टीम एबीएन, रांची। चंद्रयान-3 शुक्रवार को जैसे ही लॉन्च हुआ, झारखंड के लोगों का सीना गर्व से चौड़ा हो गया। और हो भी क्यों नहीं, क्योंकि जिस लॉन्चिंग पैड से चंद्रयान-3 ने उड़ान भरी, उसका डिजाइन रांची स्थित मेकॉन कंपनी ने किया है और इसका निर्माण हैवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन (एचईसी) में किया गया है।
एचईसी ने इसरो को पिछले वर्ष ही लॉन्चिंग पैड सहित अन्य उपकरणों की आपूर्ति की थी। एचईसी के पीआरओ ने कहा-एचईसी ने एक बार फिर अंतरिक्ष के क्षेत्र में अपनी योग्यता साबित कर दी है।
एचईसी मजदूर यूनियन के महासचिव रमाशंकर प्रसाद ने कहा कि एचईसी अभी गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा है। यहां के कर्मचारियों को 14 महीने से और अधिकारियों को 18 महीने से वेतन नहीं मिला है। कंपनी का 80 फीसदी काम बंद है। हालांकि एचईसी के पास करीब 1000 करोड़ का वर्कऑर्डर है।
लेकिन कार्यशील पूंजी न होने के कारण नये काम के लिए कच्चा माल तक उपलब्ध नहीं है। वेतन नहीं मिलने के कारण पिछले तीन साल में 100 से ज्यादा इंजीनियरों और करीब 500 कामगारों ने काम छोड़ दिया है। उन्हें बार-बार आश्वासन तो मिलता है, लेकिन वेतन नहीं।
वेतन की मांग को लेकर कर्मचारी पिछले चार साल से आंदोलन कर रहे हैं। कई बार प्लांट बंद कराया और उत्पादन तक ठप कराया। लेकिन चंद्रयान-3 के प्रोजेक्ट पर काम कर रहे कर्मचारियों ने कभी काम करने से मना नहीं किया। उनका कहना था कि वे देशभक्ति से कभी समझौता नहीं कर सकते।
चंद्रयान-3 राष्ट्र के गौरव से जुड़ा है, इसलिए खाली पेट रहकर भी इस प्रोजेक्ट को समय पर पूरा करेंगे और हुआ भी ऐसा ही। समय से पहले ही इन्होंने चंद्रयान-3 से जुड़े सभी उपकरणों की आपूर्ति कर दी।
एचईसी में अभी 550 अधिकारी और 650 स्थाई कर्मचारी हैं। वहीं 2300 ठेका श्रमिक काम कर रहे हैं। सभी आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। 400 और 200 टन क्षमता वाली ईओटी और पावर क्रेन। 2.8 मीटर वाले रिंग की चार्जिंग हैवी ड्यूटी सीएनसी मशीन। एसीपीआईपी होरिजेंटल स्लाइडिंग डोर।
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