टीम एबीएन, रांची। राष्ट्रीय युवा दिवस सह स्वामी विवेकानंद जी की जयंती पर रांची आर्यभट्ट सभागार में सांस्कृतिक राष्ट्रवाद संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
यह आयोजन रांची विश्वविद्यालय, राष्ट्रीय सेवा योजना, नेहरू युवा केन्द्र संगठन एवं राष्ट्र प्रथम के संयुक्त तत्वाधान में किया गया था। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता और पीआईएल मैन ऑफ इंडिया के नाम से चर्चित अश्विनी उपाध्याय मौजूद रहे जबकि मुख्य अतिथि के रूप में रांची के सांसद संजय सेठ मौजूद थे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता रांची विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ अजीत कुमार सिन्हा ने की। इस कार्यक्रम में सम्मानित अतिथि के रूप में वरिष्ठ पत्रकार बैजनाथ मिश्र, नेहरू युवा केंद्र की राज्य प्रमुख हनी सिन्हा, पूर्व राज्यसभा सांसद अजय मारू, रांची के पूर्व डिप्टी मेयर संजीव विजयवर्गीय और राष्ट्र प्रथम के संयोजक चंद्रकांत रायपत मौजूद रहे।
कार्यक्रम के आरंभ में सांसद संजय सेठ ने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि उठो जागो और लक्ष्य की प्राप्ति तक रुको मत और हमारा अभी एकमात्र लक्ष्य है 2047 तक विकसित भारत का निर्माण। हम सब इस पुनीत कार्य में लगे हुए हैं। विकसित भारत में संस्कृत भूमिका क्या हो इस विषय पर आज की विचार गोष्ठी आयोजित की गयी है।
इस दौरान सांसद ने कार्यक्रम में मौजूद युवाओं को विकसित भारत के लिए काम करने की शपथ दिलायी। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता श्री अश्विनी उपाध्याय ने कहा कि भारत आजाद तो हुआ परंतु आज भी हम गुलामी की मानसिकता में जी रहे हैं।
यहां बैठे युवाओं से मैं आह्वान करता हूं कि 2047 तक हम ऐसे भारत का निर्माण करें, जहां सब कुछ भारत का ही हो। जब सब कुछ भारत का ही होने की बात आती है, तो हमें प्राथमिकता के साथ प्रधानमंत्री जी के स्लोगन वोकल फॉर लोकल को अपने दैनिक जीवन में अपनाना होगा। हम जितने वोकल फॉर लोकल के लिए मुखर होंगे, हमारा भारत उतना ही समृद्ध होगा।
श्री उपाध्याय ने कहा कि अंधेरा हटे, अंधेरा छठे इसलिए जरूरी है कि हर तरफ रोशनी पहुंचे। इस रोशनी पहुंचने का काम इस देश के हर युवा को करना है। उन्होंने सभागार में बैठे युवाओं से यह भी कहा यदि आप सब मिलकर, साथ चलकर काम करें तो 2047 नहीं 2037 तक ही भारत विकसित राष्ट्र बनकर खड़ा होगा। भारत दुनिया का मार्गदर्शक बनेगा।
श्री उपाध्याय ने यह भी कहा कि हम राम राज्य की बात करते हैं। रामायण या रामचरितमानस कोई धार्मिक किताब नहीं है। यह हमारे जीवन का मार्ग बताने वाली पुस्तक है। रामराज्य की कल्पना मतलब ऐसा भारत, जहां सब कुछ न्याय पूर्ण हो। जहां कोई दु:खी नहीं हो। भारत को ऐसे ही कानून बनाने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुलामी के प्रतीक कई कानून को समाप्त किया है। बहुत जल्द अन्य ऐसे गुलामी के प्रतीक कानून को समाप्त किया जाए। ताकि भारत पुनः भारत बन सके। इस अवसर पर श्री उपाध्याय ने कहा कि भारत के संविधान ने संस्कृत और हिंदी को अनिवार्य करने की बात कही है परंतु कालांतर की सरकारों ने इसे भुला दिया।
उन्होंने कहा कि भारत को भारत बनाना है, भारत को विश्व गुरु बनाना है तो भारतीय भाषा को सबके लिए अनिवार्य करना चाहिए। कार्यक्रम के दौरान ही मुख्य वक्ता ने कहा कि युवा सोशल मीडिया का सकारात्मक उपयोग करें। अपनी तस्वीर जरूर डालें परंतु यह भी ध्यान रखें कि हम अपने विचार डालें। अपनी रचनात्मकता डालें। अपने आसपास की अच्छी चीजों को प्रसारित करें।
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