टीम एबीएन, रांची। सोमवार को सरस्वती शिशु विद्या मंदिर धुर्वा के केशव सभागार में शिशु विकास मंदिर समिति झारखंड धुर्वा रांची द्वारा आयोजित अरुणोदय पत्रिका लोकार्पण सह आचार्य सम्मान समारोह- 2023 हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि आदित्य प्रसाद साहू, सांसद राज्यसभा, झारखंड ने दीप प्रज्ज्वलन एवं पुष्पार्चन के साथ किया।
मुख्य एवं अन्य मंचासीन अतिथियों का परिचय विद्यालय प्रबंधन के मंत्री अखिलेश्वर नाथ मिश्र ने कराया। उन्होंने कार्यक्रम की भूमिका प्रस्तुत करते हुए कहा कि प्रतिवर्ष गुरु पूर्णिमा के अवसर पर अरुणोदय पत्रिका एवं आचार्य सम्मान समारोह होता आ रहा है। आज का कार्यक्रम इसी की एक कड़ी है।
सन 1969 में 10 विद्यार्थी से शुरू हुआ यह विद्यालय आज 2500 विद्यार्थियों को शिक्षा प्रदान कर रहा है। विद्यालय मध्यम स्तर के बच्चों का नामांकन लेकर उन्हें उत्कृष्ट अंक दिलाने वाले भैया बहनों के आचार्यों का सम्मान गुरु पूर्णिमा के अवसर पर करता रहा है।
मौके पर विद्यालय की वार्षिक पत्रिका अरुणोदय एकादश सर्ग का लोकार्पण माननीय मुख्य अतिथि एवं अन्य मंचासीन अतिथियों ने किया। पत्रिका की संपादक बहन रिया कक्षा द्वादश ने अपने उद्बोधन में कहा कि अरुणोदय पत्रिका का एकादश सर्ग विद्यालय के भैया-बहनों की रचनात्मकता की प्रस्तुति है।
उन्होंने एकादश सर्ग को मील का पत्थर बताते हुए कहा कि पत्रिका में कविताएं, कहानियां, लेख एवं चित्र भविष्य का चित्रण करते हुए मिलेगा। पत्रिका भारत के स्वतंत्रता संग्राम में झारखंड का योगदान पर आधारित है। इस पत्रिका में झारखंड के वीर सपूतों की स्वतंत्रता आंदोलन में भूमिका के दर्शन होंगे।
उन्होंने आशा व्यक्त की है कि पत्रिका भैया-बहनों में देश प्रेम का भाव जगाने में सक्षम होगी। आचार्य सम्मान समारोह का शुभारंभ विद्यालय की प्राचार्य डॉ संध्या सिंह एवं वरिष्ठ आचार्य रामदेव कुमार, उपेंद्र कुमार सिंह, अभय कुमार सिंह को अतिथि ने अंग वस्त्र देकर सम्मानित किया।
मौके पर एकल गीत विद्यालय के आचार्य राजेश पाठक ने प्रस्तुत किया। मंच संचालन पवन कुमार सिंह ने किया। शिशु विकास मंदिर समिति के अध्यक्ष शक्तिनाथ लाल दास ने अपने उद्बोधन में कहा कि गुरु दो अक्षर गु और रु के योग से बना है। गु का अर्थ होता है अंधकार और रु का अर्थ होता है दूर करने वाला। गुरु हमें अंधकार से दूर करने का कार्य करता है। गुरु की महिमा अपरंपार है।
संस्कारयुक्त शिक्षा गुरुकुल के रूप में आज भी सरस्वती शिशु विद्या मंदिर के विद्यालयों में जीवित है, जहां ज्ञान दिया जा रहा है। गुरु शिक्षा का दान करते हैं। जब भी मार्ग में अंधेरा प्रतीत होता है तब गुरु की आवश्यकता होती है। बच्चे देश राष्ट्र और समाज के प्रति समर्पित हो ऐसी अपेक्षा है।
मुख्य अतिथि आदित्य प्रसाद साहू ने कहा कि यह देश महापुरुषों और साधु-संतों का देश है। देश में गुरु शिष्य की परंपरा रही है गुरु को ईश्वर का दर्जा मिला हुआ है। प्रथम गुरु माता-पिता हैं। माता की गोद प्रथम पाठशाला है। गुरु बालक को शिक्षित कर वटवृक्ष के रूप में तैयार करते हैं। संस्कारयुक्त समाज एवं देश के निर्माण में गुरु की महती भूमिका होती है।
इस विद्यालय से जो बच्चे अध्ययन कर निकलते हैं वह देश एवं राष्ट्र के प्रति समर्पित होते हैं। अन्य विद्यालयों के बच्चे में इसका अभाव दिखता है। यदि आज झारखंड के प्रशासनिक अधिकारी इस विद्यालय से रहे होते तो झारखंड की इतनी बदनामी नहीं होती। मौके पर उन्होंने विद्यालय के चहुंमुखी विकास हेतु हरसंभव मदद की पेशकश की।
आचार्य सम्मान समारोह के इस कार्यक्रम में सरस्वती शिशु विद्या मंदिर धुर्वा एवं सरस्वती शिशु विद्या मंदिर निपट के आचार्य बंधु-भगिनी को अंगवस्त्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। धन्यवाद ज्ञापन शिशु विकास मंदिर समिति के माननीय सह मंत्री डॉ धनेश्वर महतो ने किया।
कार्यक्रम में रामकुमार पाहन, पूर्व विधायक, खिचरी विधानसभा, शिशु विकास मंदिर समिति (झारखंड) धुर्वा के संरक्षक पवन मंत्री, कोषाध्यक्ष एस वेंकट रमन, महावीर सिंह, लाल अशोक नाथ शाहदेव, बलराम उपाध्याय, डॉ सुचिता रानी, आशीष नाथ शाहदेव, नागेंद्र श्रीवास्तव, प्राचार्य डॉ संध्या सिंह, उप प्राचार्य ललन कुमार मौजूद थे।
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