एबीएन हेल्थ डेस्क। वर्तमान समय में मानव स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से ग्रसित होता जा रहा है। उसी क्रम में पायरिया रोग (दांत एवं मसूड़े) की समस्या एक गंभीर जन्म लेते जा रही है, जो बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों में आमतौर पर देखने को आती है। जिससे हमारे मुंह से दुर्गंध आना, मुंह से पस आना, बार-बार मसूड़े से ब्लीडिंग होना आदि समस्या पायरिया बीमारी में होती है। जिससे हमारा पाचन तंत्र भी प्रभावित होता है। इससे बचाव में शीतकारी प्राणायाम काफी लाभकारी माना जाता है।
योगाचार्य महेश पाल विस्तार से बताते हैं कि प्राणायाम का योग में बहुत महत्व है। आदि शंकराचार्य श्वेताश्वतर उपनिषद पर अपने भाष्य में कहते हैं- प्राणायाम से जिस मन का मैल धुल गया है, वही मन ब्रह्म में स्थिर होता है। इसलिए शास्त्रों में प्राणायाम के विषय में उल्लेख है।
स्वामी विवेकानंद इस विषय में अपना मत व्यक्त करते हैं कि इस प्राणायाम में सिद्ध होने पर हमारे लिए मानो अनंत शक्ति का द्वार खुल जाता है। मान लो, किसी व्यक्ति की समझ में यह प्राण का विषय पूरी तरह आ गया और वह उस पर विजय प्राप्त करने में भी कृतकार्य हो गया, तो फिर संसार में ऐसी कौन-सी शक्ति है, जो उसके अधिकार में न आये। उसकी आज्ञा से चंद्र-सूर्य अपनी जगह से हिलने लगते हैं।
क्षुद्रतम परमाणु से वृहत्तम सूर्य तक सभी उसके वशीभूत हो जाते हैं, क्योंकि उसने प्राण को जीत लिया है। प्रकृति को वशीभूत करने की शक्ति प्राप्त करना ही प्राणायाम की साधना का लक्ष्य है। शीतकारी प्राणायाम एक यौगिक श्वास व्यायाम है, जो मन को शांत करता है और शरीर को ठंडा करता है। दांतों व मसूड़े को स्वस्थ बनाता है। यह शब्द संस्कृत के शीतकारी से आया है, जिसका अर्थ है चूसना या फुफकारना।
प्राण जिसका अर्थ है जीवन शक्ति और अयामा, जिसका अर्थ है विस्तार। अभ्यास करने के लिए दांतों को बंद करके मुंह से सांस अंदर खीचना होता है, ये अजगर की सांस लेने के समान हैं। अजगर, मुर्गियां, हिरण के बच्चे मुंह खोलकर गहरी सांस लेते हैं और वे सभी हवा के साथ आसानी से अंदर चले जाते हैं और उनमें उसे पचाने की क्षमता होती है।
शीतकारी प्राणायाम की प्रक्रिया भी इसी प्रकार है। सांस लेने की ये दोनों गतिविधियां शरीर और दिमाग को ठंडा करने में भी बहुत उपयोगी हैं। जब आपको तेज प्यास लग रही हो और पानी उपलब्ध न हो तो इन प्रक्रियाओं के 6 या 7 चक्र करने से आपकी प्यास कम हो सकती है। शीतकारी प्राणायाम का उल्लेख हठ योग प्रदीपिका में प्राणायाम की एक प्रक्रिया के रूप में किया गया है। शीतली और शीतकारी प्राणायाम एक जैसे हैं, लेकिन इनमें सिर्फ एक ही अंतर है, सांस लेने के तरीके का।
शीतली में हम जीभ मोड़कर सांस लेते हैं और शीतकारी में हम दांतों से सांस लेते पायरिया एक गंभीर मसूड़ों का संक्रमण है जो मसूड़ों, स्नायुबंधन और हड्डियों को नुकसान पहुंचाता है। मसूड़ों और दांतों की जड़ों से मवाद निकलता है। आमतौर पर मवाद का सेवन भोजन के साथ किया जाता है, जिससे कई संक्रमण हो सकते हैं पेरियोडोंटल बीमारी के उन्नत चरण में यह रक्तस्राव और मसूड़ों से मवाद निकलने का कारण बनता है। यह सबसे व्यापक बीमारियों में से एक है।
यह वयस्कों में दांत खराब होने का सबसे आम कारण है। यह आमतौर पर अपर्याप्त दंत स्वच्छता के परिणामस्वरूप होता हैं पायरिया यह एक जीवाणु संक्रमण का परिणाम है। इसे पायरिया एल्वेओलारिस कहते हैं।पेरियोडोंटाइटिस जिंजिवाइटिस का एक गंभीर रूप है, जिसमें मसूड़ों की सूजन दांत के आसपास की संरचनाओं तक फैल जाती है। प्लाक और टार्टर पहले दांतों और मसूड़ों के बीच बनता है और फिर दांतों के नीचे की हड्डी में फैल जाता है।
मसूड़े सूज जाते हैं और खून बहता है, सांस से बदबू आती है और दांत ढीले हो जाते हैं। शीतकारी प्राणायाम दांतों व मसूड़े की सूजन को रोकता है प्लाक और टारटर को दांतों व मसूड़े की बीच में बनने से रोकना जिससे मसूड़े की सूजन और खून बहने को रोककर पायरिया जैसी गंभीर समस्या से बचाता है शीतकारी प्राणायाम करने के लिए, आप सबसे पहले साफ-सुथरी और खुली जहग पर ध्यान लगाने वाली मुद्रा में बैठकर आप अपनी आंखें बंद कर पूरे शरीर को आराम देने की कोशिश करें।
मुंह को बिलकुल सीधा रखकर दांतों को हल्का सा जुड़ा हुआ रखें और अपने होंठों को थोड़ा सा खुला रखें। इसके बाद आप अपनी जीभ को ऊपर की ओर चिपकाते हुए वहीं रखें। ऊपर और नीचे के दोनों दांतों को आपस में मिलाकर सी सी की आवाज करते हुए एक लंबी सांस लेते हुए अपने मुंह को बंद करें। फिर सांस को अंदर से बाहर छोड़ने के लिए अपनी नाक का इस्तेमाल करें और धीरे-धीरे नाक से सांस को त्यागें इस प्रक्रिया को काफी धीरे-धीरे करें और इस प्रक्रिया को करीब 10 बार दोहरायें।
शीतकारी प्राणायाम के अभ्यास से हमारे शरीर पर कई लाभ देखे गए हैं जिसमें यह शरीर के तापमान को ठंडा करता है इसलिए यह बुखार में उपयोगी है। यह मुंह, गले और जीभ संबंधी रोगों में लाभकारी है। प्लीहा और अपच में मदद करता है। उच्च रक्तचाप और ग्रीष्म सत्र के लिए सर्वोत्तम। यह पायरिया जैसी दंत समस्याओं में कारगर है।
यह शरीर के तापमान को नियंत्रित करता है। दिमाग को शांत करता है और यह सबसे अच्छा स्ट्रेस बस्टर है। भावनात्मक उत्तेजना और मानसिक तनाव को कम करता है। अवसाद के लिए सर्वोत्तम शीतकारी प्राणायाम करते हुए ये सावधानियां बरतें बुजुर्ग जिन लोगों के दांत काफी कमजोर या जिन लोगों दांत नहीं होते उन लोगों को शीतकारी प्राणायाम नहीं करना चाहिए।
आप इसकी जगह शीतली प्राणायाम कर सकते हैं। सांस से संबंधित रोग या अस्थमा रोगियों को नहीं करना चाहिए, हृदय रोगियों के लिए ये प्राणायाम थोड़ा मुश्किल और कठिन हो सकता है। कब्ज के शिकार लोगों को भी नहीं करनी चाहिए, कोशिश करें कि आप सुबह के ठंडे मौसम में ही शीतकारी प्राणायाम का अभ्यास करें।
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