एबीएन सेंट्रल डेस्क। देश में प्याज की बढ़ती कीमत को काबू करने के लिए मोदी सरकार ने बड़ा एक्शन लिया है। सरकार ने घरेलू उपलब्धता बढ़ाने और कीमतों पर अंकुश के लिए प्याज के निर्यात पर अगले साल मार्च तक प्रतिबंध लगा दिया है।
विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) की ओर से जारी अधिसूचना में कहा गया है कि प्याज के निर्यात की नीति को 31 मार्च, 2024 तक मुक्त से प्रतिबंधित श्रेणी में डाल दिया गया है। आपको बता दें कि घरेलू मार्केट में प्याज की कीमत 60 से 65 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। इसको देखते हुए यह कदम कीमत को कम करने में मदद करेगा और लोगों को प्याज के आंसू नहीं रोने होंगे।
प्याज और टमाटर की बढ़ती कीमतों के कारण नवंबर में सामान्य शाकाहारी और मांसाहारी थाली की कीमत में मासिक आधार पर वृद्धि हुई है। क्रिसिल एमआईएंडए रिसर्च ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि प्याज और टमाटर की कीमतों में मासिक आधार पर 58 प्रतिशत तथा 35 प्रतिशत की बढ़ोतरी के कारण दाम बढ़े हैं।
त्योहारी मांग और अनियमित वर्षा के कारण खरीफ के मौसम में कम उत्पादन के कारण प्याज और टमाटर की कीमतों में वृद्धि हुई। रिपोर्ट के अनुसार, नवंबर में घर में बनी शाकाहारी और मांसाहारी थालियों की कीमत में मासिक आधार पर क्रमश: 10 प्रतिशत और पांच प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।
मासिक आधार पर मुर्गियों की कीमतों में मामूली एक से तीन प्रतिशत की गिरावट आई। मांसाहारी थाली की कीमत में मुर्गियों की कीमत का 50 प्रतिशत योगदान है। प्याज और टमाटर की कीमतों में क्रमश: 93 प्रतिशत और 15 प्रतिशत की वृद्धि के कारण शाकाहारी थाली की कीमत सालाना आधार पर नौ प्रतिशत बढ़ गई।
दालों की कीमतें सालाना आधार पर 21 प्रतिशत बढ़ी। इनका शाकाहारी थाली की कीमत में नौ प्रतिशत योगदान है। घर पर बनी भोजन की थाली की औसत लागत की गणना उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम भारत में प्रचलित कच्चे माले की कीमतों के आधार पर की जाती है।
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