स्वयंसेवक हनुमान जी जैसा निस्वार्थ भाव से राष्ट्र की सेवा करें : मोहन भागवत

 

  • दक्षिण बिहार के शिक्षार्थियों से संघ प्रमुख ने परिचय लिया
  • द्वितीय वर्ष वर्ग में स्वयंसेवकों के जिज्ञासा का सोदाहरण समाधान बतायें
  • श्रीराम की प्रतिज्ञा ने ही उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम बनाया
  • राष्ट्र और सनातन संस्कृति के संरक्षण के लिए श्रीराम जैसा प्रतिज्ञा करें
  • आज मोहन भागवत संघ के प्रथम संघचालक केशव बलिराम हेडगेवार की प्रतिमा का करेंगे अनावरण
  • मोहन भागवत का लोहरदगा प्रवास का होगा सत्र में अंतिम उद्बोधन

टीम एबीएन, लोहरदगा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक प्रमुख मोहन भागवत गुरुवार को शिक्षार्थियों के तमाम जिज्ञासाओं का समाधान किये। संघ प्रमुख मोहन भागवत शिक्षार्थियों के जिज्ञासा के अनुरूप उनका समाधान भी बताया। वह गुरुवार को दक्षिण बिहार प्रांत के शिक्षार्थियों के साथ परिचय प्राप्त किए।उनके कार्यों की गतिविधियों की जानकारी भी ली।

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत लोहरदगा में चल रहे संघ शिक्षा वर्ग द्वितीय वर्ष विशेष के शिक्षार्थियों को संघ की प्रतिज्ञा के बारे में विस्तार पूर्वक बताया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि संघ शिक्षा वर्ग बौद्धिक और शारीरिक रूप से स्वयंसेवकों को संघ की जानकारी तो देते ही हैं। साथ-साथ समाज, राष्ट्र और धर्म की शिक्षा भी देते हैं।

संघ प्रतिज्ञा सर्वशक्तिमान श्री परमेश्वर अपने पूर्वजों का स्मरण कराते हुए स्वयंसेवकों ने प्रतिज्ञा किया कि अपने पवित्र सनातन धर्म और संस्कृतियों के साथ हिंदू समाज का संरक्षण कर राष्ट्र की सर्वांगीण उन्नति करने के लिए मैं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का घटक बना हूं।संघ का कार्य मैं प्रमाणिकता और निस्वार्थ बुद्धि से तन, मन, धन पूर्वक करूंगा।

इस व्रत का मैं आजन्म पालन करूंगा। इस प्रतिज्ञा के बाद सभी शिक्षार्थी संघ प्रमुख के साथ भारत माता की जय की जयकारे लगाये। इस अवसर पर संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि श्रीराम को भगवान बनाने में उनके माता-पिता के बजाय उनके प्रतिज्ञा का योगदान अधिक है।

श्रीराम द्वारा की गई प्रतिज्ञा- अच्छे कार्य करते समय प्रतिज्ञा सम्बल बनती हैं। भीष्म, प्रताप, शिवाजी, भगतसिंह, चंद्रशेखर आजाद और सुभाष चन्द्र बोस प्रतिज्ञा से प्राप्त सम्बल के कारण ही अपने उद्देश्य को प्राप्त कर पाये।

हम प्रतिज्ञा का प्रारम्भ सर्वशक्तिमान श्री परमेश्वर से करते हैं। प्रतिज्ञा में हम अपने पूर्वजों का स्मरण भी करते हैं। प्रतिज्ञा व्यक्तिगत संकल्प हैं। यह केवल कण्ठस्थ ही नहीं हृदयस्थ भी होने चाहिए। प्रतिज्ञा ऐसी होनी चाहिए कि हम सनातन धर्म और संस्कृति के साथ हिन्दू समाज के संरक्षण का व्रत लें, राष्ट्र की सर्वांगीण उन्नति की प्रतिज्ञा। यह सर्वांगीण उन्नति सर्वे भवन्तु सुखिनः…. के भाव से ही होगी।

संघ का कार्य प्रमाणिकता से करूंगा, प्रमाणिकता का अर्थ हैं जो कहे वहीं करें। स्वयंसेवकों ने प्रतिज्ञा किया कि मैं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का कार्य निःस्वार्थ बुद्धि से करूंगा। स्वयंसेवक के मन में किसी प्रकार का लोभ नहीं आना चाहिए। जैसे श्रीराम की भक्ति में हनुमान जी ने किया है। इस प्रतिज्ञा से ही फलश्रुति भारत माता की जय से होगी।

दूसरी ओर संघ शिक्षा वर्ग प्रथम वर्ष का भी कक्षा संचालित हो रहा है। प्रशिक्षण में बिहार और झारखंड के स्वयंसेवक शामिल है। संघ शिक्षा वर्ग का गुरुवार को छठा दिन था। वही द्वितीय वर्ष के विशेष वर्ग में संघ प्रमुख मोहन भागवत जी का तीसरा दिन था।

शुक्रवार को उनका लोहरदगा में प्रवास का अंतिम दिन होगा। वह शुक्रवार को प्रातः 9:30 संघ संस्थापक और करोड़ों लोगों के प्रेरक केशव बलिराम हेडगेवार की प्रतिमा का अनावरण करेंगे।

संघ शिक्षा वर्ग में विशेष रूप से संघ के राष्ट्रीय अधिकारी अखिल भारतीय प्रचारक प्रमुख अरुण जैन, अखिल भारतीय सह- प्रचार प्रमुख आलोक, बिहार- झारखंड क्षेत्र प्रचारक रामनवमी, सह- प्रचारक रामकुमार, क्षेत्र संघचालक देवव्रत पहान, झारखंड प्रांत प्रचारक गोपाल, सह- प्रांत प्रचारक राजीव कुमार और झारखंड प्रांत संघचालक सच्चिदानंद लाल समेत तमाम अधिकारी मौजूद है। संघ शिक्षा वर्ग दो जून तक चलेगा।

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