पत्रकार डॉ मुजफ्फर हुसैन की दो शोधपरक पुस्तकों का लोकार्पण

 

टीम एबीएन, रांची। डॉ मुजफ्फर हुसैन की दो शोधपरक पुस्तकों का लोकार्पण रविवार को प्रेस क्लब में किया गया। पुस्तक का लोकार्पण मुख्य अतिथि रांची विश्वविद्यालय, रांची के कुलपति डॉ अजित कुमार सिन्हा, विशिष्ट अतिथि खाद्य आपूर्ति आयोग की सदस्य शबनम परवीन, विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ पत्रकार शंभुनाथ चौधरी और विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ पत्रकार उदय चौहान ने संयुक्त रूप से किया। 

मौके पर मुख्य अतिथि रांची विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ अजित कुमार सिन्हा ने कहा कि डॉ मुजफ्फर हुसैन की झारखंड के मुसलमान नामक पुस्तक एक ऐतिहासिक दस्तावेज है और इसका महत्व दस्तावेज के अनुसार बाइबल के समान है। ऐसी पुस्तक अब तक प्रकाशित नहीं हुई है। पुस्तक में जिन सामग्रियों का उपयोग किया गया है, अद्भुत है। इससे लोग काफी लाभान्वित होंगे। 

उन्होेंने कहा कि डॉक्युमेंटेशन के लिए लिखना बहुत जरूरी है। लिखित सामग्री आने वाली पीढी के लिए ज्ञानवर्द्धक और मार्गदर्शक सिद्ध होती है। दूसरी पुस्तक झारखंड की मुस्लिम विभूतियां भी दस्तावेज के अनुसार काफी उपयोगी हैं। उन्होंने कहा कि आज डॉक्यूमेंटेशन की बहुत जरूरत है। इसके लिए उन्होंने हर संभव मदद करने का आश्वासन दिया। 

इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि खाद्य आपूर्ति आयोग की सदस्य शबनम परवीन, वरिष्ठ पत्रकार शंभुनाथ चौधरी और उदयनाथ चौहान ने भी डॉ मुजफ्फर हुसैन के लेखनी की सराहना करते हुए भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों को पुष्पगुच्छ और अंगवस्त्र प्रदान कर किया गया। 

कार्यक्रम का संचालन डॉ कोरनेलियुस मिंज और परवेज कुरैशी ने किया। मौके पर डॉ तनवीर आलम, इम्तियाज अली, राफिया नाज, बॉलीवुड एक्टर देवेश खान, अशोक गहलोत, आनंद  जालान, नसीम अहमद, नौशाद आलम, अकीलुर रहमान, निहाल अहमद, साबीर हुसैन, संजय बोस, सुहैब आलम, निरंजन कुमार वर्मा, महफुज आलम, एमएस भारती, अमन अहमद, आदिल रसीद, आरिफ हुसैन समेत कई गणमान्य उपस्थित थे।

पुस्तक परिचय

दोनों पुस्तकें शोध पर आधारित और हार्डबोंड में हैं। प्रथम पुस्तक कुल 208 एवं द्वितीय पुस्तक कुल 184 पृष्ठ की है। दोनों पुस्तकों का प्रकाशन झारखंड झरोखा, रांची के द्वारा किया गया है। इनमें झारखंड के मुसलमान नामक पुस्तक का मूल्य 700 रुपये एवं झारखंड की मुस्लिम विभूतियां नामक पुस्तक का मूल्य 600 रुपये है। पुस्तक विश्लेषणात्मक एवं वर्णनात्मक प्रकृति का है। इसे लिखने में सर्वेक्षण एवं मूल्यांकन पद्धति का सहारा लिया गया है। प्राथमिक एवं द्वितीय स्त्रोतों के साथ-साथ आवश्यकतानुसार डाटा का भी संकलन किया गया है। 

प्रथम पुस्तक झारखंड के मुसलमान में कुल 33 अध्याय हैं जिसमें झारखंड के भौगोलिक परिवेश के साथ प्रमुख आंदोलन और मुस्लिम उपजातियों का विस्तृत वर्णन है। वहीं, द्वितीय पुस्तक झारखंड की मुस्लिम विभूतियां में कुल 59 अध्याय हैं, जिसमें कुल 50 विभूतियों का वर्णन है। दोनों पुस्तकें मुस्लिम समाज एवं सरकार के साथ-साथ शोध विद्यार्थियों, प्रबुद्धजनों, राजनेताओं, समाजसेवियों एवं कानून के जानकारों के लिए काफी उपयोगी है। विशेषकर मुस्लिम उपजातियों एवं मुस्लिम विभूतियों की जानकारी उल्लेखनीय है। पुस्तकों में जिन तथ्यों को उजागर किया गया है, इससे पूर्व अब तक उन विषयों पर शोध सामने नहीं आ सका है।

लेखक परिचय

डॉ मुजफ्फर हुसैन युवा लेखक एवं इतिहासकार के रूप में स्थापित हैं और डोरंडा महाविद्यालय के इंटरमीडिएट संकाय के इतिहास विषय में अतिथि शिक्षक के रूप में वर्ष 2017 से कार्यरत हैं। उनका जन्म 8 जून 1982 ई को सामान्य परिवार में हुआ। पिता सेंट्रल कोलफिल्ड्स लिमिटेड में कार्यरत थे और मां गृहणी रही। 

उनकी प्रारंभिक और मैट्रिक तक की शिक्षा रामगढ़ जिले से हुई। इंटर और स्नातक की शिक्षा गोस्सनर कॉलेज रांची से पूरी की। इसके बाद दो वर्षीय पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन ह्यूमन राईट्स भारतीय मानवाधिकार संस्थान नई दिल्ली से पूरा किया। स्नातकोत्तर की शिक्षा रांची कॉलेज राची से पूरी की। इसके बाद वह रांची विश्वविद्यालय रांची के मानवाधिकार विभाग में अध्यापन करने लगे। 

कुछ महीने वहां अध्यापन करने के बाद पत्रकारिता से जुड़ गये और भारतीय विद्या भवन मुंबई से स्थानीय हिंदी दैनिक प्रभात खबर के माध्यम से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन जर्नलिज्म की शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद विभिन्न स्थानीय समाचार पत्रों में कार्य करते हुए लगभग 15 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। वर्तमान में वह हिंदी दैनिक प्रभात मन्त्र से जुड़े हैं और वरीय उप संपादक के रूप में कार्यरत हैं। 

इस बीच उन्होंने अपनी एलएलबी, बीएड और पीएचडी की शिक्षा पूरी की और शोध पर कार्य करने लगे। अब तक उनकी शोध पर आधारित कुल छह किताबें प्रकाशित हुई हैं जो काफी चर्चित रही हैं। अपने शोध पर उन्होंने बांस की सर्वव्यापी खेती, महली जनजाति समेत ग्रामीणों के सर्वांगीण विकास, उनकी शिक्षा, कारोबार, कल्याणकारी योजना आदि पर भारत सरकार का ध्यान आकृष्ट कराया है। 

मुसलमानों में शिक्षा, संस्कार, अल्पसंख्यक संस्थान की भूमिका, राजनीतिक, सामाजिक एवं आर्थिक जीवन, मुस्लिम कल्याणकारी योजना, शैक्षणिक संस्थान, मुस्लिम उपजातियां, लुप्त मुस्लिम उपजातियां आदि पर उनके शोध उल्लेखनीय हैं। वर्तमान में उनकी दो पुस्तक झारखंड के मुसलमान और झारखंड की मुस्लिम विभूतियां चर्चा में है और लोग इसे पढ़ने को लेकर काफी उत्साहित हैं। 

इसके अतिरिक्त विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं में इनके आलेख प्रकाशित होते रहे हैं। वहीं, आकाशवाणी के रांची केंद्र से विभिन्न विषयों पर इनकी वार्ताएं समय-समय पर प्रसारित होती रही हैं। इन्हें कई राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं द्वारा भी पुरस्कृत और सम्मानित किया जा चुका है। 

इनमें इंटरनेशनल क्राइम फाइटर्स एंड अलाइज द्वारा दिया गया पुरस्कार, वैक पीपुल काउंसिल के अंतर्गत कार्यरत वैक बूक आफ रिकार्ड्स द्वारा प्रदान किया गया पुरस्कार एवं इंटरनेशनल स्कूल आफ आर्ट्स एंड डिजाइन ने दिया। शिक्षाविद् के रूप में सम्मान उल्लेखनीय है।

वहीं, पिछले वर्ष 2022 में डॉ मुजफ्फर हुसैन को भारतीय दलित साहित्य अकादमी, नई दिल्ली द्वारा डॉ अंबेडकर फेलोशिप नेशनल अवार्ड भी प्रदान किया गया है। गौरतलब हो कि इससे पूर्व डॉ हुसैन की कुल चार किताबें (1. महली जनजाति का राजनीतिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक जीवन, 2. मुसलमानों का सामाजिक, राजनीतिक एवं आर्थिक जीवन, 3. मुस्लिम कल्याणकारी योजना एवं उनके शैक्षणिक संस्थान एवं 4. मुसलमानों में शिक्षा, संस्कार एवं अल्पसंख्यक संस्थान की भूमिका) प्रकाशित हैं और काफी प्रसिद्ध हैं।

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