मांग दिवस पर 10 जुलाई से आंगनबाड़ी केंद्र में हड़ताल करेंगी सेविका

 

  • कोडरमा जिला में छह माह से पोषाहार राशि बकाया
  • सेविका-सहायिकाओं का मानसिक टॉर्चर बंद हो : संजय पासवान

टीम एबीएन, कोडरमा/झुमरीतिलैया। झारखंड राज्य आंगनबाड़ी सेविका  सहायिका यूनियन (सीटू) की जिला स्तरीय बैठक रविवार को ब्लॉक परिसर स्थित चिल्ड्रेन पार्क में संपन्न हुई। अध्यक्षता जिला कोषाध्यक्ष संतोषी देवी व संचालन चिंतामणी ने किया। बैठक में चार से छह महीने का पोषाहार राशि नहीं मिलने के कारण आंगनबाड़ी केंद्र चलाने में आ रही समस्या सहित कई मुद्दे पर चर्चा की गयी। 

बैठक में ऑल इंडिया फेडरेशन ऑफ आंगनबाड़ी वर्कर्स एण्ड हेल्पर (आइफा) के आह्वान पर सेविका सहायिका को 26 हजार मानदेय, ग्रेच्युटी का लाभ व पेंशन देने की मांग पर देशव्यापी मांग दिवस के अवसर पर बकाया पोषाहार और मानदेय राशि की भुगतान सहित अन्य मांगों पर 10 जुलाई को डीसी के समक्ष विशाल प्रदर्शन करने और आंगनबाड़ी केंद्र में उसी दिन से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का निर्णय लिया गया। 

बैठक में कुछ परियोजना में पोषण ट्रैकर ऐप पर लाभुकों का आधार सिडिंग नहीं होने पर सेविका सहायिका का मानदेय व पोषाहार राशि में कटौती की निंदा किया गया। बैठक को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता सीटू के राज्य सचिव संजय पासवान ने कहा कि एक तरफ चार-छह महीने से पोषाहार का पैसा नहीं दिया जा रहा है, दूसरी तरफ आंगनबाड़ी केन्द्रों में जांच के नाम पर जिला प्रशासन और विभागीय अधिकारियों के द्वारा बार-बार दौरा किया जा रहा है और सेविका सहायिका का मानसिक टॉर्चर किया जा रहा है। 

जब तक बकाया भुगतान नहीं होता है, तब तक किसी भी प्रकार का जांच पर रोक लगे और उनका टॉर्चर बंद हो। वहीं परियोजना कार्यालय भ्रष्टाचार का अड्डा बन गया है, हर छोटे छोटे भुगतान पर कमीशन की मांग होती है, सेविकाएं परेशान हैं। केंद्र सरकार का खजाना पूरी तरह से खाली हो गया है, इसलिए अल्प मानदेय पर काम करने वाली सेविका सहायिका को नवंबर माह से केन्द सरकार मानदेय नहीं दे रही है। 

वर्तमान वित्तीय वर्ष का तीन माह बीत जाने के बावजूद केंद्र सरकार के द्वारा राज्य सरकार को पोषाहार का आवंटन नहीं दिया है। जिसके कारण आंगनबाड़ी मे पोषाहार उधार चलाने को मजबूर है। एक तरफ एक के बाद एक आंगनबाड़ी केन्द्रों को मॉडल आंगनबाड़ी केंद्र में तब्दील किया जा रहा है, दूसरी तरफ केन्द्र की भाजपानीत मोदी सरकार निजीकरण के रास्ते आईसीडीएस को कमजोर कर रही है। 

इसलिए इसे बचाने के लिए संघर्ष ही रास्ता है। आंगनबाड़ी यूनियन की प्रदेश अध्यक्ष मीरा देवी ने कहा कि एससी एसटी आंगनबाड़ी केंद्र में छह महीने से पोषाहार राशि नहीं मिला है, दुकानदार ने उधार देना बंद कर दिया है, सेविकाएं हमेशा मानसिक तनाव में रहती है। बिना मोबाइल और डाटा पैक के पोषण ट्रैकर ऐप पर काम करने का दबाव बनाया जाता है। 

सालों से रसोई सिलेंडर में गैस नहीं भराया जा रहा है, 1200 रूपये गैस का दाम के बदले 100 रूपये से भी कम जलावन के नाम पर भुगतान होता है और एक माह में 25 दिन सुबह का नाश्ता और दोपहर में गर्म खिचड़ी देना पड़ता है, उपर से महंगाई के कारण हर चीज का दाम दोगुना हो गया है, लेकिन पांच साल पुराना दर पर पोषाहार का राशन खरीदने के लिए कहा जाता है और भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया जा रहा है। 

दूसरी तरफ बीएलओ के काम का दबाव अलग से है। कहने को हमारा काम चार घंटे का है, लेकिन आठ घंटे से भी ज्यादा काम करना पड़ता है और न्यूनतम मजदूरी भी नहीं मिलता है।हीना प्रवीण, अर्चना देवी, कविता यादव, मंजू मेहता, सरस्वती देवी, बेबी देवी, विमला देवी, उर्मिला देवी, पिंकी देवी, कांति देवी, मीना एक्का सहायिका रीना देवी आदि ने भी अपने अपने विचार रखे। 

बैठक में किरण, शीला, संध्या, बबीता, मंजू, ललिता, रूपवन्ती, रेखा, ज्योति, उषा, सुमा, अनीता, निर्मला, कौशल्या, सुप्रीति, ज्योत्सना, माधुरी, अलका, वीभा, सरोज, अंजुम, गीता, रेश्मा, रीना, कोमन, रिंकी रंजन, सुमित्रा, गुड़िया, शांति, सुबीता, सुनीता, आशा, सीता, सबीता, बिनोदिनी सहित दर्जनों सेविका सहायिका मौजूद थी।

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