टीम एबीएन, लोहरदगा। कार्यकारिणी समिति नेतरहाट विद्यालय समिति के सभापति डॉ संतोष उरांव ने नेतरहाट विद्यालय के प्राचार्य पद पर नियुक्ति हेतु बिना आम सहमति के विज्ञापन संख्या-01/2023 का प्रकाशन कर दिया था।
प्रकाशित विज्ञापन नियम विरुद्ध होने के कारण विद्यालय के प्राचार्य सह समिति के सदस्य सचिव डॉ संतोष कुमार सिंह ने माननीय उच्च न्यायालय, झारखंड में रिट याचिका संख्या-डब्ल्यूपी (सी)-1977/2023 दायर किया था।
दायर याचिका के संबंध मे आज दिनांक 02/05/2023 को माननीय न्यायाधीश श्री एसएन पाठक के कोर्ट में सुनावई हुई। याचिकाकर्ता की ओर से पूर्व महाधिवक्ता सह वरिष्ठ अधिवक्ता अजीत कुमार ने कोर्ट को बताया कि दिनांक-27/03/2023 को सभापति द्वारा वाट्सअप के माध्यम से सूचना देकर एक बैठक बुलायी थी, बैठक मे प्राचार्य सह सदस्य सचिव को नहीं बुलाया गया।
बैठक में दो वरीय सदस्यों के मत के विपरीत जाकर बिना आम सहमति के सभापति ने नियुक्ति के लिए विज्ञापन का प्रसारण कर दिया। कोर्ट को बताया गया कि प्रकाशित विज्ञापन के संबंध में दोनों सदस्यों ने लिखित आपत्ति विभाग को दिया।
वरिष्ठ अधिवक्ता ने यह भी बताया कि बाई लॉ के अनुसार प्रोसिडिंग जारी करने का अधिकार सदस्य सचिव को है, जबकि ऐसा नहीं होना गंभीर चिंता का विषय है। वरिष्ठ अधिवक्ता के दलील सुनने के बाद कोर्ट ने कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए सभापति को निर्देश दिया है कि किन परिस्थितियों में बिना आम सहमति के विज्ञापन का प्रकाशन किया गया।
इसपर अपना स्पष्ट पक्ष कोर्ट के समक्ष रखे। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि इस नियुक्ति के संबंध में अंतिम निर्णय कोर्ट के आदेश के उपरांत ही लिया जायेगा। अंत में कोर्ट ने कहा कि सभापति को कोई भी फैसला स्वयं लेने का अधिकार नहीं है, भविष्य में इसकी पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए सभापति को सचेत रहने की जरूरत है।
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