टीम एबीएन, रांची। विश्व हिंदू परिषद के क्षेत्र सहमंत्री डॉ बिरेन्द्र साहु ने जगन्नाथ मेले की टेंडर पर आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि झारखंड सहित पूरे देश में सनातन हिंदू संस्कृति के परंपरा में जतरा-मेला का लगना एक सार्वजनिक उत्सव हुआ करता है।
जहां सभी संप्रदाय के जनमानस शामिल होकर मेले-स्थल के आराध्य देव का पूजन-अर्चन के साथ-साथ मनोरंजन व मेले-स्थल में लगे छोटे-छोटे दुकानों से अपने दैनिक उपयोग के सामग्री के खरीदारी करते हुए परिवार के साथ मिठाई इत्यादि का भी आनंद लेते हैं, परन्तु विगत वर्ष से श्रीजगन्नाथ मेले का टेंडर निकाला जा रहा है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है।
डॉ साहू ने कहा कि श्रीजगन्नाथ मेला हमारी सनातन संस्कृति का एक ऐतिहासिक धरोहर है। मेले का लगना मात्र उत्सव का घड़ी नहीं बल्कि आसपास के सैकड़ो गांवों के मिलन का अवसर हुआ करता है। हजारों लोगों को अपनी छोटी-मोटी दुकान खोलकर कुछ आय कमाने की भी आस लगी रहती थी,जो अब टेंडर होने के बाद संभावना नहीं है।
टेंडर के बाद विगत वर्ष भी दुकानदारों को बड़ी मात्रा में चंदा देने पड़ी थी और इस बार तो टेंडर की राशि दुगुना होने के कारण दुकानदारों के लिए चंदा की राशि बढ़ जाएगी। चंदा की राशि देने में असमर्थ ऐसे छोटे-छोटे व्यापार से जुड़े लोगों का रोजी-रोटी पर लाथ मारने जैसी है वहीं कई परंपरागत चीजें लोगों को मेले में नहीं मिल पायेंगे।
डॉ साहु ने कहा सनातन संस्कृति पर प्रहार का एक साधन के रूप में भी इसका उपयोग किया जा रहा है। जिस प्रकार आज भारतवर्ष के सैकड़ो मंदिरों से राशि उगाही की परंपरा बनी हुई है, उसी की कड़ी में इस मेले के आयोजन से भी सरकार उगाही की परंपरा बनायी है, जिसे हिंदू समाज स्वीकार नहीं करेगा।
डॉ साहू ने कहा कि श्रीजगन्नाथ मेले का टेंडर से सनातन हिंदू की परंपरागत विरासत को नष्ट करने की कुचेष्टा की जा रही है, इसे शीघ्र रोका जाए। टेंडर को निरस्त कर परंपरागत ढंग से मेले की व्यवस्था एवं संचालन करने में प्रशासन कार्य करें। (लेखक विहिप के झारखंड बिहार के क्षेत्र मंत्री हैं।)
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