झारखंड : मुख्यमंत्री मेधा छात्रवृत्ति योजना के प्रति उदासीन हैं विद्यार्थी

 

टीम एबीएन, रांची। झारखंड में मुख्यमंत्री मेधा छात्रवृत्ति की शुरुआत की गयी है। मुख्यमंत्री हेमंत सरकार ने इसके जरिए वैसे छात्र जो आर्थिक तंगी की वजह से पढाई छोड़ देते हैं, उन्हें स्कॉलरशिप देने की कोशिश की है। 

इस योजना के तहत 9वीं से 12वीं तक के चयनित बच्चों को साल में 12,000 रुपये मिलेंगे। मगर विडंबना यह है कि शिक्षा विभाग के द्वारा शुरू की गई इस स्कॉलरशिप प्रोग्राम का लाभ लेने में झारखंड के बच्चे उदासीन हैं। 

मुख्यमंत्री मेधा छात्रवृत्ति योजना के तहत स्कॉलरशिप पाने के लिए झारखंड एकेडमिक काउंसिल चयन परीक्षा आयोजित करती है। शिक्षा विभाग ने इस साल के चयन परीक्षा में राज्यभर के सरकारी स्कूलों के एक लाख बच्चों को शामिल कराने के लिए रजिस्ट्रेशन का लक्ष्य रखा था। 

मगर जैक के द्वारा तीन-तीन बार आवेदन भरने की तारीख बढ़ाये जाने के बावजूद भी लक्ष्य के अनुरूप रजिस्ट्रेशन नहीं हो सका।

जागरूकता की कमी बनी बड़ी वजह-शिक्षा सचिव

जैक के द्वारा स्कॉलरशिप परीक्षा के लिए ऑनलाइन आवेदन मांगे गये थे। जिसे भरने की अंतिम तिथि शुरुआत में 20 जून रखी गयी थी। बाद में इसे 30 जून कर दिया गया और उसके बाद 15 जुलाई तक आवेदन की तारीख बढ़ाई गयी। इसके बावजूद ऑनलाइन आवेदन भरने में झारखंड के विद्यार्थियों ने उदासीनता दिखायी। 

जिस वजह से लक्ष्य के अनुरूप आवेदन नहीं जमा हो सके। इससे जैक में रजिस्ट्रेशन के अनुसार स्कॉलरशिप परीक्षा के लिए करीब 60,000 विद्यार्थियों का रजिस्ट्रेशन ही प्राप्त हुआ है। शिक्षा सचिव के रवि कुमार भी मानते हैं कि स्कॉलरशिप प्रोग्राम के लिए छात्रों की उदासीनता के पीछे बड़ी वजह जागरूकता की कमी है। 

जिस वजह से तीन बार आवेदन की तारीख बढ़ाने के बावजूद 60,000 विद्यार्थियों का रजिस्ट्रेशन ही हुआ है। मुख्यमंत्री मेधा छात्रवृत्ति योजना के तहत स्कॉलरशिप परीक्षा के लिए जैक द्वारा मांगे गये ऑनलाइन आवेदन में जटिलता की वजह से विद्यार्थी आवेदन करने में पीछे रह गये। 

परीक्षा में शामिल होने के लिए आधार कार्ड, निवास प्रमाण पत्र, शैक्षणिक योग्यता, बैंक खाता डिटेल, पासपोर्ट साइज फोटो, जाति प्रमाण पत्र और मोबाइल नंबर का होना आवश्यक माना गया था। इन सभी दस्तावेजों को ऑनलाइन अपलोड करने के लिए कहा गया था।

जगरनाथपुर सरकारी स्कूल के प्राचार्य राजेश रंजन कहते हैं कि स्कॉलरशिप परीक्षा में कम रजिस्ट्रेशन के लिए विद्यार्थियों की उदासीनता के बजाय जटिल प्रक्रिया को कारण माना जायेगा। जिस वजह से विद्यार्थी आवेदन नहीं कर सके। आधार कार्ड और मूल नाम या जन्मतिथि में किसी भी तरह का अंतर होने से आवेदन पूरा नहीं हो सकता। 

इसी तरह शिक्षक ओमप्रकाश सिन्हा कहते हैं कि जागरूकता की कमी के साथ-साथ डाक्यूमेंट्स को लेकर काफी परेशानी छात्रों को उठानी पड़ी है। जिसके कारण इच्छा रहते हुए भी विद्यार्थी फॉर्म नहीं भर सके। पहले आम तौर पर ऑफलाइन लोग फॉर्म भरते थे। मगर इस बार ऑनलाइन होने की वजह से लोग इसे समझ नहीं पा रहे हैं।

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