एबीएन नॉलेज डेस्क। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने चंद्रमा की मिट्टी से ऑक्सीजन निकालने में कामयाबी हासिल की है।
इस पहला का लाभ आने वाले दिनों में चांद की यात्रा के दौरान अंतरिक्ष यात्रियों को मिलने वाला है। वैज्ञानिक अपनी इस कामयाबी से उत्साहित हैं।
बताया गया है कि यह ऑक्सीजन इतनी मात्रा में है कि अंतरिक्ष यात्रियों की एक दिन की जरूरत पूरी करना संभव है। नासा अंतरिक्ष यात्रियों का एक दल चांद पर भेजने की तैयारियों को अंतिम रूप देने में लगा है।
ऐसे में समय में मिली यह सफलता महत्वपूर्ण है; क्योंकि ऑक्सीजन जीवन को चलाने की एक महत्वपूर्ण कड़ी है। बिना इसके पृथ्वी पर जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती, अंतरिक्ष की तो महती जरूरत है।
चंद्रमा की मिट्टी से ऑक्सीजन : नासा के जानसन स्पेस सेंटर के वैज्ञानिकों को यह कामयाबी मिली है।
पिछले सप्ताह नासा ने अपनी इस उपलब्धि को सार्वजनिक किया है। यह उपलब्धि दुनिया के किसी भी स्पेस सेंटर को पहली बार मिली है, चंद्रमा की मिट्टी से ऑक्सीजन निकाली गयी हो।
यह ऑक्सीजन चांद पर कई अन्य तरीके से मददगार हो सकता है। विज्ञान की भाषा में इसे इन-सीटू रिसोर्स यूटिलाइजेशन के नाम से पहचाना जा रहा है।
नासा का अगला प्लान
नासा इन दिनों अपने आर्टमिस मिशन की तैयारियों में जुटा है। यह मिशन अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा पर भेजने को तय किया गया है।
मिशन का उद्देश्य चंद्रमा की सतह पर लंबे समय तक यात्रियों की मौजूदगी बनाये रखना है। ऑक्सीजन की समस्या का समाधान मिलने के साथ ही इस समस्या का समाधान मिलता हुआ दिख गया है।
कार्बो थर्मल रिडक्शन डिमॉन्स्ट्रेशन टीम से जुड़े वैज्ञानिकों ने डर्टी थर्मल वैक्यूम चैंबर का इस्तेमाल करके चंद्रमा पर पाए जाने वाले इस इको सिस्टम को तैयार किया।
इसके अंदर का वातावरण चंद्रमा जैसा होता है। कार्बो थर्मल रिएक्टर वह जगह है, जहां ऑक्सीजन निकालने की प्रक्रिया पूरी की जाती है।
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