टीम एबीएन, रांची। डीएवी हेहल में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर सत्यानन्द योग मिशन रांची के निदेशक स्वामी मुक्तरथ और अवनीश कुमार ने दो हजार विद्यार्थियों एवं लगभग पचास शिक्षकों को योग और ध्यान का अभ्यास कराये। प्राचार्य एस के मिश्रा ने स्वामी मुक्तरथ और इनके टीम का स्वागत किये तथा योग के महत्व, इस वर्ष के योग दिवस के थीम की जानकारी और अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के लोगों का पूर्ण चित्रण को विस्तार से समझाये।
स्वामी मुक्तरथ ने कहा कि समय का डिमांड है योग। लेकिन योग किसको कहें उसे सही-सही पहचानने की जरूरत है। वसुधैव कुटुम्बकम की भावना को अपने भीतर जागृत करना होगा और उस जागृति के लिये मानव सेवा, कर्त्तव्यपरायणता तथा ईमानदारी की जरूरत है। दुनिया को छोड़ अपने परिवार को आगे बढ़ाने की सोचिये।
वहीं से सेवा शुरू कीजिये इससे आप खुश रहेंगे, तनाव कम होगा, आध्यात्मिक विकास होगा और सही मायने में योग का मकसद भी पूरा होगा। योग केवल आसन और प्राणायाम नहीं है, अष्टांग योग के प्रथम दो सोपान यम और नियम में तो पूरा का पूरा यही शिक्षा ही है। उसके बाद ही आसन और प्राणायाम की चर्चा आती है और अंत में ध्यान है तथा समाधि है।
योग को खोजना पड़ेगा उसकी सतत साधना करनी होगी तब आप के व्यक्तित्व में निखार आयेगी। हृदय के भाव अच्छे होंगे, कुंठित और नकारात्मक विचारों का नाश होगा तथा आध्यात्मिक ऊर्जा से आप का जीवन सुखद, सरल और पूर्ण होगा।
सभी विद्यार्थियों को ताड़ासन, त्रिकोणासन, सूर्यनमस्कार, शशांकासन, उष्ट्रासन, अर्ध मत्स्येन्द्रासन, सर्वांगासन, मत्स्यासन, नाड़ीशोधन और भ्रामरी प्राणायाम कराया गया और इन अभ्यासों को प्रतिदिन करने की सलाह दी गयी, ताकि जीवन में सुख, सामंजस्य, आनंद और उत्तम स्वास्थ्य की प्राप्ति हो।
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