुख्यमंत्री की वीसी पूरी हुई थी। पुलिस अधिकारी भी थाने में मौजूद थे। जैसे ही महिला ने शिकायत दी तो भारतीय न्यायिक संहिता की धारा 115/2, 126/2, 303/2, 74 और 351/2 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। पूर्व में आईपीसी के तहत यह मुकदमा धारा 323, 341, 379, 354, 506 का अपराध बनता था। मगर भारतीय दंड संहिता की जगह अब भारतीय न्याय संहिता लागू होने से धाराओं में बदलाव हो चुका है और नए कानून पूरे देश में लागू हो चुके हैं। 

गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम ने कहा कि न्याय अगर देरी से मिलता है तो वह न्याय नहीं है। इस लिए नये कानून से न्याय जल्द से जल्द मिलेगा। केन्द्र सरकार ने पीड़ित का दर्द समझा इसीलिए यह कानून लेकर आए हैं। तत्काल न्याय देने के लिए पुलिस की बड़ी भूमिका होती हैं इसलिए पुलिस को बड़ी जिम्मेदारी से काम करने की जरूरत है।

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