एबीएन न्यूज नेटवर्क, हजारीबाग। प्राथमिक व मध्य विद्यालयों में बच्चों को दी गयी पोशाक की गुणवत्ता पर सवाल उठाना शिक्षकों को भारी पड़ गया। कई विद्यालयों का निरीक्षण के बाद डीएसइ ने सस्पेंशन की कार्रवाई शुरू कर दी। अब तक सात शिक्षक सस्पेंड किये जा चुके हैं। अभी और भी शिक्षकों का गाज गिरनी बाकी है।
कई शिक्षकों को शोकॉज थमाया गया है। ऐसे में शिक्षकों में डीएसइ के खिलाफ काफी आक्रोश है। शिक्षकों ने इस संबंध में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय शिक्षा मंत्री सहित सूबे के राज्यपाल, मुख्यमंत्री, शिक्षा सचिव को पत्र भेजा है। अधिकारी की कारगुजारियों के खिलाफ न्याय की गुहार लगायी है।
सरकारी प्रावधानों के मुताबिक कक्षा एक और दो के विद्यार्थियों को डीबीटी के जरिये पोशाक क्रय की राशि भेजी जाती है। वहीं कक्षा तीन से आठ तक के बच्चों के लिए राशि विद्यालय प्रबंधन समिति (एसएमसी) के खाते में भेजने का प्रावधान है, लेकिन सरकार के मानकों पर डीएसइ ने नियम विरुद्ध स्वयं सहायता समूह को पोशाक उपलब्ध कराने का जिम्मा दे दिया।
पोशाक आपूर्तिकार्ताओं में कजरी कॉटन चरही और सक्षम उत्पादक समूह लोहरदगा के नाम शामिल हैं। इसके लिए न तो टेंडर की प्रक्रिया न ही कोई विज्ञापन निकाला गया। जो पोशाक उपलब्ध कराया गया वह काफी घटिया क्वालिटी का है। सूत्रों ने बताया कि इस प्रक्रिया में करोड़ों का खेल हुआ है।
डीएसइ की कार्यशैली को लेकर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी व विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष अमर कुमार बाउरी ने भी शिक्षा सचिव को पत्र लिखकर कार्यवाई की मांग की है। हजारीबाग के सदर विधायक मनीष जायसवाल ने भी पोशाक घोटाले को विधानसभा में प्रमुखता से उठाया था। प्राथमिक शिक्षा निदेशक नेहा अरोड़ा की अगुवाई में एक जांच टीम ने जिले का दौरा भी किया था।
गत साल दिसंबर माह की 19 तारीख को सहायक अध्यापक(पारा शिक्षक) आकस्मिक अवकाश पर रहकर अपनी मांगों को लेकर रांची गये थे। डीएसइ ने आनलाइन छुट्टी न लेने पर उस तिथि का वेतन रिकवरी का आदेश जारी कर दिया। इससे खफा शिक्षकों ने 26 दिसंबर को धरना भी दिया।
डीसी, विधायक मनीष जायसवाल, अमित यादव, जिला परिषद अध्यक्ष, डीएसई व सहायक अध्यापकों के मध्य हुई वार्त्ता में वेतन कटौती नहीं करने पर सहमति बनी। इसके बाद भी वेतन काटने का आदेश अब तक यथावत है।
डीएसइ ने दो जनवरी को आनलाइन उपस्थिति दर्ज न कराने को लेकर 829 शिक्षकों से स्पष्टीकरण पूछ कर नया रिकॉर्ड बना डाला। इनमें मृत शिक्षक, सेवानिवृत्त शिक्षक, व अन्य सेवा में गये कर्मियों-अधिकारियों, उर्दू विद्यालयों के सैकड़ों शिक्षकों, मेडिकल अवकाश में गए शिक्षकों, चुनाव कोषांग-डायट-प्रशिक्षण में प्रतिनियुक्त शिक्षकों से भी स्पष्टीकरण पूछ डाला। अपनी गलती का एहसास होने पर डीएसई ने फिर शुद्धि पत्र निकाला पर कई त्रुटियां अब तक विद्यमान हैं।
कटकमसांडी गयी निरीक्षण टीम के सदस्य बीइइओ पदमा-बरही रामसेवक दांगी, इचाक बीइइओ बंशीधर राम (दोनों सेवानिवृत्त), पदमा-बरही के अकाउंटेंट संजय राणा, बड़कागांव-केरेडारी के अकाउंटेंट सुधीर कुमार के वायरल आॅडियो में बोलते सुने जा सकते हैं कि डीएसई ने दबाव बनाकर प्रतिवेदन लिखवाया। हालांकि वायरल आॅडियो में आवाज की पुष्टि खबर मन्त्र नहीं करता, पर हर ओर इसकी चर्चा है।
क्या कहते हैं अधिकारी
जो भी कार्रवाई की गई वह नियमसम्मत है। कोई भी कार्रवाई बदले की भावना से नहीं की गई। सरकार के मानकों का पालन करना होगा अन्यथा कार्रवाई होगी। - संतोष गुप्ता, जिला शिक्षा अधीक्षक, हजारीबाग।
Subscribe to our website and get the latest updates straight to your inbox.
टीम एबीएन न्यूज़ २४ अपने सभी प्रेरणाश्रोतों का अभिनन्दन करता है। आपके सहयोग और स्नेह के लिए धन्यवाद।
© www.abnnews24.com. All Rights Reserved. Designed by Inhouse