टीम एबीएन, रांची। देश की पहली नागरिक महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार देर शाम झारखंड हाइकोर्ट के नये भवन का उद्घाटन किया। इस दौरान अपना भाषण समाप्त करने से पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि यहां भारत के मुख्य न्यायाधीश और झारखंड के चीफ जस्टिस के अलावा बहुत से जज, वकील और विद्वान मौजूद हैं। बहुत से केस हाईकोर्ट में फाइनल होते हैं।
बहुत से केस का फैसला सुप्रीम कोर्ट से आता है। जिनके पक्ष में फैसला आता है, वे खुश होते हैं। 5-10 या 20 साल के बाद उनकी खुशी गायब हो जाती है, क्योंकि जिसके लिए वे खुश होते थे, वो उनको मिलता नहीं। जिसके लिए समय, रुपये और रातों की नींद बर्बाद कर दी, वो खुशी उन्हें नहीं मिलती। वे फिर से दुखी हो जाते हैं।
राष्ट्रपति ने कहा कि मैं एक छोटे-से गांव से आयी हूं। मैं फैमिली काउंसलिंग सेंटर की एक सदस्य थी। कुछ केस फाइनल होने के बाद हम उनके घर जाते थे। यह देखने के लिए कि जिस केस को हमने फाइनल किया, वह परिवार ठीक है या नहीं। बहुत से लोग अपने फैसले लेकर मेरे पास आते हैं कि फैसला तो हमारे पक्ष में आ गया, लेकिन हमें न्याय नहीं मिला।
मुझे नहीं मालूम सुप्रीम कोर्ट के आगे कुछ होता है। ऐसे लोगों का कुछ हो सकता है। राष्ट्रपति ने कहा कि चीफ जस्टिस डॉ डीवाई चंद्रचूड़ ने मुझे बताया कि ऐसे मामले होते हैं। लोग कंटेंम्प्ट में जा सकते हैं। आप सभी जज बैठे हैं, वकील बैठे हैं, कानून मंत्री यहां बैठे हैं। इसका कोई रास्ता है या नहीं। आप सबको इसका रास्ता निकालना चाहिए। उन्हें सही मायने में न्याय मिलना चाहिए।
ये जिम्मेदारी आप सबकी है। राष्ट्रपति ने कहा कि इसका रास्ता जरूर होगा। नियम हम बनाते हैं। अगर नियम नहीं है, तो नियम बनाना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि लोगों को न्याय मिलना चाहिए। मैं चीफ जस्टिस के पास बहुत से लोगों को भेजूंगी। आज लोग मेरे पास नहीं पहुंच पाते, पहले बहुत से लोग आते थे। मैं उन्हें कहीं भेजती थी, लेकिन वो कहां गायब हो जाते थे, मुझे मालूम नहीं होता था। महामहिम ने एक बात बार-बार कही कि लोगों को असल न्याय मिलना चाहिए।
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