शैक्षणिक माहौल से बढ़ती है युवाओं की क्षमता...

 

एबीएन डेस्क (डॉ मेरी ग्रेस)। एक कथन है कि अगर यह निश्चित हो जाए कि माता-पिता के जीवन दान से बच्चे का करियर बन सकता है, भवष्यि सुधर सकता है तो माता-पिता अपने बच्चों के लिए प्राण भी दे सकते हैं। पर ऐसा होता नहीं है। उनको अपना कैरियर स्वयं बनाना होता है। माता-पिता उसमें उनका सहयोग कर सकते हैं। प्राय: देखा गया है कि बच्चों के कैरियर को बनाने के उत्साह में बच्चों पर अतिरक्ति दबाव बना देते हैंजो बच्चों के भवष्यि के लिए ज्यादा घातक हो जाता है। माता-पिता को चाहिए कि वे उसका ध्यान रखें वे कुछ महत्वपूर्ण ंिवदुओं पर अमल करने का प्रयास करें। 1. एक काम काजी व्यक्ति का 70 प्रतिशत समय उसके कार्य स्थल पर लग जाता है। अगर व्यक्ति करियर से खुश नहीं होगा औरअपना काम ठीक से नहीं कर पाएगा तो नश्चिति रुप से खुश नहीं रहेगा और तनाम में रहेगा। जीवन में यह आवश्यक है कि प्रत्येक व्यक्ति अपने करियर को पंसद करें। इसमें माता-पिता की भूमिका महत्वपूर्ण है। वे बच्चोें को प्रात्साहित करेें कि वे अपने पंसद को अपना कैरियर बनाए। इससे बच्चों का भवष्यि खुशनुमा रहेगा। 2. माता-पिता को कभी अपने बच्चों की तुलना किसी अन्य बच्चों या सगे संबंधियों से नहीं करना चाहिए। हर बच्चा दूसरों से अलग होता है साथ ही हर सफल व्यक्ति दूसरे सफल व्यक्ति से कम या अधिक हो सकता है। मेरे एक परिचित सदैव अपने बच्चे को अपना उदाहरण देते रहते थे कि हम एक बडे़ कंपनी के वाईस प्रेंिसडेंट है। एक दिन बच्चें ने कहा कि आप वाईस प्रेंसिडेंट हैं, न बिल गेटस तो नहीं बन सके न। 3. माता-पिता बच्चों के रोल मॉडल होते हैं। बच्चें बचपन में उनकी नकल करते हैं। माता-पिता को कोई ऐसी हरकत नहीं करना चाहिए कि बच्चों पर बुरा असर पड़े। 4. बच्चों से सदैव संवाद बनाए रखना आवश्यक है। उन्हें करियर कोर्स और भवष्यि की योजनाएं समझाया जाना चाहिए। अगर माता-पिता से ये जानकारी मिल जाए तो बच्चों को बाहर जाने की आवश्यकता ही नहीं होगी। बच्चे गलत सलाह पर वश्विास कर सकते हैं इसलिए उन्हें गलत सलाह से बचाया जाना चाहिए। बच्चों से संवाद यहां तक की फल्मि, समाज और देश दुनियां की बात करनी चाहिए। 5. गलतियां सबसे होती है। गलती सफलता की पहली सीढ़ी है यह मानकर उन्हें माफ किया जाना चाहिए। बच्चों को ज्यादा फटकार नहीं लगाना चाहिए। गलतियों पर उनको नई राह दिखाएं। बच्चे सुधर जाएंगें। 6. बच्चे की हां में हां भी करना उचित नहीं है। कभी-कभी उनकी बातों पर न भी करना चाहिए। इससे वे जीवन की सच्चाई भी समझेंगे। विशेषकर कैरियर से संबंधित बातों पर हर बात में हां न करें उन्हें उचित सलाह देने का प्रयास करें। सदैव माता-पिता से हां सुनने के आदि बच्चे जीवन में घोखा खाते हैं। शिक्षकों पर बच्चों को शैक्षणिक भार डालकर आप जिस प्रकार असहयोग करते हैं उससे बच्चे की शैक्षणिक स्थिति में गिरावट आती है। शिक्षको का सहयोग करें जिससे आपका बच्चा शिक्षकों का सम्मान करेगा। (लेखिका उर्सूलाइन इंटर कॉलेज की प्राचार्या हैं।)

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