एबीएन सोशल डेस्क। हिंदू धर्म में एकादशी तिथि को विशेष रूप से फलदायी माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन जो व्यक्ति भी व्रत और उपवास करता है उसकी समस्त मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। वहीं शास्त्रों में लिखे नियमों के अनुसार इस दिन चावल खाने की मनाही होती है। मान्यता यह भी है कि जो व्यक्ति इस दिन चावल खाता है उसे विष्णु पूजन का पूर्ण फल नहीं मिलता है।
यहीं नहीं चावल का उपभोग करने वाला पाप का भागी बनता है। दरअसल शास्त्रों में ऐसी न जानें कितनी बातों का जिक्र है जिनका पता लगा पाना मुश्किल है और ज्योतिष एक्सपर्ट उन बातों की सच्चाई के बारे में बता पाते हैं।
शास्त्रों की मानें तो जो व्यक्ति इस दिन चावल का एक भी दाना खाता है उसे मुक्ति नहीं मिलती है और वो अगले जन्म में जीव का रूप धारण करता है। यदि हम शास्त्रों और ज्योतिष की बात करें तो इस दिन चावल खाने से व्यक्ति के लिए मुक्ति के द्वार बंद हो जाते हैं।
यहीं नहीं चावल खाना इस दिन पाप के समान माना जाता है और यदि आपके घर में कोई भी व्यक्ति एकादशी का उपवास करता है तो चावल के साथ तामसिक भोजन खाना भी वर्जित होता है।
शास्त्रों में प्रचलित कथा के अनुसार प्राचीन काल में महर्षि मेधा ने एक बार यज्ञ में आये हुए एक भिखारी का अपमान कर दिया जिसकी वजह से माता दुर्गा अत्यंत नाराज हो गयी। माता को मनाने और प्रायश्चित के लिए महर्षि मेधा ने अपना शरीर त्याग दिया।
शरीर त्यागने के बाद उसके अंश धरती में समा गये और उस प्रायश्चित से प्रसन्न होकर माता दुर्गा ने महर्षि को एक आशीष दिया कि उनके अंग भविष्य में अन्न के रूप में धरती से उगेंगे।
महर्षि के पृथ्वी पर दबे हुए अंश चावल और जौ अन्न के रूप में प्रकट हुए। उस दिन एकादशी तिथि थी और तभी से चावल और जौ को जीव माना गया। यही वजह है कि एकादशी तिथि को चावल खाना जीव का उपभोग करने के समान माना जाता है और इस दिन चावल खाने की मनाही होती है।
पौराणिक कथा की मानें तो एकादशी तिथि के दिन भगवान विष्णु का व्रत उपवास किया जाता है और जो व्यक्ति इस दिन चावल खाता है उसे मांसाहार खाने के समान माना जाता है। ऐसे व्यक्ति की कोई भी पूजा स्वीकार्य नहीं होती है।
एकादशी के दिन चावल न खाने के वैज्ञानिक कारणों की बात की जाए तो चूंकि चावल में पानी की मात्रा अधिक होती है और पानी का जुड़ाव चन्द्रमा से होता है। चंद्रमा का प्रभाव पानी में अधिक होता है और व्यक्ति के शरीर का 70 प्रतिशत हिस्सा भी पानी ही होता है।
चंद्रमा मस्तिष्क और हृदय को प्रभावित करता है चूंकि इसे मन का कारक माना जाता है। चंद्रमा के प्रभाव की वजह से ही एकादशी के दिन चावल खाने से व्यक्ति को मानसिक और हृदय संबंधी बीमारियां हो सकती हैं।
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