भारत-अमेरिका साझेदारी की मजबूती और लचीलेपन को प्रदर्शित कर रही मोदी की अमेरिका यात्रा

 

  • भारत को अमेरिका से मिलेगी ऐसी टेक्नोलॉजी जो चीन और पाकिस्तान के पास भी नहीं है, पीएम मोदी कर सकते हैं ये बड़ी डील 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। दुनिया में चार देश हैं जहां पर फाइटर जेट्स के इंजन बनते हैं। इन देशों में- अमेरिका, रूस, इंग्लैंड और फ्रांस हैं। यानि दुनिया के जितने भी देशों में फाइटर जेट उड़ रहे हैं, उनमें इन्हीं देशों में बने इंजन लगे हैं। जेट का इंजन बनाने की सुविधा भारत में भी हो सकती है।

अगर अमेरिकी कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक (जीई) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अमेरिका दौरे के बीच अपना प्लांट भारत में लगाने का डील कर लेती है। जीई कंपनी अपना प्लांट या इंजन बनाने का काम हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) को लाइसेंस के तहत दे सकता है। टेक्नोलॉजी और डिजाइन शेयर कर सकता है, तकनीक सिखा सकता है, ताकि भारत में आसानी से इंजन का निर्माण हो सके।

अमेरिकी नौसेना अपने फाइटर जेट्स में इस इंजन का इस्तेमाल 30 सालों से कर रही है। जीई एयरोस्पेस की वेबसाइट के अनुसार अब तक 1600 से ज्यादा एफ414 इंजन डिलीवर हो चुके हैं। ये इंजन जिन विमानों में लगे हैं, उन्होंने 50 लाख से ज्यादा घंटों की उड़ान कर रखी है। नयी तकनीकों वाले कूलिंग सिस्टम से इंजन की क्षमता और उम्र भी बढ़ जाती है।

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल के दौरान शीर्ष अधिकारी रहीं लिसा कर्टिस ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका की आधिकारिक राजकीय यात्रा भारत-अमेरिका साझेदारी की मजबूती और लचीलेपन को दर्शाती है।

सेंटर फॉर ए न्यू अमेरिकन सिक्योरिटी (सीएनएएस) थिंक टैंक में हिंद-प्रशांत सुरक्षा कार्यक्रम की सीनियर फेलो और निदेशक कर्टिस ने कहा कि यह यात्रा इस बात को भी रेखांकित करती है कि बाइडन प्रशासन क्षेत्र में चीन के उदय को चुनौती देने में नई दिल्ली की भूमिका को कितना महत्व देता है। 

कर्टिस ने 2017 से 2020 तक दक्षिण एशिया के लिए ट्रंप प्रशासन के प्रमुख रणनीतिकार के रूप में कार्य किया। प्रधानमंत्री मोदी, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन और प्रथम महिला जिल बाइडन के निमंत्रण पर 21 से 24 जून तक अमेरिका की यात्रा पर हैं। कर्टिस ने कहा कि रक्षा मोर्चे पर वाशिंगटन, भारत के साथ जेट इंजनों के सह-उत्पादन के लिए एक सौदे की संभवत: घोषणा करेगा जो कि एक महत्वपूर्ण पहल है। 

यह सुरक्षा साझेदारी में विश्वास का निर्माण करेगी और भारत की रक्षा उत्पादन क्षमताओं में बदलाव का प्रतीक होगी। उन्होंने कहा कि भारत आखिरकार अमेरिकी निर्माता जनरल एटॉमिक्स से उन्नत एमक्यू-9बी सशस्त्र ड्रोन खरीदने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर कर सकता है। 

कर्टिस ने कहा कि एमक्यू-9बी चीन के खिलाफ भारत की रक्षा प्रणाली को मजबूती प्रदान करेगा और उसे अपनी विवादित सीमा पर चीनी सैनिकों की गतिविधियों की निगरानी करने तथा हिंद महासागर में चीनी समुद्री गतिविधियों पर नजर रखने के लिए अपनी नौसैनिक निगरानी क्षमताओं में सुधार करने में मदद करेगा।

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