हाईकोर्ट की पहल पर अब होगा रजरप्पा और टैगोर हिल का कायाकल्प

 

  • रवीन्द्रनाथ टैगोर के परिवार से जुड़े रजरप्पा मंदिर का होगा सौंदर्यीकरण, हाईकोर्ट ने दिया आदेश

टीम एबीएन, रामगढ़/ रांची। झारखंड में स्थित सिद्धपीठ रजरप्पा मंदिर प्रसिद्ध स्थानों में एक है। यहां बड़े से बड़े नेता और अभिनेना अपना मत्था टेकने के लिए यहां आते हैं। यह मंदिर नोबेल पुरस्कार विजेता कवि रवींद्रनाथ टैगोर के परिवार से जुड़ा है। 

अब झारखंड हाईकोर्ट ने सरकार से रजरप्पा मंदिर और टैगोर हिल का सौंदर्यीकरण करने का निर्देश दिया है। झारखंड हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश संजय कुमार मिश्रा की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई की। 

जिसमें पीठ ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को मोरादाबादी क्षेत्र में 300 मीटर ऊंची पहाड़ी के ऊपर की संरचनाओं को प्राचीन स्मारक के रूप में स्वीकार नहीं करने के अपने फैसले पर पुनर्विचार करने का भी आदेश दिया।

एक अन्य जनहित याचिका में, अदालत ने सरकार को रामगढ़ जिले के रजरप्पा में 10 महाविद्याओं में से शुमार प्रतिष्ठित मां छिन्नमस्तिका मंदिर के उचित रखरखाव का भी आदेश दिया। 

सोसाइटी फॉर प्रिजर्वेशन आफ ट्राइबल कल्चर एंड नेचुरल ब्यूटी ने जनहित याचिका दायर कर हाईकोर्ट से एएसआई को टैगोर हिल पर संरचनाओं को प्राचीन स्मारकों के रूप में संरक्षित रखने का निर्देश देने का अनुरोध किया था।

एएसआई ने पहले ठुकरा दिया था सौंदर्यीकरण का प्रस्ताव

एएसआई ने यह कहते हुए प्रस्ताव ठुकरा दिया था कि संरचनाएं 100 साल से अधिक पुरानी नहीं हैं और प्राचीन स्मारक की श्रेणी में आने के योग्य नहीं हैं। रवींद्रनाथ के बड़े भाई ज्योतिरींद्रनाथ टैगोर लेखक, समाज सुधारक, संगीतकार और चित्रकार थे। उन्होंने बचपन में रवीन्द्रनाथ को उनके व्यक्तित्व को आकार देने के लिए कई तरह से प्रेरित किया। 

ज्योतिरींद्रनाथ ने जगह खरीदी और एक घर तथा एक ब्रह्म मंदिर (ध्यान लगाने के लिए एक संरचना) का निर्माण किया। याचिकाकर्ता ने कहा कि इसी घर में ज्योतिरिंद्रनाथ ने बाल गंगाधर तिलक की गीता रहस्य का मराठी से बंगाली में अनुवाद किया था और याचिकाकर्ता ने कहा कि बाद में इसके ऊपर बने शांति धाम नाम के घर का उद्घाटन 1910 में किया गया।

चार मार्च, 1925 को ज्योतिरींद्रनाथ का वहीं निधन हो गया। हाल में पारित आदेश में झारखंड हाईकोर्ट ने एएसआई को पहाड़ी के ऊपर की संरचनाओं को प्राचीन स्मारक के रूप में स्वीकार नहीं करने के अपने फैसले पर पुनर्विचार करने को कहा।

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