विजय दिवस : कैलाश राय सरस्वती विद्या मंदिर में कारगिल के जवान सम्मानित

 

कोडरमा। 50वां विजय दिवस पर गुरुवार को कारगिल हवलदार हिटलर कुमार यादव को सम्मान किया गया। 26 जुलाई की तारीख इतिहास के पन्नों में हमेशा- हमेशा के लिए दर्ज है। यह वही तारीख है जो भारतीय सेना की आन-बान- शान को बताती है। कारगिल विजय दिवस उन वीर शहीदों को याद करते हुए नमन करने का दिन है, जिन्होंने पाकिस्तानी घुसपैठियों को पीछे खदेड़ दिया। इस विजय दिवस के पीछे प्रदेश व देश के कई शहीदों की शहादत भी है। जिन्हें अभ्रकांचलक्षेत्र हमेशा याद रखेगा। शहर में जगह-जगह लगी वीर शहीदों की प्रतिमाएं आज भी नई पीढ़ी को भारतीय सेना के अदम्य साहस की प्रेरणा देती हैं। गुरूवार को कैलाश राय सरस्वती विधा मंदिर में एक समारोह में कारगिल युद्ध में लडाई लडने वाले हिटलर कुमार यादव के अलावा सहायक उपनिरीक्षक विजय मिश्रा को शॉल ओढाकर सम्मानित किया गया। इस दौरान विद्यालय की बहन अंशु कुमारी, शीतल कुमारी, आयुषी कुमारी, मेघा कुमारी ने कभी पर्वत मुरझाया भी है कभी दरिया रोकी भी नई रूकती जवानी है न रूकती रवानी गीत प्रस्तुत कर लोंगों को भाव विभुर कर दिया। वहीं सीमा सुरक्षा बल के सेवा निवृत हवलदार हिटलर कुमार यादव ने एक गीत के माध्यम से कहा कि क्यों मरते हो इस दुल्हन के लिए मरो अपने देश के वतन के लिए मर जाओगें जिस रोज चंदा करेंगे तेरे कफन के लिए दोस्त आयेंगे दुश्मन की टोली उस तोपो से सजाओंगें मंैं वादा करता हूू तेरी लाश को फुलों से सजाउंगा... प्रस्तुत कर लोगों को देश के प्रति समर्पण की भावना पैदा कर दिये। उन्होनें आगे कहा कि इस दिन बंगला देश भी अलग हुआ और 13 दिनों तक युद्ध के बाद पाकिस्तान 93500 सैनिक आत्मसमर्पण किया था। छात्रों से उन्होनें कहा कि बच्चों को देश प्रेम की भावना होनी चाहिए। सेना में निस्वार्थ भावना के साथ जाने की जरूरत है। देश का हर बच्चा फोजी बने ये मेरी अपील है। मौके पर कैलाश राय सरस्वती विद्या मंदिर के उपाध्यक्ष अरविंद कुमार चौधरी, सचिव नारायण सिंह ने कहा कि 26 जुलाई 1999 से कारगिल विजय दिवस मनाया जाता है। करीब 18 हजार फीट की ऊंचाई पर यह लड़ाई लड़ी गई। कारगिल की यह लड़ाई 20 मई 1999 को शुरू हुई जिसमें देश के कई के जवान भी तिरंगे की खातिर अपने प्राणों की आहुति देने में आगे रहे। जहां सैनिक कारगिल की दुर्गम पहाडियों पर दुश्मनों को धाराशाई कर रहे थे। तो उन सैनिकों का मनोबल बढ़ाने के लिए सामान्य नागरिक भी पीछे नहीं रहे। युद्ध के समय हर किसी की नजर टीवी और समाचार पत्रों पर रहती थी। मंच संचालन आचार्य मनोज सिंह ने किया। मौके पर कोषाध्यक्ष नवल कुमार, सहसचिव सुषमा सुमन, प्राचार्य शमेंद्र कुमार साहू, आचार्य प्रदीप कुमार, नीरज कुमार सिंह, स्मीष्टा शाह, रानी प्रसाद, स्वेता श्रीवास्तव, सोनी कुमारी, प्रभात सौरभ, मुन्ना सिंह, मुरली धर, बीरेंद्र मिश्रा, विजय तिवारी आदि उपस्थित थे। धन्यवाद ज्ञावन चंद्रशेखर कुमार ने किया।

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