टीम एबीएन, रांची। जगन्नाथपुर थाना के सामने त्रिकोण मोड़ पर लगी कैलाशपति मिश्रा की प्रतिमा 30 दिनों के भीतर हटा दी जायेगी। यह लिखित समझौता जिला दंडाधिकारी और आंदोलनकारियों के बीच हुई। लिखित समझौते के बाद आंदोलनकारियों का स्वाभिमान आन्दोलन तत्काल स्थगित कर दिया गया है।
भगवान बिरसा मुंडा की 123वीं शहादत दिवस पर आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा द्वारा घोषित प्रतिमा तोड़ने के आंदोलन में हजारों आंदोलनकारी बिरसा चौक पर जुटे थे। पुलिस कर्मियों और आंदोलनकारियों के बीच दो घंटे तक हुईं नोक-झोंक के बाद फैसला लिया गया। आंदोलनकारी अपने हाथों में सबल, गैंता, हमड़, रस्सी और पारम्परिक हथियारों के साथ जुटे थे।
आंदोलनकारियों का साफ कहना था कि सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का उल्लंघन कर कैलाश पति मिश्रा की प्रतिमा लगायी गयी है। श्री मिश्र न तो आंदोलनकारी थे और न ही स्वतन्त्रता सेनानी। ऐसे में उनकी मूर्ति लगाना गैरकानूनी है। प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट को गुमराह करते हुए कैलाशपति मिश्रा की प्रतिमा लगायी है।
मौके पर राजी पड़हा केंद्रीय समिति के अध्यक्ष रंजीत उरांव, जय आदिवासी केंद्रीय परिषद की अध्यक्ष निरंजना हेरेंज टोप्पो ने झारखंड आंदोलनकारी भुवनेश्वर केवट, रोजलीन तिर्कीसभा, सरोजिनी कच्छप, सीताराम उरांव, प्रफुल्ल तत्वा, सुरेश महतो, महेंद्र उरांव, प्रतिमा कुजुर, विक्की पाहन, बुद्धू पाहन, अजीत पाहन, विश्वजीत प्रमाणिक, गोपाल रवानी, संजू उरांव, भुवनेश्वर ठाकुर शनिचर मांझी, शबनम फातमी अभिषेक साहू, रामनंदन साहू, छेदी अंसारी, ताहिर अंसारी, बालकिशन यादव, गौतम बोस, बिंदे सोरेन, विनोद राम, दयानंद राम, दिनेश राम, महावीर राम लोहरा, मनोज श्रीवास्तव, भोला नाथ सिंह, अल्फ्रेड आइंद, रतिया इंदवार, शिबू काली मइती, आनंद सिंह मसकल्याण, भीखराम उरांव सहित अन्य बड़ी संख्या में झारखंड आंदोलनकारी उपस्थित थे।
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