एबीएन सोशल डेस्क। विश्व हिंदू परिषद झारखंड सेवा विभाग के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि देवउठनी एकादशी हर वर्ष कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती है। इस बार 23 नवंबर को देव उठनी एकादशी है। इस दिन जगत के पालनहार श्री हरि भगवान विष्णु चार माह के बाद योग निद्रा से जागृत होते हैं।
धार्मिक मान्यता है कि भगवान विष्णु देवशयनी एकादशी तिथि पर क्षीरसागर में शयन करने चले जाते हैं और देवउठनी एकादशी तिथि पर जागृत होते हैं। देवउठनी के बाद सभी मांगलिक कार्य शुरू हो जाते हैं। देवउठनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु घोर निद्रा से जागते हैं इस दिन तुलसी विवाह भी किया जाता है।
देव उठानी एकादशी के दिन भगवान विष्णु एवं तुलसी माता की पूजा अर्चना की जाती है। भगवान विष्णु की पूजा करने से जीवन में सुख समृद्धि और मंगल का आगमन होता है। साधक की सभी मनोकामनाएं पूरी होती है। एवं मनवांछित फल की प्राप्ति होती है, देवउठनी एकादशी सबसे महत्वपूर्ण और पवित्र एकादशियों में से एक मानी जाती है।
इसे देव प्रबोधिनी एकादशी और देवुत्थान एकादशी भी कहा जाता है। इस शुभ दिन पर भक्त व्रत रखते हैं और बड़ी भक्ति के साथ भगवान विष्णु की पूजा करते हैं। कार्तिक महीना का अपना धार्मिक महत्व है क्योंकि यह पूरा महीना भगवान विष्णु पर समर्पित है इस दिन भगवान विष्णु 4 महीने के बाद जागेंगे जिसे चातुर्मास के नाम से भी जाना जाता है।
इस दिन से सभी मांगलिक एवं शुभ कार्य शुरू हो जाते हैं। इस दिन शाम के समय तुलसी के सामने शुद्ध घी का दीपक अवश्य जलाना चाहिए और तुलसी के पौधे की पूजा करनी चाहिए। इस दिन गौ सेवा करने से भी पुण्य मिलता है।
देवउठनी एकादशी की तिथि का आरंभ 22 नवंबर को रात में 11 बजकर 3 मिनट पर होगा और समापन 23 नवंबर को रात में 9 बजकर 1 मिनट पर होगा। पारण का समय 24 नवंबर को सुबह 6 बजे से सुबह 8 बजकर 13 मिनट तक के बीच है इसलिए देवउठनी एकादशी का व्रत 23 नवंबर को है।
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