एबीएन डेस्क। भारत में जल्द ही लिथियम आयन बैटरी का निर्माण शुरू किया जाएगा। इससे देश में न केवल ई वाहनों के इस्तेमाल को बढ़ावा मिलेगा बल्कि देश में पेट्रोल और डीजल पर निर्भरता भी कम होगी। नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने गुरुवार को कहा कि आयात निर्भरता घटाने के लिए विभिन्न देशों के साथ लिथियम पर करार किए जा रहे हैं। क्या कहा नीति आयोग? : कांत ने कहा, पब्लिक सेक्टर की कंपनी बिदेश इंडिया लिमिटेड अर्जेंटिना, चिली, ऑस्ट्रेलिया और बोलिविया में लिथियम और कोबाल्ट की खादानों के लिए लगातार बातचीत कर रही है। ये वो देश हैं जहां लिथियम का भंडार है। इसके साथ ही अर्बन माइनिंग पर भी काम चल रहा हो जहां रिसाइकिलिंग के जरिए लिथियम का उत्पादन किया जा सके। इससे आयात को घटाने में मदद मिलेगी। अमिताभ कान्त ने आगे बताया कि ई-व्हीकल इंडस्ट्री के लिए काम कर रही संसदीय समिति भी देश में लिथियम आयन बैटरी के उत्पादन पर जोर दे रही है। समिति ने कहा है कि वर्ष 2030 तक देश में ई- व्हीकल मार्केट 206 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। इस टारगेट तक पहुंचना तभी संभव है जब देश में ही लिथियम बैटरी के उत्पादन में वृद्धि होगी। सरकार लिथियम आयन बैटरी के उत्पादन के लिए प्रोत्साहन राशि (PLI) की घोषणा भी कर चुकी है। इसके लिए लगभग 43 हजार करोड़ रुपए को मंजूरी मिली है। ई-व्हीकल मार्केट में अगले 5 सालों में करीब 94 हजार करोड़ रुपए का निवेश की संभावनाएं जताई गई हैं। चीन को लगेगा झटका : अभी देश में लिथियम बैटरी व सेल की एक भी उत्पादन इकाई नहीं है और 100 फीसदी जरूरत आयात के जरिए पूरी होती है, जिसमें सबसे ज्यादा हिस्सा चीन से आता है। इतना ही नहीं दुनियाभर में बनने वाली एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल (एसीसी) का 90 फीसदी उत्पादन भी चीन ही करता है।
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