विकास योजनाओं पर पैसे खर्च करने में फिर पिछड़ा झारखंड

 

  • पंचायती राज संस्थाएं नहीं खर्च कर सकीं 1040 करोड़, केंद्र ने रोकी इस साल की ग्रांट

टीम एबीएन, रांची। झारखंड में पंचायती राज संस्थाएं विकास के लिए केंद्र से मिलने वाली राशि खर्च करने में फिसड्डी हैं। पिछले साल पंद्रहवें वित्त आयोग से मिली राशि में से तकरीबन 1,040 करोड़ पड़े रह गये। नतीजा यह हुआ कि आयोग ने इस साल से लिए ग्रांट रोक दी है।

झारखंड में त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था में जिला स्तर पर जिला परिषद, प्रखंड स्तर पर पंचायत समिति और सबसे निचले स्तर पर ग्राम पंचायतें कार्यरत हैं। विकास योजनाओं के लिए तीनों स्तर पर प्रति वर्ष राशि आवंटित की जाती है।

सरकार के आंकड़ों के अनुसार, बीते वित्तीय वर्ष में जिला परिषदों ने कुल ग्रांट का मात्र 11 प्रतिशत, पंचायत समितियों ने 17 प्रतिशत और ग्राम पंचायतों ने 27 प्रतिशत ही खर्च किया है। यानी जिला परिषदों के मुकाबले पंचायत समितियों और ग्राम पंचायतों में राशि के उपयोग की स्थिति थोड़ी बेहतर है। 

जिला परिषदों के पास 171.54 करोड़ रुपये, पंचायत समितियों के पास 183.02 करोड़ रुपये तथा ग्राम पंचायतों के पास 685.43 करोड़ रुपये की राशि का उपयोग नहीं हो पाया है।

राशि खर्च करने के मामले में सबसे खराब स्थिति रामगढ़ जिला परिषद की है। रामगढ़ जिला परिषद ने 4.42 करोड़ रुपये में एक पैसा भी खर्च नहीं किया है। इसी तरह गढ़वा जिला परिषद ने एक, हजारीबाग जिला परिषद ने दो और लोहरदगा जिला परिषद ने चार प्रतिशत राशि खर्च की है।

लातेहार, दुमका और पूर्वी सिंहभूम की जिला परिषदें पांच-पांच फीसदी राशि खर्च कर पायीं। हालांकि, पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधियों का कहना है कि पिछले साल चुनाव कराये जाने में विलंब की वजह से योजनाएं बनाने, पारित करने और खर्च करने का काम प्रभावित हुआ।

Newsletter

Subscribe to our website and get the latest updates straight to your inbox.

We do not share your information.

abnnews24

सच तो सामने आकर रहेगा

टीम एबीएन न्यूज़ २४ अपने सभी प्रेरणाश्रोतों का अभिनन्दन करता है। आपके सहयोग और स्नेह के लिए धन्यवाद।

© www.abnnews24.com. All Rights Reserved. Designed by Inhouse