मंदिरों पर सरकारी नियंत्रण को लेकर जताया विरोध, हस्तक्षेप करने की मांग
टीम एबीएन, रांची। झारखंड हिंदू धार्मिक ट्रस्ट बोर्ड अधिनियम को समाप्त करने और हिंदू देवी देवताओं के मंदिर पर राज्य के नियंत्रण से मुक्त करने के संबंध में विश्व हिंदू परिषद का एक प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन से राजभवन में मुलाकात की।
विहिप झारखंड प्रांत के प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से मिलकर कहा कि पूरे देश की तरह हिंदू धार्मिक के ट्रस्ट बोर्ड अधिनियम को समाप्त करने एवं हिंदू देवी देवताओं के मंदिरों को झारखंड राज्य हिंदू धार्मिक ट्रस्ट बोर्ड अधिनियम के प्रावधानों के तहत हिंदू धार्मिक ट्रस्ट बोर्ड के नाम पर राज्य सरकार के नियंत्रण एवं आधिपत्य में है, अविलंब समाप्त होना चाहिए।
प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि हिंदुओं की धार्मिक संस्थानों पर राज्य सरकार का नियंत्रण 1947 से पहले की अंग्रेजी शासन की गुलामी के तहत ही है। जबकि 1947 में स्वतंत्रता के बाद हिंदू धर्म को छोड़कर अन्य सभी धार्मिक संस्थाएं बिना सरकार के हस्तक्षेप के अपनी संस्था को स्थापित करने और चलने के लिए पूर्णत: स्वतंत्र है।
प्रतिनिधिमंडल ने ज्ञापन सौंपते हुए कहा झारखंड हिंदू धार्मिक न्यास बोर्ड अधिनियम के विरुद्ध महत्वपूर्ण बिंदु इस प्रकार है :
- अनुच्छेद 25 और 26 भारत का संविधान हिंदू धर्म और अन्य धर्म के बीच अंतर नहीं करता है और ऐसे में राज्य द्वारा हिंदू धर्म को अन्य धर्म से अलग मानने का कोई औचित्य नहीं है।
- हिंदू धर्म को छोड़कर बाकी सभी धर्म अपनी धार्मिक संस्थाएं स्थापित करने और चलने के लिए स्वतंत्र हैं।
- सत्ता में रहने वाले राजनीतिक दल द्वारा विभिन्न मंदिरों एवं ट्रस्ट समितियों के प्रबंधन के लिए राजनिष्ठा रखने वाले व्यक्तियों को अध्यक्ष और सदस्य नियुक्त किया जा रहा है।
- यह सोचना अपने आप में गलत होगा कि राज्य की राजधानी में बैठे एक निकाय को मंदिरों के मामले में मंदिरों की व्यक्तिगत न्यास समितियां से बेहतर जानकारी और समझ होगी।
- यह भी गलत है कि किसी भी आवेदन पर बोर्ड या जिला न्यायाधीश न्यास समितियों के लिए बेहतर व्यक्तियों को नियुक्त कर सकता है।
- वर्तमान व्यवस्था में अन्य धर्म से संबंधित व्यक्ति/ अधिकारी भी किसी न किसी मंदिर के प्रबंधन में प्रशासक बन जाते हैं।
- यह बिल्कुल बेतुका है कि केवल हिंदू ही उनके द्वारा स्थापित संस्थाओं में अपना कामकाज नहीं संभाल सकेंगे।
- यहां यह उल्लेख करना प्रासंगिक होगा कि सरकारें धार्मिक निकायों को कोई वित्तीय सहायता नहीं देती है, खासकर हिंदू धर्म के मामले में। हिंदू संस्थाओं के मामलों में सरकार जबरन हस्तक्षेप करती है और उसके इस तरह के हस्तक्षेप के लिए शुल्क लेना प्रारंभ कर देती है।
- यहां यह बताना प्रासंगिक होगा कि प्रारंभ में ऐसे कानून ब्रिटिश सरकार द्वारा केवल कानून के नाम पर दान हड़पकर अपनी खजाना भरने के लिए बनाये गये थे। लेकिन आजादी के बाद भी वही औपनिवेशिक कानून हिंदुओं पर थोपा जा रहा है।
- झारखंड राज्य हिंदू धार्मिक ट्रस्ट बोर्ड अधिनियम एक विशेष राजनीतिक दल के सदस्यों को खुश करने का एक उपकरण मात्र है जो केवल हिंदू धार्मिक संस्थाओं में अराजकता पैदा करती है।
- पूरे देश में ऐसा सबूत/ मिसाल नहीं है जहां किसी एक या दूसरे राज्य के धार्मिक बोर्ड में किसी मामले के लिए कोई अच्छा कार्य किया हो बल्कि ऐसा स्पष्ट उदाहरण है जहां उन्होंने मंदिर के मामले में समस्या उत्पन्न किया है।
- यदि हिंदू समुदाय के व्यक्तियों को अपने धार्मिक संस्थाओं के संचालन के मामले में स्वतंत्रता नहीं है तो यह बिल्कुल असंवैधानिक है।
- कोई भी अन्य निजी संस्थान सरकार के अपने प्रतिबंधात्मक नियंत्रण में नहीं है। देश के अन्य निजी संस्थान केवल देश के सामान्य कानून के अनुसार भी कार्यरत है। हिंदू धार्मिक संस्थाओं के लिए भी ऐसा ही होना चाहिए।
- यह धारणा की हिंदू धर्म को हिंदू संस्था के मामले को संचालन या नियंत्रण करने के लिए एक संरक्षक निकाय की आवश्यकता है, जो हिंदू समुदाय के खिलाफ एक साजिश है, जो पूरे सामुदायिक हो अपमानित कर रही है।
- सरकार का उद्देश्य सिर्फ हिंदू संस्थानों की संसाधनों को लूटने के लिए उसके संरक्षक बनने का अभिनय करने जैसा है।
प्रतिनिधि मंडल ने कहा उपरोक्त तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए इस औपनिवेशिक कानून को खत्म करना आवश्यक है और इस तरह हिंदू धार्मिक संस्थाओं को नियंत्रण से मुक्त किया जाना चाहिए। हिंदू समुदाय के मन में अपने संस्थानों के प्रति स्वतंत्रता की भावना जागृत करने की आवश्यकता है।
राज्यपाल के माध्यम से राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से आग्रह किया गया कि कृपया इस गंभीर विषय पर संज्ञान लेते हुए कार्यकारी तंत्र को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश देने की कृपा करें।
महामहिम से मिलने के लिए प्रतिनिधि मंडल में चंद्रकांत रायपत प्रांत उपाध्यक्ष विश्व हिंदू परिषद, सुनील गुप्ता प्रांत उपाध्यक्ष विश्व हिंदू परिषद, डॉ वीरेंद्र साहू प्रांत मंत्री विश्व हिंदू परिषद, कैलाश केसरी अध्यक्ष रांची महानगर, मि मिथिलेश्वर मिश्र प्रांत प्रमुख सामाजिक समरसता शामिल थे। उक्त जानकारी विश्व हिंदू परिषद के प्रांत प्रचार प्रसार सहप्रमुख प्रकाश रंजन (9334433338) ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।