आत्मिक तैयारी का समय है आगमन काल

 

कुलदीप तिर्की

एबीएन सोशल डेस्क। आगमन काल आत्मिक तैयारी का समय है  हम मनुष्य सांसरिक दृष्टिकोण से क्रिसमस की तैयारी अधिक करते हैं परंतु आत्मिक रूप से कम

एक जंगल में बारहसिंगा रहता था। उसे अपने खूबसूरत सींगों पर बहुत ही ज्यादा घमंड था। अब पानी पीते हुए अपनी परछाई देखता तो सोचता, मेरे सिंग कितने सुंदर है, पर मेरी टांगें कितनी भद्दी है। उस दिन जंगल में शिकारी आये। जब उन्होंने सुंदर सींगों वाले बरहसिंगा को देखा तो उसे पकड़ने के लिए दौड़े।

बारहसिंगा बहुत तेजी से दौड़ता हुआ शिकारियों को बहुत पीछे छोड़ दिया। तभी अचानक उसके सींग एक पेड़ की शाखाओं में अटक गये। बारहसिंगा अपने सींग निकालने के लिए भरसक मेहनत कर रहा था। 

काफी समय से जोर लगाने के बाद भी वह सींग पूरी तरह से अटके हुए थे। तब तक शिकारी और भी करीब आ जाता है। कैसे भी कर वह अपने सींग निकालने में कामयाब हो जाता है।अब सुरक्षित स्थान पर पहुंचकर वह सोचने लगा, मैं कितना बड़ा मूर्ख हूं।

आज सींग के कारण मारा जाता और पैरों के कारण आज बच पाया। हमें विश्वास है कि जब हम जन्म लिये हैं तो हमारी मृत्यु भी तय है और हमारा अंतिम लक्ष्य स्वर्ग राज्य की प्राप्ति करना है, जहां हमारा ये शरीर हमारे साथ नहीं जायेगा। 

जिसकी सुंदरता पर हम घमंड करते हैं। हमारे साथ हमारी आत्मा जायेगी। जिसको हम अनदेखा करते हैं। आगमन काल हमें उसी आध्यात्मिक तैयारी का सुअवसर देता है जो हमें स्वर्ग तक लेकर जायेगी। (लेखक रांची महाधर्मप्रान्तीय यूथ कोर्डिनेटर हैं।)

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