टीम एबीएन, रांची। झारखंड के कृषि मंत्री बादल के नेतृत्व में केरल भ्रमण पर गई टीम लगातार झारखंड में कृषि की नई तकनीक को लागू करने के लिए अलग-अलग कृषि संस्थानों का भ्रमण कर रही है। इसी क्रम में राज्य के मंत्री कृषि पशुपालन एवं सहकारिता बादल ने सचिव अबू बकर सिद्दीकी एवं विभागीय पदाधिकारियों के साथ टीम ने केंद्रीय मात्स्यकी प्रौद्योगिकी संस्थान कोच्ची, केरल का दौरा किया, जहां कृषि, मत्स्य से जुड़ी तकनीकी एवं शैक्षणिक व्यवस्थाओं को लेकर टीम ने जानकारी हासिल की।
कृषि मंत्री बादल ने कहा कि केरल राज्य में कृषि, पशुपालन एवं मत्स्य के क्षेत्र में कई स्तर पर कार्य किए हैं, जिसमें तकनीकी समावेश एक महत्वपूर्ण अंग है। हमारा प्रयास है कि केरल राज्य की उत्कृष्ट कृषि नीति एवं तकनीक को झारखंड में लागू की जाये। मंत्री का स्वागत संस्थान के प्रभारी निदेशक डॉ शंकर टी वी के द्वारा किया गया। मंत्री के द्वारा संस्थान के निदेशक को झारखंड के मात्स्यकी संसाधनों एवं उसके अनुसार राज्य के जरूरतों के बारे में विस्तृत से चर्चा की गई।
वहां के वैज्ञानिकों को राज्य में अवस्थित जलाशयों, परित्यक्त खदानों से मत्स्य शिकारमही कैसे किया जाये, इससे संबंधित तकनीक उपलब्ध करवाने के बारे में चर्चा हुई।
वहीं चर्चा के दौरान मंत्री ने कहा कि अपनी टीम को राज्य में भेजकर जलकर का विस्तृत सर्वे एवं जानकारी एकत्र करते हुए राज्य के आवश्यकता अनुसार, नाव एवं जाल का डिजाइन करें, जिससे मत्स्य शिकारमही एवं मत्स्य पालन व्यवसाय से जुड़े लोगों को अधिक से अधिक फायदा हो सके।
बता दें कि झारखंड राज्य में वृहत रूप से हो रहे केज कल्चर के लिए विशेषकर केज के बाहर ट्रैप लगाने से भी मत्स्य पालकों की आमदनी में वृद्धि होती है।
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