टीम एबीएन, रांची। एसआर डीएवी पब्लिक स्कूल, पुंदाग में युगपुरुष महर्षि दयानंद सरस्वती जी की दूसरी शताब्दी जयंती का आयोजन धूमधाम से किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत वैदिक महाहवन से हुई, जिसमें विद्यालय परिवार ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। तत्पश्चात ऋषिवर को भावभीनी पुष्पांजलि अर्पित की गयी।
विद्यालय की संगीत मंडली ने भजन के माध्यम से महर्षि के प्रति भावांजलि अर्पित किया। सप्तम वर्ग के आदित्य राज ने स्वामी जी के व्यक्तित्व तथा कृतित्व पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर कक्षा षष्ठ तथा सप्तम के विद्यार्थियों ने लोमहर्षक लघु नृत्यनाटिका महर्षि का प्रस्तुतीकरण कर विद्यालय परिवार के सभी सदस्यों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
विद्यालय की सुपरवाइजरी प्रमुख राजश्री मिश्रा ने अपने संदेश में कहा कि महर्षि ने नव भारत सृजन में अग्रणी भूमिका निभाई। श्रेष्ठ भारत की बुनियाद महर्षि ने ही डाली थी। उनके ऋण से हम उऋण नहीं हो सकते। उन्होंने आर्य समाज की स्थापना कर आर्य मूल्यों का प्रतिस्थापना की। ऋषिवर ने सामाजिक समरसता का संदेश दिया। उन्हीं की कोशिशों से आज हमारे समाज से अनेक कुरीतियों का अंत हो गया है।
विधवा विवाह, नारी शिक्षा, वैदिक मूल्यों की पुनर्स्थापना आदि का श्रेय उन्हीं को जाता है। एक तरफ वे सुधारवादी आंदोलन का नेतृत्व कर रहे थे, तो दूसरी ओर देश को स्वतंत्रता दिलाने के लिए भी देशभक्तों की फौज तैयार कर रहे थे। उन्होंने शिक्षकों एवं छात्रों से सनातन वैदिक मूल्यों का संवर्धन करने की अपील की। वैदिक जयघोष के साथ प्रात: कालीन सभा समाप्त हुई।
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