जन और सामाजिक सरोकारों से जुड़े मुद्दे पर पत्रकार अधिक काम करें : डॉ गुप्ता

 

लोहरदगा में विश्व श्रम दिवस पर पत्रकारिता अर्थ परिभाषा और सुरक्षा पर सेमिनार का आयोजन रांची लोहरदगा और गुमला के पत्रकार हुए शामिल टीम एबीएन, लोहरदगा। पत्रकारों को जन और सामाजिक सरोकार से जुड़े मुद्दों से जुड़कर गरीबों, किसानों, मजदूरों, जरुरतमंदों, महिलाओं और विद्यार्थियों को न्याय दिलाने व हितों की रक्षा के लिए काम करने की जरूरत है। बदलते परिवेश में पत्रकारों को जन सरोकार के साथ राष्ट्र को सशक्त बनाने के लिए अपने कलम की धार को और गति देने की जरूरत है। उक्त बातें अतिथि शिक्षाविद बीएस कॉलेज प्राध्यापक डॉ शशि कुमार गुप्ता ने कही। वह लोहरदगा के बक्शीडीपा में विश्व श्रम दिवस पर एनयूजे (आई) और जेयूजेएस की लोहरदगा इकाई जिला पत्रकार संघ द्वारा आयोजित पत्रकारिता, अर्थ, परिभाषा और सुरक्षा विषयक कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। डॉ गुप्ता ने कहा कि पत्रकारों का सम्मान आज भी कायम है। जरूरत इस बात की है, कि पत्रकार को भी अपनी गरिमा को बनाए रखने की जरूरत है। आचार- व्यवहार और लेखनी के माध्यम से समाज में उन्हें अपनी मिरर की भूमिका को पूरी पारदर्शिता के साथ निभानी चाहिए। जेएसजेयू के प्रदेश अध्यक्ष बलदेव प्रसाद शर्मा ने कहा कि विभिन्न समाचार माध्यमों के जरिए दुनिया भर के समाचार हमारे घरों तक पहुंचते हैं, चाहे वह समाचार पत्र हो या टेलीविजन और रेडियो या इंटरनेट या सोशल मीडिया। समाचार संगठनों में काम करने वाले पत्रकार देश-दुनिया में घटनेवाली घटनाओं को समाचार के रूप में परिवर्तित कर हम तक पहुंचाते हैं। इसके लिए वह रोज सूचनाओं का संकलन करते हैं और उन्हें समाचार के प्रारूप में ढालकर पेश करते हैं। इस पूरी प्रक्रिया को ही पत्रकारिता कहते हैं। पत्रकारिता का अर्थ पत्रकारिता शब्द अंग्रेजी के जर्नलिज्म का हिन्दी रूपांतर है। जर्नलिज्म शब्द जर्नल से निर्मित है और इसका अर्थ है दैनिकी, दैनंदिनी, रोजनामा अर्थात जिसमें दैनिक कार्यों का विवरण हो। आज जर्नल शब्द मैगजीन, समाचार पत्र, दैनिक अखबार का द्योतक हो गया है। जर्नलिज्म यानी पत्रकारिता का अर्थ समाचार पत्र, पत्रिका से जुड़ा व्यवसाय, समाचार संकलन, लेखन, संपादन, प्रस्तुतीकरण, वितरण आदि होगा। जेएसजेयू के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष स्वामी दिव्य ज्ञान ने कहा कि वर्तमान युग मे पत्रकारिता के अभी अनेक माध्यम हो गये हैं, जैसे-अखबार, पत्रिकाएं, रेडियो, दूरदर्शन, वेब-पत्रकारिता, सोशल मीडिया, इंटरनेट आदि। हिन्दी में भी पत्रकारिता का अर्थ भी लगभग यही है। पत्र से पत्रकार और फिर पत्रकारिता से इसे समझा जा सकता है। पत्रकार का अर्थ समाचार पत्र का संपादक या लेखक। और पत्रकारिता का अर्थ पत्रकार का काम या पेशा, समाचार के संपादन, समाचार इकट्ठे करने आदि का विवेचन करने वाली विधा है। उन्होंने कहा कि वृहत शब्दकोश में साफ है कि पत्र का अर्थ वह कागज या साधन जिस पर को बात लिखी या छपी हो जो प्रामाणिक हो, जो किसी घटना के विषय को प्रमाणरूप पेश करता है। पत्रकार का अर्थ उस पत्र, कागज को लिखने वाला, संपादन करने वाला। सेमिनार में रांची, गुमला और मेजबान लोहरदगा के पत्रकार शामिल हुए। कार्यशाला में एनयूजे (आई)के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बिहार झारखंड और उड़ीसा के प्रभारी दीपक मुखर्जी ने कहा कि जनसंचार माध्यम दुनिया का नक्शा बदल दिया है। सामयिक ज्ञान का व्यवसाय ही पत्रकारिता है। इसमे तथ्यों की प्राप्ति उनका मूल्यांकन और ठीक-ठाक प्रस्तुतीकरण होता है। पत्रकारिता को रणभूमि से ज्यादा बड़ी चीज समझता हूं। यह एक जीवन है, जिसे अपने को स्वेच्छापूर्वक समर्पित किया। पत्रकारिता कला भी है, वृत्ति भी और जनसेवा भी। जब को यह नहीं समझता कि मेरा कर्तव्य अपने पत्र के द्वारा लोगों का ज्ञान बढ़ाना, उनका मार्गदर्शन करना है, तब तक से पत्रकारिता की चाहे जितनी ट्रेनिंग दी जाये, वह पूर्णरूपेण पत्रकार नहीं बन सकता है। ज्ञान और विचारों को समीक्षात्मक टिप्पणियों के साथ शब्द, ध्वनि तथा चित्रों के माध्यम से जन-जन तक पहुंचाना ही पत्रकारिता है। यह वह विद्या है जिसमें सभी प्रकार के पत्रकारों के कार्यों, कर्तव्यों और लक्ष्यों का विवेचन होता है। पत्रकारिता समय के साथ साथ समाज की दिग्दर्शिका और नियामिका है। सेमिनार को गुमला के दिलीप मिश्रा, संजय कुमार सिन्हा, राकेश कुमार, शशि कुमार, लोहरदगा के अवनी कुमार, अरविंद पाठक, ओम प्रकाश साहू, रवि प्रजापति, आकाश कुमार, किनेश कुमार, देवकुमार सिंह, कृष्ण कुमार मिश्र, नूतन कच्छप, शकील अहमद, इमरान हुसैन आदि ने संबोधित करते हुए कहा किवर्तमान दुनिया में पत्रकारिता का क्षेत्र बहुत व्यापक हो गया है। शायद ही को क्षेत्र बचा हो जिसमें पत्रकारिता की उपादेयता को सिद्ध न किया जा सके। इसलिए यह कहना अतिशयोक्ति न होगी कि आधुनिक युग में जितने भी क्षेत्र हैं। सबके सब पत्रकारिता के भी क्षेत्र हैं, चाहे वह राजनीति हो या न्यायालय या कार्यालय, विज्ञान हो या प्रौद्योगिकी हो या शिक्षा, साहित्य हो या संस्कृति या खेल हो या अपराध, विकास हो या कृषि या गांव, महिला हो या बाल या समाज, पर्यावरण हो या अंतरिक्ष या खोज। इन सभी क्षेत्रों में पत्रकारिता की महत्ता एवं उपादेयता को सहज ही महसूस किया जा सकता है। दूसरी बात यह कि लोकतंत्र में इसे चौथा स्तंभ कहा जाता है। ऐसे में इसकी पहुंच हर क्षेत्र में हो जाता है।समय के साथ पत्रकारिता का मूल्य बदलता गया है। इतिहास पर नजर ड़ाले तो स्वतंत्रता के पूर्व की पत्रकारिता का मुख्य उद्देश्य स्वतंत्रता प्राप्ति ही लक्ष्य था। स्वतंत्रता के लिए चले आंदोलन और स्वतंत्रता संग्राम में पत्रकारिता ने अहम और सार्थक भूमिका निभाइए है। उस दौर में पत्रकारिता ने परे देश को एकता के सूत्र में बांधने के साथ साथ पूरे समाज को स्वाधीनता की प्राप्ति के लक्ष्य से जोड़े रखा। आजादी के बाद निश्चित रूप से इसमें बदलाव आना ही था। आज इंटरनेट और सूचना अधिकार ने पत्रकारिता को बहुआयामी और अनंत बना दिया है। आज को भी जानकारी पलक झपकते उपलब्ध करा जा सकती है। पत्रकारिता वर्तमान समय मे पहले से क गुना सशक्त, स्वतंत्र और प्रभावकारी हो गया है। अभिव्यक्ति की आजादी और पत्रकारिता की पहुंच का उपयोग सामाजिक सरोकारों और समाज की भला के लिए हो रहा है लेकिन कभी कभार इसका दुरुपयोग भी होने लगा है। पत्रकार में कुछ गुण ऐसे होने चाहिए जो उसे सफल पत्रकार बना सकता है उसमें सक्रियता, विश्वासपात्रता, वस्तुनिष्ठता, विश्लेषणात्मक क्षमता, भाषा पर अधिकार होनी चाहिए। सभी प्रकार के समाचारों में सीधी, सरल और बोधगम्य भाषा का प्रयोग किया जाता है।

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